इसे मूल स्वरूप में लौटाने के लिए लाइम वर्क पद्धति के तहत चूने का उपयोग कर एक प्राचीन और पारंपरिक तकनीक से निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। …और पढ़ें
HighLights
- निर्माण के दौरान आ रहे 60 से 70 वर्ष पुराने वृक्षों को कर रहे संरक्षित
- निर्माण साढ़े तीन एकड़ में 150 करोड़ रुपये की लागत से तीन चरणों में पूरा होगा
- प्रथम चरण में संपूर्ण भवन का नवीनीकरण चल रहा है
प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। केसरबाग रोड स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक का निर्माण कार्य लालबाग से लगी हुई रामपुर कोठी (पुराने आटीओ भवन) में तेज गति से चल रहा है। इसे अपने पुराने मूल स्वरूप में लौटाने के लिए लाइम वर्क पद्धति के तहत चूने का उपयोग कर एक प्राचीन और पारंपरिक तकनीक से निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इसका निर्माण साढ़े तीन एकड़ में 150 करोड़ रुपये की लागत से तीन चरणों में पूरा होगा।
प्रथम चरण में संपूर्ण भवन का नवीनीकरण चल रहा है। पुराने आरटीओ में 28 कमरें का पुनर्निमाण होगा। साथ ही दो बेसमेंट भी होंगे। दूसरे और तीसरे चरण में होलकरकालीन किलेनुमा भव्य प्रवेश द्वार सहित कुल 32 कमरों में थेमेटिक जोन बनाए जाएंगे। साथ ही अहिल्या वन के साथ अहिल्या घाट भी बनाया जाएगा। इसे लगभग डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य है।
वर्तमान में निर्माणों के दौरान थोड़ी-सी भी समस्या आने पर वृक्षों को तुरंत काट दिया जाता है। इसका खामियाजा पर्यावरण की दृष्टि में भीषण गर्मी के रूप में आम जनता भुगतने को मजबूर है। पर्यावरण सरंक्षक के लिहाज से देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक निर्माण के दौरान 60 से 70 वर्ष पुराने वृक्षों को काटा नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित रखकर भवन के अंदर से बाहर निकाला जा रहा है।
देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक ट्रस्ट के ट्रस्टी सांसद शंकर लालवानी ने कहा पास ही में चंपा बावड़ी एवं अहिल्यादेवी द्वारा निर्मित शिव मंदिर का भी पुनर्निर्माण करने के लिए मप्र सरकार से मांग की है। ट्रस्ट सचिव अशोक डागा ने बताया कि पुराने आरटीओ भवन में 28 कमरे हैं, जिनका पुनर्निर्माण किया जा रहा है। साथ ही लगे दो बेसमेंट भी रहेंगे। कुल 32 कमरें रहेंगे, जिनके लिए कार्य चल रहा है। होलकरकालीन किलेनुमा भव्य प्रवेश द्वार का भी निर्माण कार्य जारी है। फिलहाल फ्लोर पर सरिये लगाकर प्लींथ भराई की जा रही है। अंदर और बाहर की दीवारों पर लाइम वर्क पद्धति से चूने का उपयोग कर प्राचीन व पारंपरिक तकनीक से प्लास्टर कर रहे हैं। ट्रस्टी मिलिंद महाजन ने कहा कि इसमें कुल 32 कमरों में अलग-अलग थीम पर अहिल्यादेवी की जीवन गाथा को जीवंत किया जाएगा।
अहिल्या वन और घाट का भी निर्माण
ट्रस्टी पुरुषोत्तम दास पसारी व ट्रस्ट सचिव अशोक डागा ने बताया कि रामपुर कोठी के प्रवेश द्वार के सामने जमीन पर अहिल्या वन के साथ अहिल्या घाट का भी निर्माण किया जा रहा है। यहां नर्मदा नदी अहिल्या माता के जीवन को अपने मुखारविंद से जीवंत करेंगी। आर्टिफिशियल नर्मदा नदी का घाट बनाया जाएगा। इसमें स्पीकर के माध्यम से मां नर्मदा अपने मुखारविंद से देवीअहिल्या की जीवन गाथा को दर्शकों के सामने जीवंत करेंगी।
मां अहिल्या पर्यावरण प्रेमी थी, इसलिए अहिल्या वन का निर्माण किया जा रहा है। इसमें कई प्रकार के औषधि पौधों के साथ अन्य प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे। पर्यावरण में उनके आस्था को देखते हुए निर्माण के प्रवेश द्वार के बीच स्थान पर 60 से 70 वर्ष पुराने पेड़ लगे हुए। इन्हें हटाया नहीं जा रहा बल्कि इसके चारों तरफ ओटला बनाकर संरक्षित कर निर्माण हो रहा है। इंजीनियर हिमांशु दुधरवड़कर ने इस प्रकार से डिजाइन किया कि दोनों वृक्ष को संरक्षित किया जा सके। पूरे परिसर में सैकड़ो वृक्ष हैं जिन्हें संरक्षित किया जाएगा। साथ ही श्रेया भार्गव के निर्देशन में कार्य हो रहा है और प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर कर्नल नवीन भटनागर है।
होलकरवंश की गौरवशाली विरासत
ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण होलकरवंश की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियां के लिए जीवंत करेगा। 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चोंधी गांव में जन्मी अहिल्याबाई होलकर ने 1759 से 1795 तक मालवा पर शासन किया। उनका कार्यकाल इतिहास में स्वर्णिम युग के रूप में जाना जाता है। अहिल्याबाई ने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। कंपेल में न्यायालय स्थापित किया।
गौरवशाली कार्यकाल में भी उन्होंने स्त्री शक्ति को पूर्णता मान्यता अहिल्या सेना के के साथ उद्योगों को बढ़ावा दिया। महेश्वरी साड़ी जैसे उद्योग स्थापित किया। इंदौर को व्यावसायिक क्षेत्र बनाया एवं यहां व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कर मुक्त व्यापार की घोषणा की। ट्रस्ट अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बताया पूरे देशभर में अहिल्याबाई ने सैकड़ो मंदिर का पुनर्निर्माण किया। धर्मशाला एवं बावड़िया बनवाई।
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