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इंदौर में खानपान में घुल रही मिलावट, मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़

इंदौर में खानपान में घुल रही मिलावट, मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर अपनी स्वादिष्ट नमकीन, मिठाइयों और खानपान की संस्कृति के लिए पूरे देश में पहचान रखता है, लेकिन अब इसी स्वाद के शहर में मिलावट घुलने लगी है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली हल्दी, मिर्च, घी, आइसक्रीम, सौंफ और दूध से बनी सामग्री में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

मुनाफे के लालच में आकर मिलावटखोर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। खाद्य विभाग द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाइयों में यह मिलावट सामने आ रही है। मिलावट करने वाले 23 प्रतिष्ठानों पर मार्च माह में ही 51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। लोगों को बाजार से खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

मिलावटखोर मुनाफा कमाने के लालच में आइसक्रीम में सेकरिन, चाइनीज फूड में अजीनोमोटो, घी में मिल वनस्पति तेल और एसेंस आदि मिलाकर तैयार कर रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इससे पेट की बीमारियां, एलर्जी, लीवर संबंधी परेशानी और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक होता है।

हाल ही में आइसक्रीम निर्माता पर की कार्रवाई

हाल ही में शहर में आइसक्रीम निर्माण में सेकरिन जैसी हानिकारक चीजों के उपयोग का मामला सामने आया था। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक मात्रा में इसका सेवन बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। मामले में कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य बंद करवाया। वहीं हल्दी में मिलावट के कारण शादी समारोह में दूल्हा-दुल्हन बीमार हुए थे। मिलावटी के कारण गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो गया था। कुछ माह पहले लाल मिर्च में भी मिलावट पकड़ी गई थी।

इंदौर से देशभर में सप्लाई होती है खाद्य सामग्री

शहर में हजारों छोटी-बड़ी खाद्य निर्माण इकाइयां संचालित हो रही हैं। यहां तैयार होने वाली खाद्य सामग्री केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि देशभर में सप्लाई की जाती है। ऐसे में मिलावटी सामग्री का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा मिलावट दूध से बने उत्पाद और मसालों में पाई जाती है।

ऐसे करते हैं मिलावट

विशेषज्ञों के मुताबिक लाल मिर्च को चमकदार दिखाने के लिए आइल साल्यूएबल रंग मिलाए जा रहे हैं, जबकि हल्दी में कृत्रिम रंग और सस्ते पाउडर मिलाकर वजन बढ़ाया जा रहा है। सौंफ को आकर्षक बनाने के लिए रंगों का उपयोग हो रहा है। वहीं कुछ जगहों पर घी और दूध उत्पादों में घटिया तेल और रसायनों की मिलावट की जा रही है।

मिलावटखोरों पर लगाया था 51 लाख का जुर्माना

मार्च माह में की कार्रवाई में 23 प्रतिष्ठानों पर 51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मेसर्स बालाजी ट्रेडिंग कंपनी पर चार लाख रुपये, मेसर्स मशाल होटल और मेसर्स पूजा मिल्क एंड प्रोडक्ट देवास नाका पर डेढ़ लाख रुपये, जगदीश राठौर पर दो लाख रुपये, मेसर्स मदरसोल प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ब्लाडो स्काई इंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड पर 7.50 हजार रुपये, मेसर्स श्री कुबेर इंटरप्राइजेस और मेसर्स बालगोपाल डेयरी प्रोडक्ट्स पर चार लाख रुपये, मेसर्स वायसीएस बरोदा प्राइवेट लिमिटेड पर दो लाख रुपये, मेसर्स सफायर स्टार पर एक लाख रुपये, मेसर्स अपकिन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये, मेसर्स निशा इंटरप्राइजेज पर दो लाख रुपये, पूजा डेरी सांवेर रोड पर दो लाख रुपये, ब्लूबिन न्यूट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड पर चार लाख रुपये, श्री देवनारायण कैटरर्स पर एक लाख रुपये आदि पर जुर्माना लगाया गया था।

यह भी पढ़ें : मसालों से लेकर स्ट्रीट फूड तक मिलावट का जाल, शरीर को धीरे-धीरे पहुंचा रहा नुकसान

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