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इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर: किसान बनेंगे करोड़पति, सरकार लौटाएगी 60% विकसित भूखंड, सीएम ने किया पहले चरण का शिलान्यास

इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर: किसान बनेंगे करोड़पति, सरकार लौटाएगी 60% विकसित भूखंड, सीएम ने किया पहले चरण का शिलान्यास

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत सरकार ने किसानों को उनकी जमीन का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड लौटाने का फैसला लिया है, जिससे उन्हें सीधे विकास का भागीदार बनाया गया है। योजना के चलते कई किसान करोड़पति बने हैं। हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार किसानों को विकास में पार्टनर बना रही है।

किसानों को विकास में बनाया भागीदार

इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से 60 प्रतिशत भूमि किसानों को दे रहे हैं। उनको विकास में भागीदार बना रहे हैं। किसानों को 650 करोड़ के प्लाट मिले हैं। किसानों को समृद्ध होना ही चाहिए। अगर हम किसी किसान से उसकी जमीन लेते हैं, तो हमारा पहला फर्ज बनता है कि हम किसान के गुजर-बसर की स्थाई व्यवस्था करें। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 2360 करोड़ रुपये लागत वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन नैनोद गांव में किया।

औद्योगिक विकास और भाग्योदय का शंखनाद

उन्होंने कहा पूरे देश में किसी ने किसानों को 60 प्रतिशत का भागीदार नहीं बनाया। इसे “भाग्योदय का शंखनाद” बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवा व किसान अधिक समृद्ध होंगे। चार गुना मुआवजे के निर्णय से खुश किसानों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया और प्रतीक स्वरूप हल व मुकुट भेंट किए। आज 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित हो चुके हैं। हमने 9 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर उतारा है।

मध्यप्रदेश: उद्योगों में देश का दूसरा अग्रणी राज्य

पूरे देश में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर का राज्य है, जहां तेज गति से उद्योग स्थापित हो रहे हैं। आज से जिस विकास मॉडल की शुरुआत हुई है, वह पूरे प्रदेश में छाएगा। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह भाग्योदय का शंखनाद है। इससे इंदौर निवेश में भी आगे होगा और किसानों की समृद्धि का भागीदार होगा।

मेट्रोपॉलिटन रीजन की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन-धार-देवास-शाजापुर-रतलाम को जोड़कर बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित हो रहा है। यह कॉरिडोर पीथमपुर से आगे उज्जैन तक कनेक्टिविटी देगा और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़कर परिवहन को नई गति देगा। एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा।

कनेक्टिविटी का विस्तार और कांग्रेस पर तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़कों और कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे प्रदेश को भी फायदा मिल रहा है। अगला कदम कॉरिडोर के बाद इंदौर-उज्जैन 4 लेन सड़क का भूमि पूजन होगा, जिससे पारंपरिक मार्ग भी आधुनिक रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार किसानों को चार गुना मुआवजा दे रही है और उन्हें विकास में भागीदार बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में बिजली और सिंचाई व्यवस्था कमजोर थी, जबकि वर्तमान सरकार ने सिंचाई रकबा बढ़ाकर किसानों की स्थिति मजबूत की है।

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सिंचाई क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि और समर्पण

55 साल उनकी सरकार रही। 1956 में मध्यप्रदेश बना, लेकिन 2002-03 तक केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी। हमारी सरकार ने ढाई साल में 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा कर दिया। यह किसानों के प्रति हमारा समर्पण है। मुख्यमंत्री ने कहा कॉरिडोर से उद्योग, निवेश और रोजगार बढ़ेंगे, जिससे किसान समृद्ध होंगे। सरकार ने गेहूं खरीदी, बोनस और अन्य योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का दावा किया।

इस मौके पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, जिला अध्यक्ष श्रवणसिंह चावला आदि मौजूद थे।

परियोजना की प्रमुख बातें

  • 20.28 किमी लंबा कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर तक।
  • 1316 हेक्टेयर क्षेत्र, कुल लागत 2360 करोड़ रुपए।
  • 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क व दोनों ओर बफर जोन।
  • एनएच-47 और एनएच-52 से सीधी कनेक्टिविटी।
  • क्षेत्र में उद्योग और संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा।

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