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इंदौर में बदहाल सड़कें, अफसर हुए बेहपरवाह; आए दिन अपनी जान गंवा रहे शहर के लोग

इंदौर में बदहाल सड़कें, अफसर हुए बेहपरवाह; आए दिन अपनी जान गंवा रहे शहर के लोग

Potholes in Indore: इंदौर में विकास के नाम पर नई सड़कें और फ्लाईओवर बन रहे हैं, लेकिन शहर के अंदर रिंग रोड और बायपास छोड़कर बाकी सड़कें खस्ताहाल हैं।

Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 08:48:10 AM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 08:54:24 AM (IST)

गड्ढे… चंदन नगर थाने के ठीक सामने वाली इस रोड पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आते है। – नईदुनिया

HighLights

  1. गड्ढे भराव पर हर साल अकेला नगर निगम खर्च करता है 50 करोड़
  2. अन्य एजेंसियों का खर्च अलग, फिर भी वाहन चालक हो रहे परेशान
  3. शहर की सड़कों में गड्ढे खत्म होने के बजाय अब ज्यादा बढ़ गए हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में विकास के नाम पर नई सड़कें, फ्लाईओवर का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इंदौर शहर के अंदर रिंग रोड व बायपास के अलावा इंदौर से आसपास के शहरों को जोड़ने वाली सड़कें खस्ताहाल हैं। इन सड़कों के रखरखाव के नाम पर नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी एजेंसियां करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती हैं।

सच्चाई यह है कि इन सड़कों पर आए दिन उभरने वाले गड्ढे वाहन चालकों की सिर्फ मुश्किल ही नहीं बढ़ा रहे, उनकी जान भी ले रहे हैं। ‘गड्ढों में शहर’ समाचारीय अभियान के तहत नईदुनिया शहर की बदहाल सड़कों की पड़ताल कर सरकारी विभागों की लापरवाही को उजागर करेगा। इसके साथ ही संबंधित जिम्मेदारों से पूछा जाएगा कि क्या शहर में बदहाल सड़कों पर मासूम शहरवासी अपनी जान गंवाते रहे और अफसर आंख मूंदे सोते रहेंगे।

जहां निर्माण कार्य, वहां सड़कों की ज्यादा हालत खराब

शहर में जहां-जहां भी फ्लाईओवर का निर्माण हो रहा है, वहां सड़कों की हालत काफी बदहाल है। नियम यह है कि फ्लाईओवर निर्माण से पहले निर्माण एजेंसियां मजबूत सर्विस रोड तैयार करें। हकीकत यह है कि मूसाखेड़ी, सत्यसाई चौराहा, देवास नाका ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां सर्विस रोड बदहाल है और निर्माण एजेंसियां उन्हें बेहतर बनाने पर ध्यान नहीं दे रही हैं। नतीजा, खस्ताहाल सड़कों से गुजरने वाला हर व्यक्ति परेशान होता है। कई तो वाहन फिसलने के कारण चोटग्रस्त भी हो जाते हैं।

अधिकारियों की दर्जनों बैठकें, लेकिन नतीजा सिफर

शहर की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा निर्माण एजेंसियों के साथ दर्जनों बैठकें की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक नतीजा कुछ नहीं निकला है। 11 माह पहले प्रमुख सचिव की बैठक में खस्ताहाल सड़कों का मुद्दा उठा था। उस समय जनप्रतिनिधियों ने निर्माण एजेंसियों की लापरवाही पर सवाल खड़े किए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे विगत दिनों जब इंदौर आए थे तो उन्होंने रिंग रोड, बायपास की बदहाल सड़कों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने निगम व अन्य निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समयावधि में गड्ढे भरने के लिए कहा था, लेकिन इसके बाद भी इंदौर शहर की सड़कों में गड्ढे खत्म होने के बजाय अब ज्यादा बढ़ गए हैं।

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संबंधित विभागों को दिए हैं निर्देश

शहर की कुछ सड़कों पर नगर निगम सहित अन्य एजेंसियों ने सड़कों पर पैचवर्क किए हैं। मैंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे सड़कों को दुरुस्त कर गड्ढों का चिन्हांकन कर उनका भराव करें। – शिवम वर्मा, कलेक्टर

सड़क निर्माण के तय मानकों का नहीं हो रहा पालन

इंडियन रोड कांग्रेस ने कांक्रीट व डामर की सड़कों के निर्माण के लिए मानक तय किए हैं। यदि सड़क का निर्माण इसके तहत हो तो सड़कें जल्द खराब नहीं होती हैं। वर्तमान में जिन भी सड़कों का निर्माण हो रहा है, उनमें मापदंडों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। कांक्रीट की सड़क 70 से 80 साल चलने के लायक बनी होना चाहिए। स्थिति यह है कि कॉलोनियों में बन रही सीमेंट की सड़कों में छह से सात साल में क्रैक आने लग जाते हैं। फिर उसके ऊपर डामर की परत बिछाई जाती है। जैसे ही वर्षा होती है, वह डामर उखड़ जाता है। ऐसे में वाहनों का सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह है कि डामर की सड़कों पर जितना डामर होना चाहिए, वह नहीं होता। सड़क निर्माण के दौरान भी मोटाई कम होती है। कई बार डामर के ऊपर डामर की परत दर परत बिछाई जाती है, लेकिन पूरी सड़क को उखाड़कर नहीं बनाया जाता। वहीं, कांक्रीट की सड़क में सीमेंट व डामर की सड़क पर डामर की मात्रा कम हो तो सड़कों का जर्जर होना तय रहता है। – अजीत सिंह नारंग, पूर्व मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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