नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का निर्धारण करने के लिए मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत याचिकाओं में शुक्रवार को मंदिर पक्ष ने रिजाइंडर (प्रतिउत्तर) प्रस्तुत किया। उसके वकील ने कहा कि मस्जिद में तीन चीजें वजूखाना, मीनार और मेहराब अनिवार्य रूप से होती हैं। इनके बगैर मस्जिद की कल्पना नहीं की जा सकती। भोजशाला में न वजूखाना है न मीनार।
एएसआइ की रिपोर्ट बताती है कि मेहराब भी बाद में बनाई गईं। ऐसे में यह मस्जिद हो ही नहीं सकती। मस्जिद पक्ष कह रहा है कि पूजा स्थल अधिनियम के प्रविधानों के तहत उन्हें नमाज का अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहरों पर यह एक्ट लागू ही नहीं होता और भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है।
ब्रिटिश संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति के बारे में खुद संग्रहालय ने स्वतंत्रता से पहले लिखे पत्र में बताया है कि इसका निर्माण वर्ष 1034 में राजा भोज द्वारा कराया गया था। मंदिर पक्ष सिर्फ यह चाहता है कि भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाए और यहां नमाज को पूरी तरह से रोका जाए।
एएसआई के आदेश में संशोधन की मांग
शुक्रवार को याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एडवोकेट विष्णुशंकर जैन और याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से एडवोकेट मनीष गुप्ता ने प्रतिउत्तर प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष भोजशाला को सिविल मामला बताकर उलझाना चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
हम स्वामित्व के निर्धारण के लिए नहीं बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के 7 अप्रैल 2023 के आदेश में संशोधन के लिए हाई कोर्ट आए हैं। एएसआइ ने इस आदेश में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी है। भोजशाला मंदिर है और यहां 24 घंटे पूजा की अनुमति दी जाना चाहिए।
नमाज के इतिहास और पुरातात्विक साक्ष्यों पर तर्क
मस्जिद पक्ष कह रहा है कि भोजशाला में 700 वर्ष से नमाज पढ़ी जा रही है, लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 1935 के आसपास हुए विवाद के बाद यहां नमाज शुरू हुई थी। एडवोकेट गुप्ता ने पुरातत्वविद सीतारमण की पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि इस पुस्तक में 2800 से ज्यादा ऐसे मंदिरों की जानकारी है जिन्हें मुस्लिम शासकों ने ध्वस्त किया था।
भोजशाला को पाठशाला ठहराने का प्रयास भी हो रहा है लेकिन भोजशाला की तरह जूना महाकाल मंदिर और ऊन के चौबारा मंदिर में लिखावट और श्लोक मिले हैं, जो बताते हैं कि भोजशाला मंदिर ही है। मस्जिद पक्ष कह रहा है कि कई हिंदू राजाओं ने धार में तोड़फोड़ की, लेकिन वे इस बात को सिद्ध करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं।
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सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन रखेंगे प्रति उत्तर
शुक्रवार को मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद को भी रिजाइंडर देना था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने उन्हें सोमवार को रिजाइंडर देने के लिए कहा है। कोर्ट इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के तर्क सुनेगी। कोर्ट ने रिजाइंडर देने वाले सभी पक्षों से कहा है कि वे अधिकतम 30 मिनट में अपनी बात पूरी करें। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से लिखित में बहस देने के लिए भी कहा है।
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