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कोलकाता के अंगकृष रघुवंशी IPL 2026 से बाहर:वरुण से टक्कर के बाद चोटिल हुए थे, कन्कशन और उंगली में फ्रैक्चर हुआ था

कोलकाता के अंगकृष रघुवंशी IPL 2026 से बाहर:वरुण से टक्कर के बाद चोटिल हुए थे, कन्कशन और उंगली में फ्रैक्चर हुआ था

स्पोर्ट्स डेस्क7 घंटे पहले

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अंगकृष रघुवंशी कैच लेने की कोशिश में बॉलर वरुण चक्रवर्ती से टकरा गए थे।

कोलकाता नाइट राइडर्स के विकेटकीपर-बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी IPL 2026 के बाकी मैचों से बाहर हो गए हैं। फ्रेंचाइजी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। रघुवंशी को मुंबई इंडियंस के खिलाफ 20 मई को खेले गए मैच के दौरान कन्कशन और बाएं हाथ की उंगली में फ्रैक्चर हुआ था।

यह चोट ऐसे समय में आई है, जब कोलकाता को प्लेऑफ की उम्मीद बनाए रखने के लिए दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ अपना आखिरी मैच हर हाल में जीतना जरूरी है। टीम को इसके साथ दूसरे मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा। कोलकाता और दिल्ली के बीच मुकाबला रविवार को ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा।

प्रैक्टिस के समय रघुवंशी ने हाथ में प्लास्टर लगाया हुआ था।

प्रैक्टिस के समय रघुवंशी ने हाथ में प्लास्टर लगाया हुआ था।

मुंबई के खिलाफ चोट लगी

रघुवंशी मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में विकेटकीपिंग कर रहे थे। मुंबई की पारी के 11वें ओवर में तिलक वर्मा का कैच पकड़ने की कोशिश के दौरान उनकी टक्कर वरुण चक्रवर्ती से हो गई। दोनों खिलाड़ी गिर पड़े और चक्रवर्ती कैच नहीं पकड़ सके।

इसके बाद 14वें ओवर में तिलक वर्मा आउट हुए। उसी के तुरंत बाद रघुवंशी मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह तेजस्वी दहिया सब्स्टीट्यूट विकेटकीपर के तौर पर मैदान पर आए।

रघुवंशी मुंबई इंडियंस के खिलाफ कैच लेने की कोशिश में चोटिल हो गए थे।

रघुवंशी मुंबई इंडियंस के खिलाफ कैच लेने की कोशिश में चोटिल हो गए थे।

कन्कशन के चलते मैच से बाहर हुए

रघुवंशी को कन्कशन के चलते मैच से बाहर कर दिया गया। तेजस्वी दहिया ने ही प्लेइंग-XII में उनकी जगह ली। इसके बाद कोलकाता ने मुकाबला चार विकेट से जीत लिया।

21 साल के अंगकृष रघुवंशी IPL 2026 में कोलकाता के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने अब तक 422 रन बनाए हैं। उनका औसत 42.2 और स्ट्राइक रेट 146.52 रहा। इस सीजन में उन्होंने पांच अर्धशतक भी लगाए हैं।

क्या होता है कन्कशन

क्रिकेट में कन्कशन का मतलब सिर या गर्दन पर गेंद लगने के कारण सिर में लगने वाली चोट से है। जब किसी खिलाड़ी के सिर पर गंभीर चोट लगती है, जिससे उसका दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता या उसे चक्कर और उलझन महसूस होती है, तो उसे मेडिकल भाषा में कन्कशन कहा जाता है।

क्रिकेट में कन्कशन नियम को ICC ने 2019 में इसलिए लागू किया गया था ताकि चोटिल खिलाड़ी को जोखिम में डालकर खेलने के लिए मजबूर न किया जाए। यदि किसी बल्लेबाज या फील्डर के सिर पर गेंद लगती है, तो टीम का फिजियो मैदान पर आकर उसका कन्कशन टेस्ट करता है (जैसे- तारीख, जगह या खिलाड़ी का नाम पूछना)।

यदि खिलाड़ी सिर की चोट या चक्कर के कारण आगे खेलने की स्थिति में नहीं होता है, तो उसे मैच से बाहर कर दिया जाता है। घायल खिलाड़ी की जगह मैच रेफरी की मंजूरी से कन्कशन सब्स्टीट्यूट (नया खिलाड़ी) टीम में शामिल किया जाता है।

नियम के अनुसार, जो नया खिलाड़ी अंदर आता है, वह चोटिल खिलाड़ी के बिल्कुल समान (जैसे- बल्लेबाज की जगह बल्लेबाज या गेंदबाज की जगह गेंदबाज) होना चाहिए, ताकि टीम का संतुलन न बिगड़े।

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solid #DDD;margin-right: 10px;padding: 1px;float: left;z-index: 0" title="" width="1116" /></p> </p> </p> <p style="text-align: justify"> <strong>प्रकृति को सहेज रहा मध्यप्रदेश-</strong>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार कर रहा है। मध्यप्रदेश की धरती पर हाथियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश घड़ियाल स्टेट भी है। चंबल और कूनो नेशनल पार्क में भी घड़ियालों के संरक्षण का कार्य तेजी से हो रहा है। मगर मां नर्मदा का वाहन है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महा अभियान प्रगति पर है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महा अभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।</p> <p style="text-align: justify">  </p> <p style="text-align: justify"> <strong>जिसे बना नहीं सकते, उसे बिगाड़ें नहीं-</strong>कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे बिगाड़े नहीं। धरती पर उपलब्ध जैव विविधता से हमें भोजन, दवाई और जीवन मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता में हमने एक वन्यजीव प्रजाति का संरक्षण किया है। चीता घास के मैदानों में रहने वाला वन्यजीव है। उन्होंने कहा कि हम जैव विविधता संरक्षण के कार्य में सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव रखते हैं। जैव विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। दुनिया में कितना भी मशीनीकरण आ जाए, लेकिन प्रकृति पर हमारी निर्भरता कभी कम नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। वर्ष 2030 तक हम इस लक्ष्य को पूर्ण करेंगे। सदियों से भारत ने प्रकृति से साथ जीवन जीने की परंपरा को आगे बढ़ाया है। मध्यप्रदेश की जनजातियों की जीवन शैली में यह समृद्ध परंपरा साफ नजर आती हैं। हमें प्राकृतिक खेती और प्रकृति को बचाए रखने में सहयोग करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुनिया की भीषण त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस त्रासदी के अपशिष्ट का संपूर्ण निष्पादन कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया है। प्रदेश में चीता संरक्षण के लिए भी बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इसके लिए राज्य सरकार को बधाई देता हूं।</p> <p style="text-align: justify">  </p> <p style="text-align: justify"> <strong>घरों में ही बनाएं छोटा सा जैव विविधता पार्क-</strong>केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण से भावी पीढ़ियों के पर्यावरण को बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन लाइफ की पहल की है, जिसे विश्वस्तर पर सराहा गया है। पर्यावरण बचाने के लिए देश में स्थानीय स्तर पर 2 लाख से अधिक जैव विविधता समितियां बनाई गई हैं। प्रोजेक्ट चीता दुनिया का पहला इंटर कॉन्टिनेंटल ट्रांसफर है। पयार्वरण की परिस्थितियों में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से घटी है। पर्यावरण बचाने के लिए आज हम अपनी बालकनी में पक्षियों के लिए घोसला रखते हैं और पौधे लगाते हैं। हमें एक छोटा जैव विविधता पार्क घरों की बालकनी में बनाना चाहिए। दूसरी ओर, कार्यक्रम में कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि चीता करीब 4-5 हजार वर्ष से भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रहा है। श्योपुर के कूनो में पहली बार वर्ष 2022 में नामीबिया से चीते लाए गए थे। भारत में इस साल 18 नए चीतों का जन्म हुआ, जिनमें से 14 अभी फल-फूल रहे है। भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी भी शावकों को जन्म दे चुकी है। भारत में अब तक चीतों की संख्या कुल 53 है। इन्में से 33 भारत में जन्मे हैं।</p>

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