नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-पीथमपुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित इकोनामिक कारिडोर के लिए जमीन मिलने के बाद मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) काम शुरू करने जा रहा है। 75 मीटर चौड़ी 20 किमी लंबी सड़क के दोनों तरफ 300-300 मीटर में विकसित होने वाली परियोजना क्षेत्र में वाणिज्यिक, आवासीय, पीएसपी, लाजिस्टिक एवं औद्योगिक भूखंड़ों को विकसित किया जाएगा।
नैनोद से सोनवाय गांव तक करीब 20 किमी लंबे इस कारिडोर के पहले चरण में 75 मीटर के मुख्य कारिडोर विकास के लिए टेंडर जारी हो चुके है। भूमिपूजन मुख्यमंत्री डा. माेहन यादव रविवार को दोपहर 12 बजे सेक्टर-ए ग्राम नेनौद में करेंगे। मुख्यमंत्री ने भूमि के प्रतिफल के रूप में मिलने वाली भूमि को 50% से बढ़ाकर 60% करने का निर्णय लिया है। इसके पहले चरण में करीब 326.51 करोड़ खर्च होंगे।
उद्योग विभाग का बोर्ड प्रोजेक्ट के लिए 2160 करोड़ की पहले ही मंजूरी दे चुका है। परियोजना की कुल लागत लगभग 2360 करोड़ प्रस्तावित है। इस योजना में इंदौर और पीथमपुर के 17 गांव शामिल हैं। कारिडोर के तहत करीब 1300 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई है। इसमें से नेट प्लानिंग एरिया के लिए 1179.89 हेक्टेयर जमीन लगेगी। इसमें 360 हेक्टेयर निजी जमीन की सहमति मिल चुकी है।
मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन को लगभग 170 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी हस्तांतरित हो चुकी है। बची हुई जमीन के लिए कार्रवाई जारी है। परियोजना में शामिल भूमि के विकास की सबसे बड़ी चुनौती थी आपसी सहमति से भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त करना, क्योंकि परियोजना में शामिल भूमि शहर के समीप होने से यहां की जमीन का बाजार मूल्य ज्यादा है।
एयरपोर्ट के आगे से होगा शुरू
कारिडोर एयरपोर्ट के आगे से शुरू होगा, जो बीच में धार रोड को जोड़ते हुए पीथमपुर सेक्टर 6-7 में पहुंचेगा। अधिकारियों के मुताबिक जितनी जमीन मिल चुकी है, उस पर मुख्य कारिडोर का काम शुरू कर दिया जाएगा। दिसंबर 2027 तक पूरी जमीन का अधिग्रहण हो जाएगा। साथ ही पहले चरण का विकास कार्य पूरा करना है। सभी जमीन मालिकों को विकसित प्लाट हस्तांतरित भी कर दिए जाएंगे। जून 2029 तक द्वितीय एवं तृतीय चारण का विकास कार्य पूरा करना होगा। एमपीआइडीसी अधिकारी के अनुसार टेंडर जारी कर दिए है, ताकि जहां-जहां जमीन मिल गई है वहां काम शुरू हो सकें। मीडियन में चार मीटर की जगह छोड़ी जाएगी, ताकि यहां मेट्रो भी चलाना पड़े तो मुख्य कारिडोर में परेशानी नहीं होगी।
कारिडोर का ढांचा
- मौजूदा सड़क और ग्रीन फील्ड-दोनों तरह के हिस्से शामिल हैं।
- 6.28 किमी : 75 मीटर चौड़ी मौजूदा दो-लेन सड़क।
- 7.10 किमी : 75 मीटर चौड़ी नई ग्रीनफील्ड सड़क।
- 1.45 किमी : एनएच-52 से आगे का ग्रीनफील्ड हिस्सा।
- 5.45 किमी : 60 मीटर चौड़ी मौजूदा राऊ-पीथमपुर रोड।
- सड़क के दोनों ओर 300 मीटर का बफर जोन तय किया है, जहां नियोजित विकास होगा।
योजना में शामिल गांव
कोर्डियाबर्डी, नैनोद, रिजलाय, विसनावदा, नावदापंथ, श्रीराम तलावली, सिंदोड़ा, सिंदोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही, धन्नड़ गांव की जमीन शामिल की गई हैं। टीही रेलवे स्टेशन लगा हुआ है। पीथमपुर रेलवे स्टेशन छह किमी दूर प्रस्तावित है।
कारिडोर के फायदे
- सिंहस्थ तक मैन कैरेज तैयार हो जाएगा, ताकि धार रोड से आने वाले गुजरात, महाराष्ट्र के लोगों को सीधे कनेक्टिविटी एक चौड़ी सड़क के रूप में मिल सकें।
- 75 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण से सिंहस्थ में एबी रोड से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना उज्जैन जाने में सुविधा होगी।
- पीथमपुर निवेश क्षेत्र को एयरपोर्ट से सीधी जुड़ाव मिलेगा।
- पीथमपुर जाने में अभी एक घंटे का समय लगता है, वह 20 से 25 मिनट कम हो जाएगा।
Source link
#इदरपथमपर #कल #लब #इकनमक #करडर #क #भमपजन #कल #करग #मखयमतर



Post Comment