एलआइजी से नौलखा तक एलिवेटेड कारिडोर बनाने के लिए इंदाैर उत्थान अभियान के द्वारा प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद इसके निर्माण पर अंतिम मोहर लगी और काम श …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एलआइजी से नौलखा तक एलिवेटेड कारिडोर बनाने के लिए इंदाैर उत्थान अभियान के द्वारा प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद इसके निर्माण पर अंतिम मोहर लगी और काम शुरू हुआ। इंदौर उत्थान अभियान द्वारा अलग-अलग महानगरों का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव इंदाैर में तो लागू हुआ ही अब प्रदेश के सभी छोटे शहरों में इसके अनुसार एलिवेटेड कारिडोर बनाए जाएंगे। डी-कंजेशन परियोजना के तहत इन कारिडोर का निर्माण कर शहरों की सड़कों और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जाम कम करने के साथ यात्रा समय घटाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी बना रहा कार्ययोजना
दरअसल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस दिशा में कार्ययोजना तैयार कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के कई शहरों में एलिवेटेड कारिडोर परियोजनाओं पर काम जारी है। इससे छोटे शहरों में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम किया जा सकेगा। इंदौर उत्थान अभियान के अजित सिंह नारंग का कहना है कि नागपुर, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में एलिवेटेड कारिडोर का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किया था।
इस प्रस्ताव का प्रजेंटेशन इंदौर में जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों को दिखाया गया और मुख्यमंत्री को भी प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद इंदाैर में एलआइजी से नौलखा तक एलिवेटेड कारिडोर बनाया जा रहा है। अब प्रदेश के छोटे शहरों में एलिवेटेड कारिडोर निर्माण का सरकार ने नीतिगत निर्णय लिया है।
40 साल तक नहीं बढेगा यातायात दबाव
166 प्रतिशत अधिक स्थान उपलब्ध होगा। अजित सिंह नारंग का कहना है कि वर्तमान में शहरों में यातायात दबाव को कम करने के लिए एलिवेटेड कारिडोर जरूरी है। नीचे छह लेन और ऊपर चार लेन की सुविधा मिलने से 166 प्रतिशत अधिक स्थान उपलब्ध होगा। इससे 40 साल तक यातायात का दबाव कम होगा। कम से कम दुर्घटना किए, कम से कम पेट्रोल-डीजल फूके, कम से कम प्रदूषण फैलाए और समय पर अपने गंतव्य तक वाहन पहुंचाने के लिए कारिडोर जरूरी है।
लंबी और कम दूरी के वाहन अलग होने से मिलेगी गति
वाहन अलग होने से मिलेगी गति। नारंग का कहना है कि एलिवेटेड कारिडोर का उद्देश्य शहरों के भीतर और बाहर जाने वाले यातायात को अलग करना है, जिससे बिना सिग्नल बाधा के तेज और सुगम आवागमन संभव हो सके। इससे नीचे और ऊपर दोनों स्तरों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और जाम की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है। कम दूरी वाले वाहन नीचे और लंबी दूरी वाले वाहन ऊपर से गुजर सकेंगे। वाहन प्रथक-प्रथक होने से तेज गति से आवागमन हो सकेगा।
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