खूबसूरत वादियां, ऊंचे पहाड़, कल-कल बहते झरने के बीच सुकून की तलाश में पहुंचे युवा जोड़े… लेकिन इन्हीं हसीन नजारों में एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिससे पूरा प्रदेश अनजान था।
मध्य प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल पातालपानी को एक खूंखार गैंग ने अपना शिकारगाह बना लिया था। बदमाश सुनसान झरनों और पहाड़ियों के आसपास घूमने आने वाले कपल्स पर नजर रखते थे।
मौका मिलते ही उन्हें घेर लेते, लूटपाट करते, युवतियों के साथ दरिंदगी करते, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करते और फिर धमकाकर छोड़ देते। कई मामलों में अपनी पहचान छिपाने के लिए हत्या तक कर देते थे।
आखिर ये बदमाश कौन थे? वे अपने शिकार कैसे चुनते थे? कितने लोग उनकी दरिंदगी का शिकार बने? और किस घटना के बाद इस खौफनाक गैंग का सच सामने आया? मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में इसके जवाब… नवंबर की शुरुआत के साथ मालवा में गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी थी। महू के पास स्थित पातालपानी और उसके आसपास का इलाका अपनी पूरी खूबसूरती के चरम पर था। झरनों की आवाज, हरियाली से घिरी घाटियां और पहाड़ों के बीच बहता पानी पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा था।
इसी मौसम में कई युवा जोड़े भी शहर की भागदौड़ से दूर कुछ यादगार पल बिताने यहां पहुंच रहे थे। उन्हीं में हिमांशु और श्रेया भी थे। 6 नवंबर 2017 की सुबह दोनों महू से मेहंदीकुंड की ओर निकले।
पातालपानी से कुछ दूरी पर स्थित मेहंदीकुंड का विशाल झरना और उसके आसपास का नजारा किसी फिल्मी दृश्य जैसा था। अचानक गायब हो गए दोनों वादियों के बीच घूमते-घूमते हिमांशु और श्रेया अचानक लापता हो गए। सुबह से शाम हो गई, फिर रात भी बीतने लगी, लेकिन दोनों घर नहीं लौटे। परिवार की चिंता बढ़ने लगी।
रिश्तेदारों और दोस्तों से संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली। आखिरकार परिजनों ने महू के एक पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जंगल छान मारा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला पुलिस ने पातालपानी, मेहंदीकुंड और आसपास के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाश शुरू की। कई दिनों तक खोजबीन चली, लेकिन न हिमांशु का कोई पता चला और न ही श्रेया का।
दिन बीतते गए। करीब छह महीने गुजर गए। परिवार की उम्मीदें लगभग टूट चुकी थीं। पुलिस के पास भी ऐसा कोई सुराग नहीं था जिससे जांच आगे बढ़ सके। चने की चोरी से खुला छह महीने पुराना राज मई 2018 में महू के एक घर से चार बोरी चने चोरी हो गए। जांच के दौरान पुलिस ने बलराम नाम के बदमाश और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। एक रात जेल की बैरक में दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। पहला आरोपी बोला, ‘‘तूने अच्छा नहीं किया… मुझे क्यों फंसा दिया?” बलराम ने जवाब दिया, “जो हो गया सो हो गया, अब क्या करेगा?” पहला आरोपी गुस्से में बोला, “अगर मैंने तेरा मेहंदीकुंड वाला राज खोल दिया तो तू कहीं का नहीं रहेगा।” मुखबिर ने पहुंचाई खबर बैरक में मौजूद एक अन्य कैदी ने यह बातचीत सुन ली। वह पुलिस का मुखबिर था। उसने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस तक पहुंचा दी। सूचना मिलते ही टीआई हितेंद्र राठौर ने दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ शुरू की। कुछ देर बाद जो कहानी सामने आई, उसने पुलिस अफसरों के होश उड़ा दिए। बलराम एक ऐसी घटना का जिक्र कर रहा था, जिसकी भनक तक पुलिस को नहीं लगी थी। मेहंदीकुंड की खाई में क्या छिपा था? पूछताछ के दौरान टीआई राठौर ने पूछा, “मेहंदीकुंड वाली किस घटना की बात कर रहे थे?” एक आरोपी ने जवाब दिया, “मेहंदीकुंड की खाई में उतरकर देख लीजिए… पत्थरों के नीचे क्या छिपा है।” बस इतना सुनना था कि पुलिस टीम तुरंत मेहंदीकुंड के लिए रवाना हो गई। मेहंदीकुंड पातालपानी से करीब 10-12 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच स्थित है। पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर खाई में लगभग 50 फीट नीचे उतरी और तलाश शुरू कर दी। तभी एक जवान की नजर एक पत्थर के पास पड़े जूते पर पड़ी। उसने आवाज लगाई- “सर, यहां कुछ दिखाई दे रहा है।” पत्थरों के नीचे मिले दो कंकाल पत्थरों के नीचे दो कंकाल पड़े थे। शरीर पूरी तरह गल चुका था। केवल हड्डियों का ढांचा बचा था। आसपास कपड़े भी नहीं थे। पुलिस ने तुरंत छह महीने पहले लापता हुए हिमांशु और श्रेया के परिजनों को बुलाया। पहचान आसान नहीं थी, लेकिन कुछ सामान अब भी वहां मौजूद था। श्रेया के पिता ने एक अंगूठी को पहचान लिया, जो नर कंकाल की उंगली में फंसी हुई थी। वहीं हिमांशु के भाई मुकेश ने जूते की पहचान कर ली। घटनास्थल पर श्रेया का टिफिन बॉक्स भी मिला। अब साफ हो चुका था कि ये कंकाल हिमांशु और श्रेया के ही थे। अब पुलिस के सामने ये सवाल थे-
आखिर मेहंदीकुंड में उस दिन हुआ क्या था?
क्या हिमांशु और श्रेया किसी खतरनाक गैंग का शिकार बने थे?
उनकी मौत के पीछे कौन लोग थे?
और क्या यह सिर्फ दो लोगों की हत्या थी या इसके पीछे कोई बड़ा और संगठित अपराध छिपा था? पढ़िए कल क्राइम फाइल्स के पार्ट-2 में… ये भी पढ़ें…
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