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इंदौर में क्राइम ब्रांच बनकर 7 लाख रूपये लूटने वाले गिरोह वकील भी शामिल

इंदौर में क्राइम ब्रांच बनकर 7 लाख रूपये लूटने वाले गिरोह वकील भी शामिल

अपना स्वीट्स के समीप रुपये गिनने के दौरान अचानक दो युवक वहां पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने लगे।

Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 10:01:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 10:03:44 PM (IST)

चार गिरफ्तार।

HighLights

  1. 7 लाख लूटने वाले गिरोह वकील भी शामिल।
  2. गिरोह में वकील भी शामिल, चार गिरफ्तार।
  3. नकदी और फरार आरोपी की तलाश जारी।

नईदुनिया प्रतिनिधि,इंदौर। सस्ती दर पर यूएसडीटी दिलाने का झांसा देकर सात लाख रुपये की लूट करने वाले गिरोह का पलासिया पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक वकील भी शामिल है। हालांकि लूटी गई रकम अभी बरामद नहीं हो सकी है और गिरोह का एक सदस्य फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक फरियादी अभय तिवारी, निवासी एमआईजी क्षेत्र, ने अपने परिचित हर्ष, निवासी जबलपुर, को कम कीमत पर यूएसडीटी (टेथर डिजिटल करेंसी) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। तय सौदे के अनुसार हर्ष सात लाख रुपये लेकर इंदौर पहुंचा। अभय अपने दोस्त साफिन के साथ पलासिया क्षेत्र में कथित विक्रेताओं से मिलने पहुंचा।

अपना स्वीट्स के समीप रुपये गिनने के दौरान अचानक दो युवक वहां पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने लगे। उन्होंने डिजिटल करेंसी के अवैध लेनदेन का आरोप लगाकर दोनों को धमकाया और पलासिया थाने ले जाने की बात कही। कार्रवाई के डर से घबराए अभय और साफिन ने सात लाख रुपये आरोपियों को सौंप दिए, जिसके बाद बदमाश मौके से फरार हो गए।

घटना की जानकारी मिलने पर हर्ष ने पलासिया थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ लूट का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सबसे पहले सिद्धार्थ को गिरफ्तार किया गया। उससे हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को भी दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में एक वकील भी शामिल है, जिसने पूरी साजिश में अहम भूमिका निभाई।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-3 ओमप्रकाश ने बताया कि मामले में एक आरोपी अभी फरार है। उसकी तलाश के साथ-साथ लूटी गई सात लाख रुपये की नकदी बरामद करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने इसी तरह की वारदातें पहले भी की हैं या नहीं।

पुलिस का मानना है कि आरोपी पहले डिजिटल करेंसी के नाम पर लोगों को बुलाते थे और फिर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराने-धमकाने के बाद नकदी लूट लेते थे। मामले की विस्तृत जांच जारी है। सभी आरोपित अवैध रुप से यूएसडीटी खरीदने और बेचने का काम भी करते है।

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