प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को निशुल्क उपचार नहीं देने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की …और पढ़ें
HighLights
- इंदौर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के इलाज में कोताही पर एक्शन
- हादसे के बाद 7 दिन तक ₹1.5 लाख का मुफ्त कैशलेस इलाज
- निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को दिए गए कड़े विधिक निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को निशुल्क उपचार नहीं देने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ नहीं देने वाले अस्पतालों का पंजीयन निरस्त किया जा सकता है।
यह योजना 20 फरवरी 2026 से इंदौर जिले में लागू की जा चुकी है। इसके तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के दौरान दुर्घटना की तारीख से सात दिनों के भीतर डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
आयुष्मान से जुड़े सभी अस्पतालों में मिलेगी कैशलेस सुविधा
प्रशासन के अनुसार आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पताल पीएम राहत योजना के तहत नामित अस्पताल माने जाएंगे। साथ ही अन्य निजी अस्पतालों को भी इस योजना से जोड़ा जा रहा है। गैर-नामित अस्पतालों को भी दुर्घटना पीड़ितों का प्राथमिक उपचार और स्टेबलाइजेशन करना अनिवार्य होगा।
जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की निगरानी में सामने आया है कि कई अस्पताल सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को योजना का लाभ नहीं दे रहे हैं। कुछ अस्पताल यह कहकर मरीजों का उपचार या पंजीयन नहीं कर रहे कि वहां योजना लागू नहीं है या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। प्रशासन ने कहा कि इस संबंध में अस्पतालों को कई बैठकों के माध्यम से पहले ही प्रक्रिया समझाई जा चुकी है।
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यूनिक और शैल्बी हॉस्पिटल को कारण बताओ नोटिस
कारण बताओ नोटिस जारी निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी अस्पताल या नर्सिंग होम, चाहे वह आयुष्मान योजना से जुड़ा हो या नहीं, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति का प्राथमिक उपचार करेगा। साथ ही जीवन रक्षक उपचार के बाद ही अन्य अस्पताल में रेफर करेगा।
यदि किसी अस्पताल ने योजना का लाभ दिए बिना मरीज का उपचार या पंजीयन नहीं किया, तो उसके खिलाफ बिना किसी अतिरिक्त सूचना के पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में यूनिक हॉस्पिटल और शैल्बी हॉस्पिटल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, एमवाय को चिकित्सकों का योजना के संबंध में उन्मुखीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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