अफसरों की लापरवाही के कारण भागीरथपुरा में दूषित पानी बंटता रहा और लोग मौत के मुंह में समा गए। कम से कम छह अफसर इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। हाई…और पढ़ें
HighLights
- हाईकोर्ट की रोक के बाद भी जांच रिपोर्ट के बिंदु आए सामने
- अफसरों की लापरवाही के कारण दूषित पानी बंटता रहा और लोग मौत के मुंह में समा गए
- रिपोर्ट में कम से कम छह अफसरों को इसके लिए सीधे तौर पर बताया जिम्मेदार
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अफसरों की लापरवाही के कारण भागीरथपुरा में दूषित पानी बंटता रहा और लोग मौत के मुंह में समा गए। कम से कम छह अफसर इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर बनी जस्टिस सुशील गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया गया है।
150 पन्नों की जांच रिपोर्ट को हाई कोर्ट ने गोपनीय रखने का निर्देश दिया था लेकिन इसके बिंदु बाहर आ चुके हैं। जांच रिपोर्ट में निगम के एक पूर्व कमिश्नर को लापरवाही का दोषी माना गया लेकिन अन्य तीन कमिश्नरों को क्लीन चिट भी दी गई है। 24 मौतों को सीधे तौर पर दूषित पानी पीने से हुई मौत माना और मुआवजे की राशि दस गुना करने की सिफारिश भी जांच रिपोर्ट में की गई है।
गोपनीय जांच रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु शनिवार को धीरे-धीरे बाहर आने लगे। सूत्रों के मुताबिक जांच में जनप्रतिनिधि और नगर निगम परिषद (एमआइसी) को क्लीन चिट दे दी गई है। जांच समिति ने माना है कि अधिकारियों को जानकारी थी कि भागीरथपुरा की नर्मदा जल वितरण पाइप लाइन पुरानी हो चुकी है और लीकेज के कारण दूषित जल घरों में पहुंच रहा है। इसके बाद भी पाइप लाइन को बदलने के प्रस्ताव और फाइलों को अधिकारियों ने अटकाया।
टेंडर और लाइन बदलने के काम में देरी नहीं हुई होती तो दूषित पानी से इतनी बढ़ी त्रासदी नहीं होती। लापरवाही के लिए नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच कमेटी ने मावा कि लंबे समय से एक ही विभाग में पदस्थ श्रीवास्तव को जमीनी स्थिति की जानकारी भी काफी समय से थी। फिर भी उन्होंने लापरवाही की।
नगर निगम में पदस्थ रहे आइएएस अधिकारी अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, संदीप सोनी, सरोज प्रजापति, प्रज्ञा तिवारी को भी लापरवाही का जिम्मेदार माना है। पूर्व निगामायुक्त आशीष सिंह का नाम भी इस सूची में है। जबकि पूर्व निगम कमिश्नर शिवम वर्मा, प्रतिभा पाल और दिलीप यादव और अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा को जांच में क्लिन चिट दी गई है।
24 मौतों का कारण पानी
जांच रिपोर्ट में माना गया है कि रिकार्ड पर रखी गई कुल 36 मौतौं में से 24 मौतों के पीछे दूषित पानी का सेवन होने की पुष्टी हो रही है। अन्य 12 मौतों के पीछे कारण दूषित पानी है या अन्य स्वास्थ्य संबंधित पेचिदगियां यह निश्चित तौर पर कहना मुश्किल है। जांच कमेटी ने सिफारिश की है कि जिन लोगों की मौतें हुई हैं उनके स्वजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा मिले और प्रभावित लोगों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
अलग से सुने आपत्तिकर्ता की याचिका
इस बीच भागीरथपुरा कांड पर प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और हाई कोर्ट में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग करने के लिए भी आवेदन दाखिल किया गया है। मामले में याचिकाकर्ता प्रमोद द्विवेदी के ओर से वकील मनीष यादव ने यह आवेदन लगाया है।
भागीरथपुरा प्रकरण पर हाई कोर्ट में कुल छह याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई हो रही है। इसमें एक याचिकाकर्ता अजय बागडि़या ने सुनवाई और रिपोर्ट को गोपनीय रखने की मांग की थी। उसी पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए थे। अब द्विवेदी के वकील ने आवेदन में हाई कोर्ट से मांग की है कि शेष पांच याचिकाओं की सुनवाई अलग की जाए और बागड़िया की याचिका की सुनवाई इससे अलग की जाए। ताकि उनकी सुनवाई गोपनीय रहे लेकिन अन्य सभी याचिकाओं की सुनवाई पर किसी तरह की सेंसरशिप ना रखी जाए।
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