13 साल पहले बने एनिमल जोन के हिरण, चीतल और बारहसिंगा की संख्या 250 से पार पहुंच चुकी है। यहां तक कि इनका दायरा भी बढ़ाया गया है। इनके लिए अभयारण्य का …और पढ़ें
HighLights
- अभयारण्य के एनिमल जोन में 250 से पार पहुंची संख्या, पर्यटकों को भी करवा रहे सैर
- 13 साल पहले बने एनिमल जोन के हिरण, चीतल और बारहसिंगा की संख्या 250 से पार पहुंच चुकी है
- यहां तक कि इनका दायरा भी बढ़ाया गया है, इनके लिए अभयारण्य का खाली हिस्सा भी खोल दिया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। 234 हैक्टेयर में फैले रालामंडल अभयारण्य की आबोहवा वन्यप्राणियों को रास आने लगी है। इसका प्रमाण यह है कि इन वन्य प्राणियों के कुनबे में तेजी से वृद्धि हुई है। कुछ महीने पहले वन विभाग ने अभयारण्यों के जानवरों की गिनती की।
13 साल पहले बने एनिमल जोन के हिरण, चीतल और बारहसिंगा की संख्या 250 से पार पहुंच चुकी है। यहां तक कि इनका दायरा भी बढ़ाया गया है। इनके लिए अभयारण्य का खाली हिस्सा भी खोल दिया है। डियर सफारी का आनंद उठाने वाले पर्यटकों को भी क्षेत्र का दौरा कराया जा रहा है।
2013 में रालामंडल अभयारण्य में हिरण-चीतल के लिए एनिमल जोन बनाया था। यहां 100 से ज्यादा जानवरों को लाने की तैयारी थी। वन विहार भोपाल से पहले चरण में 48 हिरण-चीतल और बराहसिंगा लाया गया। धीरे-धीरे इन्हें अभयारण्य का वातावरण रास आने लगा। जानवरों को मौसम और सुरक्षा मिली तो हर साल इनकी प्रजातियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। समय के साथ ही रालामंडल सुविधाएं भी बढ़ी जा रही है। फरवरी 2026 में इनकी गिनती की गई। जहां अकेले एनिमल जोन में मौजूद जानवरों की संख्या 250 से ज्यादा हो चुकी है।
बढ़ाया दायरा
शुरूआत में वन विभाग ने 13 हेक्टेयर में एनिमल जोन रखा था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ गई है। अब इतने छोटी जगह पर जानवरों को रखने में दिक्कतें आ रही थी। इसके चलते रालामंडल प्रशासन ने जोन से लगा क्षेत्र की फेसिंग हटा दिया है। ताकि हिरण-चीतल 18 से ज्यादा हेक्टेयर में घूम सके। अब पर्यटकों को भी पूरे क्षेत्र 18 हेक्टेयर में सैर करवाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक हिरण-चीतल की संख्या बढ़ने के पीछे असल वजह यह है कि अभयारण्य में पानी की व्यवस्था के लिए जगह-जगह वाटर सोर्स और तालाब बनाए गए है। जहां जानवरों को आसानी से गर्मियों के दिनों में पानी उपलब्ध हो सके। यहां तक कि जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था भी अभयारण्य परिसर में की गई है।
तेंदुए करते हैं शिकार
हिरण-चीतल के साथ ही रालामंडल में तेंदुए की मौजूदगी भी है। कई बार तेंदुआ हिरण-चीतल का शिकार कर चुका है। इसे लेकर वनकर्मियों को एनिमल जोन में प्रमाण भी मिले है। मगर कुछ समय से हिरण-चीतल की बजाए तेंदुआ नील गाय का शिकार कर रहा है। रेंजर योगेश यादव का कहना है कि हिरण-चीतल का एनिमल जोन में प्रजन्न भी तेजी से बढ़ा है। इसे यह संकेत मिलता है कि अभयारण्य का वातावरण भी इनके लिए अनुकूल है।
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