नए आयकर एक्ट में इलैक्ट्रॉनिक डाटा, कम्प्यूटर सिस्टम के साथ ऐसे तमाम वर्चुअल वर्ल्ड के लेन-देन व जानकारी को डिजिटल असेट के रूप में परिभाषित कर दिया गय …और पढ़ें
HighLights
- आयकर को मिला साक्ष्य के रूप में डाटा हासिल करने और विश्लेषण का अधिकार
- भौतिक संपत्ति के साथ करदाता की डिजिटल उपस्थिति और डाटा भी जांच के दायरे में रहेगा
- करदाताओं को नए कानून के हिसाब से रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की सलाह दी जा रही है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। क्रिप्टोकरेंसी, यूएसडीटी और टेलीग्राम से लेकर वर्चुवल दुनिया के डिजिटल वालेट भी अब आयकर की कार्रवाई के दायरे में आएंगे। नए आयकर एक्ट में इलैक्ट्रॉनिक डाटा, कम्प्यूटर सिस्टम के साथ ऐसे तमाम वर्चुअल वर्ल्ड के लेन-देन व जानकारी को डिजिटल असेट के रूप में परिभाषित कर दिया गया है। यानी अब भौतिक संपत्ति के साथ करदाता की डिजिटल उपस्थिति और डाटा भी जांच के दायरे में रहेगा। नए वित्त वर्ष के शुरु होने के साथ ही बदलाव लागू हो गए हैं और अब करदाताओं को नए कानून के हिसाब से रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की सलाह दी जा रही है।
नए आयकर कानून (एक्ट 2025) की धारा 247 और 261 में इलैक्ट्रानिक डाटा, सिस्टम को एसेट्स की परिभाषा में शामिल किया गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट भरत नीमा के अनुसार पहले आयकर एक्ट में जब भी सर्च की कार्रवाई होती तो नकद, आभूषण, भौतिक दस्तावेज व वस्तुएं जब्त की जाती थी। अब डिजिटल वालेट, क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल असेट्स, डिजिटल स्पेस, इलैक्ट्रानिक रूप में मौजूद डाटा जिसमें चैट, वर्चुअल फुटप्रिंट के साक्ष्य भी जब्त होंगे और साक्ष्य के रूप में जांच के दायरे में आएंगे। इससे पहले तक ऐसे डिजिटल डाटा पर हमेशा विवाद रहा था।
डिजिटल साक्ष्यों को आयकर एक्ट में ना तो परिभाषित किया गया था ना ही पर्याप्त कानूनी मान्यता दी गई थी। इलेक्ट्रानिक फार्म में पीडीएफ फाइल, एक्सेल शीट, ईमेल, चैट रिकार्ड आदि शामिल हैं और इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड में ईमेल संचार, व्हॉट्सएप चैट, सोशल मीडिया संदेश और क्लाउड स्टोरेज में संग्रहीत डेटा को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। जिससे डिजिटल साक्ष्य को एक सुदृढ़ कानूनी आधार प्राप्त हो गया है। यह माना जायेगा की यह आपका ही डाटा है और आपको इसे साबित करना है की मेरा डाटा नहीं है या संपत्ति व आय से संबद्ध नहीं है। कुल मिलाकर करदाता का डाटा अब व्यक्तिगत नहीं रह गया है।
डाटा के विश्लेषण का अधिकार
नए आयकर कानून से जांच करने वाले आयकर अधिकारियों को ऐसा डाटा जब्त करने के साथ उसका क्लोन करने अपने पास रिकार्ड लेने और विश्लेषण कर रिकार्ड में शामिल करने का अधिकार मिल गया है। इसमें काल रिकॉर्ड, एसएमएस, व्हाट्सएप चैट, फोटो और वीडियो सभी शामिल होते है। अब आयकर अधिकारी फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे माध्यमों पर उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण कर सकते हैं और उसे साक्ष्य के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
इसी प्रकार व्हाट्सएप चैट्स में उल्लेखित लेन-देन या टेलीग्राम ग्रुप्स में की गई वितीय गतिविधियां भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त हो सकती हैं।सीए स्वप्निल जैन के अनुसार मोबाइल के जरिए चलने वाले ट्रेडिंग और अन्य तरह के एप्लीकेशन भी आय साबित करने का आधार बनेंगे। आने वाले दिनों में विभिन्न कानूनों की मदद से ऐसी तमाम डिजिटल कंपनियों के डाटा की सीधी एक्सेस भी आयकर विभाग हासिल कर लें इसकी भी पूरी संभावना है।
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