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‘इंदौर में ऐसा कोई नेता नहीं, जिसके लिए ट्रैफिक रोका जाए’, प्रभारी डीसीपी ट्रैफिक के बयान पर हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा- बदहाल ट्रैफिक से हम भी परेशान

‘इंदौर में ऐसा कोई नेता नहीं, जिसके लिए ट्रैफिक रोका जाए’, प्रभारी डीसीपी ट्रैफिक के बयान पर हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा- बदहाल ट्रैफिक से हम भी परेशान

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जीरो ट्रैफिक प्रोटोकॉल नाम की कोई चीज होती ही नहीं है। शहर में कोई भी नेता ऐसा नहीं जिसके लिए ट्रैफिक रोका जाए। यातायात विभाग वीआईपी मूवमेंट के वक्त कुछ समय के लिए ट्रैफिक जरूर रोकता है, लेकिन इसे तुरंत बहाल कर दिया जाता है। प्रभारी डीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार त्रिपाठी ने यह बात शहर के बदहाल यातायात को लेकर हाई कोर्ट में चल रही याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कही।

यातायात से हम खुद परेशान हैं

इस पर कोर्ट ने कहा कि बदहाल यातायात से हम खुद परेशान हैं। यू-टर्न लेते समय डर लगता है कि कहीं दोपहिया वाहन न टकरा जाए। प्रमुख सचिव (गृह) को शहर में यातायात पुलिसकर्मियों के रिक्त 237 पदों पर नियुक्ति के बारे में विचार करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि आदेशों का पालन ही नहीं हो रहा है। वर्ष 2019 में कोर्ट ने आदेश दिया था कि शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती अनिवार्य रूप से की जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोर्ट ने सभी प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल 24 घंटे चालू रखने के लिए कहा था, लेकिन हालत यह है कि ज्यादातर सिग्नल बंद हैं। पुलिसकर्मी ट्रैफिक संभालने के बजाय साइड में बैठकर चालानी कार्रवाई में व्यस्त रहते हैं।

सुनवाई के दौरान बीआरटीएस हटाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि दो बस स्टॉप छोड़कर शेष हटा दिए हैं। कोर्ट के आदेश पर सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई पर भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए और कहा कि वे बताएं कि बदहाल यातायात को सुधारने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।

याचिकाओं में अगली सुनवाई सात मई को होगी। शहर के बदहाल ट्रैफिक को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। सोमवार को कोर्ट के आदेश पर कलेक्टर और निगमायुक्त उपस्थित हुए। बीआरटीएस हटाने को लेकर हुई सुनवाई में निगम की ओर से बताया गया कि भोलाराम उस्ताद मार्ग के पास (होलकर कॉलेज) स्थित दो बस स्टॉप को छोड़कर शेष हटा दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ यह चाहते हैं कि सड़क पर यातायात सुगम बना रहे। निगमायुक्त और कलेक्टर सुनिश्चित करें कि सड़क के हर हिस्से का उपयोग हो सके।

सर्विस रोड की बदहाली पर भी हुई चर्चा

निर्माणाधीन ब्रिजों के आसपास की बदहाल सर्विस लेन को लेकर निगम ने कहा कि सर्विस लेन को बनाने का काम एमपीआरडीसी का है। कोर्ट द्वारा गठित समिति सदस्य नीतिन भाटी ने बताया कि बस स्टॉप तो हटा दिए हैं, लेकिन इन बस स्टॉप की ऊंचाई सड़क से अधिक थी। ऐसे में परेशानी आ रही है। कोर्ट ने निगम से कहा कि वह लेवलिंग का भी ध्यान रखे।

वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आमजन होता है परेशान

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आम नागरिक परेशान होते रहते हैं। वीआईपी मूवमेंट के दौरान देर तक ट्रैफिक रोक दिया जाता है। लोगों को असुविधा होती है। इस दौरान सिग्नल भी बंद कर दिए जाते हैं। वीआईपी मूवमेंट खत्म होने के बाद पुलिसकर्मी चले जाते हैं और जनता जाम में फंस जाती है। इस पर कोर्ट ने प्रभारी डीसीपी ट्रैफिक से पूछा कि जीरो ट्रैफिक की पात्रता किन-किन को है। अधिकारी ने बताया कि ऐसी कोई सूची है ही नहीं क्योंकि जीरो ट्रैफिक प्रोटोकॉल सिर्फ जेड सुरक्षा प्राप्त नेताओं के लिए होता है।

सड़क पर बने धार्मिक स्थल चिह्नित कर लिए हैं, जल्द ही करेंगे कार्रवाई

कलेक्टर शिवम वर्मा ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद सड़क और फुटपाथ पर बने धार्मिक स्थलों की सूची तैयार कर ली है। जल्द ही इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप यह सूची याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध करा दें और अगली सुनवाई पर कोर्ट में सूची प्रस्तुत कर बताएं कि क्या और कब कार्रवाई करेंगे।

पुलिसकर्मियों की कमी का मुद्दा भी उठा

यह बात भी सुनवाई के दौरान सामने आई कि इंदौर में यातायात पुलिसकर्मियों के 237 पद खाली पड़े हैं। प्रभारी डीसीपी ट्रैफिक ने कोर्ट को बताया कि उपलब्ध पुलिसकर्मियों को चौराहों पर यातायात व्यवस्था में तैनात किया जाता है, लेकिन बल की कमी की वजह से कुछ दिक्कतें आती हैं। इस पर कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी से कहा कि वे इस संबंध में प्रमुख सचिव (गृह) को सूचित करें ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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