तत्कालीन क्राइम ब्रांच टीआई सुजीत श्रीवास्तव पर लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया, आरक्षक विकास सेंधव, चालक अभय सिंह और दीपक पटेल भी आ…और पढ़ें
HighLights
- पुलिस आयुक्त ने श्रीवास्तव के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी है
- मामला तुलसीनगर निवासी प्रांजल हजारी से जुड़ा है
- टीआई ने केस में मदद के लिए उससे रिश्वत ली थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रिश्वत मांगने के आरोप में लोकायुक्त के शिकंजे में आए तत्कालीन क्राइम ब्रांच टीआई सुजीत श्रीवास्तव की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। आरोप है कि टीआइ ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए बिना एक शिकायत की जांच अपने स्तर पर शुरू कर दी। इतना ही नहीं, जिस आवेदन के आधार पर युवक को पूछताछ के लिए बुलाया गया, वह पुलिस के आवक-जावक रजिस्टर में दर्ज ही नहीं मिला।
मामला सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त ने श्रीवास्तव के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी है। मामला तुलसीनगर निवासी प्रांजल हजारी से जुड़ा है। आरोप है कि प्रांजल से एक मामले में मदद करने के नाम पर टीआई और उसके साथियों ने एक लाख 20 हजार रुपये की मांग की थी। इनमें से 50,800 रुपये यूपीआई के माध्यम से लिए जाने का आरोप है।
कॉलोनाइजर से आवेदन लेकर युवक को बुलाया
बताया जा रहा है कि एक विवादित कॉलोनाइजर से लिखित आवेदन लेकर श्रीवास्तव ने प्रांजल को पूछताछ के लिए बुलाया था। आवेदन में एक युवती को ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने मामले की जांच की। सोमवार को लोकायुक्त पुलिस ने सुजीत श्रीवास्तव, आरक्षक विकास सिंह सेंधव, चालक अभय सिंह और दीपक पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया।
आवेदन ही रिकॉर्ड में नहीं मिला
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग ने भी मामले की आंतरिक जांच शुरू की। इसमें सामने आया कि जिस आवेदन को आधार बनाकर श्रीवास्तव ने जांच शुरू की थी, वह पुलिस के आवक-जावक रजिस्टर में दर्ज ही नहीं था। इससे यह सवाल खड़ा हो गया कि टीआई ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताए बिना शिकायत अपने पास कैसे ली और उसके आधार पर युवक को पूछताछ के लिए कैसे बुलाया।
पहले लाइन अटैच, अब विभागीय जांच
शिकायत सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त ने श्रीवास्तव को थाने से हटाकर लाइन अटैच कर दिया था। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू होने से मामला और गंभीर हो गया है। विभागीय जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने नियमों को दरकिनार कर शिकायत क्यों ली, वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी और रिकार्ड में आवेदन दर्ज किए बिना जांच कैसे शुरू कर दी।
सुजीत श्रीवास्तव पर एक गंभीर मामले में तय समय अवधि में चालान प्रस्तुत न करने और आरोपित की मदद करने का आरोप है। आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने इस मामले में भी जांच के आदेश कर दिए हैं। गौरतलब है कि सुजीत श्रीवास्तव को खजराना थाने से सट्टा चलवाने के आरोप में भी हटाया गया था।
यह भी पढ़ें- इंदौर क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन, चोरी के वाहन काटने वाली दुकान पर छापा, पूर्व पार्षद का भाई गिरफ्तार
#इदर #करइम #बरच #क #परव #टआई #पर #घसखर #क #ममल #म #कस #अफसर #क #बतए #बगर #कर #रह #थ #जच



Post Comment