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फर्जी पट्टा पहनाकर इंदौर पुलिस ने निकाला था बदमाशों का जुलूस, अब अस्पताल की पर्चियां भी जांच के घेरे में

फर्जी पट्टा पहनाकर इंदौर पुलिस ने निकाला था बदमाशों का जुलूस, अब अस्पताल की पर्चियां भी जांच के घेरे में

इंदौर में तोड़फोड़ के आरोपियों को फर्जी पट्टा पहनाकर जुलूस निकालने का मामला अब पुलिस के लिए ही परेशानी बन गया है।

Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 12:18:01 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 12:28:40 PM (IST)

नकली पट्टा पहनाकर निकाला जुलूस, जेल के बाहर पट्टा उतारने का वीडियो हुआ था वायरल।

HighLights

  1. हीरानगर थाने में गिरफ्तार मयंक और शोभित का सेंट्रल जेल का वीडियो सामने आया था
  2. टीआई सुशील पटेल ने दोनों का जुलूस निकाला था, आरोपियों को बंधे हुए थे पट्टे
  3. सिपाही जफर खान उन्हें जेल ले गया और हाथ पर बंधा पट्टा खुलवा दिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। तोड़फोड़ के आरोपितों के हाथ में बंधा कथित फर्जी पट्टा अब पुलिस के लिए ही सिरदर्द बन गया है। पहले जेल के वीडियो ने सवाल उठाए, अब जांच अस्पताल तक पहुंच गई है। टीआई सुशील पटेल और खुफिया सेल के बयानों में दावा किया गया कि आरोपियों का इलाज पहले निजी अस्पताल में हुआ था, जबकि एमवाय अस्पताल में केवल एमएलसी कराई गई।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पट्टा किस डॉक्टर की सलाह पर बंधा और फिर जेल पहुंचने से पहले कैसे खुल गया। जांच अधिकारी एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश अब इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान और दस्तावेज खंगाल रहे हैं। एसीपी रुबिना मिजवानी सहित कई पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। जिस पट्टे को पुलिस कार्रवाई का प्रतीक बनाया गया था, वही अब पूरी कहानी का सबसे कमजोर धागा साबित होता दिख रहा है।

वीडियो सामने आया था

हीरानगर थाने में गिरफ्तार आरोपित मयंक और शोभित का सेंट्रल जेल का वीडियो सामने आया था। दोनों आरोपितों को कार में तोड़फोड़ और हमला करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। टीआई सुशील पटेल ने आरोपियों का जुलूस भी निकाला था। पीसीआर में पदस्थ सिपाही जफर खान दोनों आरोपियों को जेल ले गया और हाथ पर बांधा पट्टा खुलवा दिया।

जोन-3 के डीसीपी अभिषेक रंजन ने जोन-3 के एडीसीपी ओमप्रकाश को जांच सौंपी है। सोमवार को एडीसीपी ने एसीपी रुबिना मिजवानी, टीआई सुशील पटेल, एसआइ दिनेश त्रिपाठी, सिपाही सौरभ, विश्व रत्न, अनिल जायसवाल, देवेंद्र यादव के बयान दर्ज किए गए। टीआई ने कहा कि गिरफ्तारी के पहले ही आरोपी उपचार करवा चुके थे।

प्राइवेट अस्पताल में इलाज

विवाद के दौरान घायल होने पर निजी अस्पताल में उपचार हुआ था। एमवाय अस्पताल में एमएलसी बनवाई थी। एडीसीपी ने उपचार करने वाले डॉक्टरों को बुलाया है। एसीपी रुबिना मिजवानी ने कहा कि आरोपियों को शांतिभंग करने के मामले में कोर्ट में पेश किया था। कृत्य की गंभीरता को देखते हुए जेल वारंट बनाया था।

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