पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के पीछे देशभर से पहुंचे चुनिंदा कार्यकर्ताओं की बड़ी भूमिका रही। इनमें भोपाल के दो भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल थे, जिन्होंने करीब सवा महीने तक बंगाल के गांवों में रहकर चुनावी अभियान संभाला। बंगाल से लौटने के बाद दोनों कार्यकर्ताओं ने दैनिक भास्कर डिजिटल से वहां के हालात और चुनावी अनुभव साझा किए। सुंदरवन के गांवों में मिला जबरदस्त समर्थन नॉर्थ 24 परगना जिले में प्रभारी रहे प्रताप सिंह यादव ने बताया कि वे चुनावी अभियान के दौरान सुंदरवन क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचे। उन्होंने कहा कि गांवों में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में काफी उत्साह था। लोग उन्हें देखते ही “जय श्रीराम” के नारे लगाकर स्वागत करते थे। प्रताप के मुताबिक वे करीब 45 दिनों तक नोआपारा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे। उन्होंने दावा किया कि कई जगह टीएमसी समर्थकों के झंडे लगे रहते थे और छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति बन जाती थी। पानी के छींटे पर भी विवाद, गाड़ियों में तोड़फोड़ यादव ने आरोप लगाया कि कई बार गाड़ी गुजरने के दौरान पानी के छींटे पड़ने जैसी मामूली बातों को लेकर भी विवाद खड़ा कर दिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई। कई गांव ऐसे थे जहां एक समय में केवल एक गाड़ी ही अंदर जा सकती थी। ऐसे इलाकों में सुरक्षा को लेकर लगातार डर बना रहता था, क्योंकि किसी हमले की स्थिति में बचाव के पर्याप्त साधन नहीं होते थे। महिलाओं ने सुनाईं परेशानियां वहीं नोआपारा विधानसभा प्रभारी सुनील कुमार महेश्वरी ने बताया कि वे करीब 10 दिनों तक क्षेत्र में रहे। इस दौरान उन्होंने कई घटनाओं को करीब से देखा। महेश्वरी के अनुसार स्थानीय महिलाओं ने भी उनसे अपनी समस्याएं साझा कीं। महिलाओं का आरोप था कि शराब की वजह से परिवारों में विवाद, मारपीट और घरों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनावी काम के दौरान उन्हें और अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिशें भी की गईं। इसके बावजूद कार्यकर्ता लगातार गांवों में जाकर लोगों से संपर्क करते रहे।
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