जब तक सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह के शिक्षा माफिया पर लगाम लगाना मुश्किल है कि स्कूल और स्टेशनरी संचालक हर साल लाखों रुपये का मुनाफा …और पढ़ें
HighLights
- बीएनएस 2023 की धारा 223ए में दो स्कूल, दो स्टेशनरी पर केस
- 40 प्रतिशत कमीशन के लालच में एक ही दुकान से खरीदने का दबाव
- जुर्माने तक सीमित सजा, इसलिए प्रशासन ने नहीं डरते शिक्षा माफिया
विनय यादव, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर सहित प्रदेशभर में स्कूल संचालकों और स्टेशनरी व्यापारियों द्वारा मनमाने दामों पर किताबें बेचने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई कर रहा है, लेकिन लाखों रुपये कमाने वाले आरोपितों पर मात्र 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाने तक की कार्रवाई ही होती है। इंदौर में अभी दो स्कूल और दो स्टेशनरी संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 223 (ए) का उपयोग किया जा रहा है। यह धारा उन मामलों में लागू होती है, जहां कोई व्यक्ति प्रशासनिक आदेशों या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस धारा के तहत सजा आमतौर पर जुर्माने तक सीमित रहती है या कई मामलों में एक माह तक की जेल होती है। लेकिन इस तरह के मामले में जुर्माने में ही आरोपित छुट जाते हैं।
अभिभावकों को होता है आर्थिक नुकसान
प्रशासन द्वारा दिखावे की जांच और छापेमारी की जाती है। शिकायतों में यहीं पाया जाता है कि स्कूल प्रबंधन खास दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं। इन दुकानों पर किताबें बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा कीमत पर बेची जाती हैं। इससे अभिभावकों को आर्थिक नुकसान होता है।
अभिभावकों का कहना है कि जब तक सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह के शिक्षा माफिया पर लगाम लगाना मुश्किल है कि स्कूल और स्टेशनरी संचालक हर साल लाखों रुपये का मुनाफा कमाते हैं, ऐसे में उनके लिए 2500 रुपये का जुर्माना कोई मायने नहीं रखता है। बच्चों की पढ़ाई जरूरी है, इसलिए मजबूरी में महंगी किताबें खरीदते हैं।
40 प्रतिशत कमीशन मिलता है स्कूलों को
जानकारी अनुसार कॉपी-किताबों पर स्कूलों को 40 प्रतिशत कमिशन मिलता है। इसलिए वह अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं कि वह उनके द्वारा तय की गई एक ही दुकान से कापी-किताबों की खरीदारी करें। वहीं जो पाठ्यक्रम स्कूलों द्वारा तय किया जाता है, वह अन्य स्टेशनरी पर मिलता भी नहीं है। यानी पांच हजार रूपये की खरीदी अभिभावक स्टेशनरी से करते हैं तो दो हजार रुपये कमिशन स्कूल को मिलता है।
शिक्षा माफिया पर नहीं पड़ता इसका असर
भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन पर जो दंड वर्णित है वह अत्यंत ही न्यून है, जिसका कोई प्रभाव शिक्षा माफिया पर नहीं पड़ता। साथ ही प्रशासन की मंशा यदि सचमुच इन्हें रोकने की है तो उन्हें यह प्रतिबंधात्मक आदेश जनवरी से ही निकालना चाहिए और प्रचार करना चाहिए। – डॉ. पंकज वाधवानी, एडवोकेट एवं विधि विशेषज्ञ
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