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ग्वालियर के तिघरा बांध में एक माह में 4 मौतें:  मानसून से पहले पिकनिक स्पॉट बन रहे खतरनाक, सुरक्षा पर सवाल – Gwalior News

ग्वालियर के तिघरा बांध में एक माह में 4 मौतें: मानसून से पहले पिकनिक स्पॉट बन रहे खतरनाक, सुरक्षा पर सवाल – Gwalior News


बारिश की पहली फुहार के साथ ही ग्वालियर शहर और आसपास के बांध, वाटरफॉल और पिकनिक स्पॉट लोगों से गुलजार होने लगे हैं। हर साल की तरह इस बार भी तिघरा बांध, सुल्तानगढ़ वाटरफॉल, वीरपुर बांध, भदावना सहित कई प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। लेकिन, प्रकृति की खूबसूरती का यह आकर्षण कई बार जानलेवा भी साबित हो रहा है। हाल ही में तिघरा बांध के प्रतिबंधित क्षेत्र में गजराजा मेडिकल कॉलेज के दो छात्रों की डूबने से हुई दर्दनाक मौत ने एक बार फिर इन पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कोई पहला मामला नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान इन स्थानों पर डूबने और अन्य हादसों की घटनाएं सामने आती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले करीब एक माह में केवल तिघरा बांध में ही डूबने से चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। बारिश बढ़ेगी तो बढ़ेगी भीड़, बढ़ेगा खतरा मानसून की दस्तक के साथ आने वाले दिनों में इन पिकनिक स्पॉट्स पर लोगों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। छुट्टियों और सप्ताहांत पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, परिवार और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश हादसे लोगों की लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी नहीं हैं पर्याप्त इंतजाम तिघरा बांध सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखाई देती। जिन क्षेत्रों को प्रशासन ने प्रतिबंधित घोषित किया है, वहां न तो पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और न ही मजबूत फेंसिंग की गई है। कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन उनकी स्थिति ऐसी है कि वे केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कई पर्यटकों को यह तक पता नहीं चलता कि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। सेल्फी और रील का बढ़ता क्रेज भी बन रहा हादसों की वजह सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने भी जोखिम बढ़ा दिया है। सेल्फी लेने, वीडियो बनाने और रील शूट करने के लिए युवा पानी के बेहद करीब पहुंच जाते हैं। कई बार उन्हें पानी की गहराई और तेज बहाव का अंदाजा नहीं होता और कुछ ही सेकंड में बड़ा हादसा हो जाता है। इसके अलावा शहर के आउटर इलाके में स्थित खुली खदानें भी लोगों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं। इन खदानों में भी हर वर्ष डूबने और दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लोग बोले- हादसे के बाद नहीं, पहले हो इंतजाम स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को हर हादसे के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। प्रतिबंधित क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे, लाइफगार्ड, पर्याप्त पुलिस बल और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। कलेक्टर बोलीं- संबंधित विभागों को दिए गए निर्देश ग्वालियर कलेक्टर रुचिका सिंह ने कहा कि मानसून का सीजन शुरू हो रहा है। इस दौरान स्वाभाविक रूप से लोग परिवार के साथ पर्यटन स्थलों पर जाते हैं। बारिश के मौसम में प्राकृतिक सुंदरता सभी को आकर्षित करती है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं और जिन विभागों की जो जिम्मेदारी है, उन्हें उसके अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। SSP बोले- संवेदनशील स्थानों की पहचान कर बढ़ाई जाएगी सुरक्षा ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि मानसून को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक आयोजित की जा रही है। तिघरा बांध सहित अन्य संवेदनशील और जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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