रामसर साइड की सूची में शामिल शहर का यशवंत सागर फिर सारस के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने लगा है। यहां आने वाले और अपना जीवनचक्र बढ़ाने वाले सारस की घ…और पढ़ें
HighLights
- सारस की संख्या में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता
- एनडब्लूकास द्वारा किया गया सर्वेक्षण, यशवंत सागर क्षेत्र में 28 से बढ़कर 36 हुई सारस की संख्या
- माचल तालाब, बुरानाखेड़ी तालाब तथा बड़ौदा दौलत तालाब में भी दिखे ये खूबसूरत पक्षी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: रामसर साइड की सूची में शामिल शहर का यशवंत सागर फिर सारस के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने लगा है। यहां आने वाले और अपना जीवनचक्र बढ़ाने वाले सारस की घटती संख्या के बीच आशा की किरण नजर आ रही है।
इस वर्ष हुए सर्वे में यह बात सामने आई है कि यहां से दूर होते सारस को दोबारा यशवंत सागर मुनासिब परिवेश दे रहा है। वर्ष 2023 से घटना शुरू हुई सारस की संख्या में इस बार वृद्धि नजर आई है। 50 से 32 और 32 से 28 पर पहुंची सारस की संख्या इस बार फिर 36 हो चुके हैं। हालांकि यह संख्या अब भी कम है, पर इससे उम्मीद जताई जा रही है कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण किया गया तो सारस की संख्या पहले की तरह बढ़ सकती है।
पर्यावरण के हित में कार्य करने वाली संस्था नेचर एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एंड अवेयरनेस सोसाइटी (एनडब्लूकास) द्वारा प्रतिवर्ष सारस क्रेन सर्वेक्षण किया जाता है। इस वर्ष यह सर्वे अप्रैल से जुलाई माह के पहले सप्ताह तक किया गया। इसमें 36 सारस नजर आए। यह सर्वेक्षण छह सदस्यीय दल ने किया, जिसमें रवि शर्मा, मनीष जैन, आलोक दुबे, विजय कोचेटा, अमरेश मिश्रा और अंचल गोयल शामिल थे। इस सर्वेक्षण में न केवल सारस की संख्या को देखा गया, बल्कि संख्या घटने और बढ़ने के कारणों का भी अध्ययन किया गया।
संख्या में वृद्धि के कारण
संस्था अध्यक्ष रवि शर्मा के अनुसार सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि यशवंत सागर के समीप का एक भाग ऐसा भी है जहां बीते करीब एक वर्ष से खेती नहीं की गई। खेती नहीं होने से इस स्थान पर न केवल मानव की आवाजाही नहीं हुई, बल्कि खेती में उपयोग किए जाने वाले हानिकारक रसायन भी उपयोग में नहीं आए। इससे सारस के जीवनचक्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। यहां न केवल अधिक संख्या में सारस आए, बल्कि उन्होंने अपना जीवनचक्र भी बढ़ाया। सारस की संख्या घटने के प्रमुख कारणों में कीटनाशक व अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग, सारस का शिकार और मानव का सतत आवागमन शामिल हैं।
अन्य स्थानों पर भी सारस
यह सर्वेक्षण केवल यशवंत सागर में ही नहीं हुआ, बल्कि शहर के आसपास के अन्य स्थानों पर भी किया गया। माचल तालाब, बुरानाखेड़ी तालाब तथा बड़ौदा दौलत तालाब में भी सर्वेक्षण किया गया। इन स्थानों पर जहां सामान्य तौर पर एक या दो ही सारस नजर आते थे लेकिन इस बार कुल चार सारस दिखे। बुरानाखेड़ी और बड़ौदा दौलत क्षेत्र में सारस के एक जोड़े को घोंसला बनाते भी देखा गया।
सारस की संख्या में कमी के कारण
- यशवंत सागर की पाल के आसपास नई टाउनशिप और कालोनियों का विकास और इनके समानांतर गुजरने वाली नालियों का रिसाव।
- तालाब के आसपास छोटे-छोटे अस्थायी निर्माण का बढ़ना।
- मछली पालन गतिविधियों में लगातार वृद्धि होना।
- मुख्य तालाब में बड़े पैमाने पर जाल द्वारा मछली पकड़ने की गतिविधियों का बढ़ना।
- इन छोटे तालाबों के ऊपर नायलोन के जाल लगाए जाने से कई पक्षी इनमें फंसकर मर जाते हैं।
- गर्मी में जल स्तर कम होने पर डंपरों से बड़े पैमाने पर मिट्टी का उत्खनन होना।
- गर्मी में तालाब के सूखे भाग और शेष समय आसपास होने वाली खेती में कीटनाशकों व रासायनिक दवाओं का उपयोग।
- लोटसवैली में अत्यधिक पर्यटन गतिविधियां होने से पक्षियों का पलायन करना।
- पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तालाब में कैफे सहित दो प्लेटफार्म तैयार किए गए हैं, जिससे भी पक्षियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- इंजन चलित नावों का संचालन।
- क्षेत्र में पक्षियों का शिकार।
ध्यान देने योग्य बातें:
- संबंधित विभागों व विशेषज्ञों को मिलकर यशवंत सागर और उसके आसपास सारस तथा अन्य पक्षियों के स्वास्थ्य व संख्या के संरक्षण हेतु व्यापक रणनीति तैयार करनी चाहिए।
- सारस के प्रजनन व घोंसला बनाने की अवधि में इन क्षेत्रों की घेराबंदी कर अंडों और बच्चों को कुत्तों, मवेशियों तथा मानव हस्तक्षेप से सुरक्षित किया जाए।
- यशवंत सागर पर सारस क्रेन अनुसंधान एवं अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाए।
- आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी, सारस संरक्षण तथा अन्य पक्षी प्रजातियों पर कार्य किया जाए।
- वन विभाग व नगर निगम को अनुसूची-1 वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण हेतु संयुक्त योजना बनाकर लागू करना चाहिए।
- यशवंत सागर क्षेत्र में बढ़ते मानव हस्तक्षेप को नियंत्रित किया जाए।
- इको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए।

Source link
#कम #हआ #मनव #हसतकषप #त #इदर #क #यशवत #सगर #म #बढन #लग #सरस #क #कनब



Post Comment