भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने 7 अप्रैल 2003 को आदेश जारी कर मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दे दी, लेकिन …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जैन समाज भोजशाला पर दावा नहीं करता, लेकिन यह चाहता है कि उसे भी पूजा का अधिकार मिले। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने 7 अप्रैल 2003 को आदेश जारी कर मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दे दी, लेकिन जैन समाज के धर्मावलंबियों के लिए कुछ नहीं कहा। भोजशाला जैन गुरुकुल है। राजा भोज ने ही इसका निर्माण कराया था। उस समय बड़ी संख्या में जैन शोधार्थी यहां अध्ययन करते थे। एएसआइ के सर्वे में जो मूर्तियां मिली हैं उन्हें जैन के देवी-देवताओं की मूर्तियों के रूप में संरक्षित किया जाए। लंदन संग्रहालय में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अंबिका की है। इसे लंदन से वापस लाया जाए।
सर्वे के साक्ष्यों और कलाकृतियों पर जैन समाज के तर्क
भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को यह बात जैन समाज की ओर से याचिका प्रस्तुत करने वाले एडवोकेट दिनेश पी. राजभर ने कही। दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए एडवोकेट राजभर ने करीब एक घंटे तक अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राजा भोज जैन समाज के भी संरक्षक थे। सर्वे में मिले साक्ष्य बताते हैं कि भोजशाला में जो कॉलम हैं वे माउंट आबू जैन मंदिर की तरह बने हैं। सर्वे में प्राकृत भाषा में मिले श्लोक और लेख मिले हैं, जो बताते हैं कि यहां बड़ी संख्या में जैन शोधार्थी अध्ययन करते थे। यह जैन धर्म का गुरुकुल हुआ करता था।
तीर्थंकरों के प्रतीकों और एएसआइ की कार्यप्रणाली पर सवाल
एडवोकेट राजभर ने एएसआइ को घेरते हुए कहा कि वह एक धर्म विशेष का समर्थन कर रहा है। दावा किया जाता है कि राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर की मूर्तियों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है, लेकिन कैग की रिपोर्ट बताती है कि मूर्तियां खुले आसमान के नीचे लावारिस पड़ी रहती हैं। एडवोकेट राजभर ने कहा कि जैन समाज के 24 तीर्थंकर हैं और प्रत्येक के लिए एक पशु का चिह्न आरक्षित है। जैसे आदिनाथ भगवान के लिए बैल और महावीर भगवान के लिए शेर का चिह्न होता है। भोजशाला के सर्वे में पशुओं के चिह्न मिले हैं। ये चिह्न जैन समाज के तीर्थंकरों के लिए पहचाने जाने वाले पशुओं के हैं, जो बताते हैं कि भोजशाला जैन गुरुकुल था।
कोर्ट की टिप्पणी और जैन समाज द्वारा चाही गई राहत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एडवोकेट राजभर से सवाल-जवाब भी किए। कोर्ट ने कहा कि वे पहले तो यह स्पष्ट करें कि वे भोजशाला को जैन मंदिर सिद्ध करना चाहते हैं या जैन गुरुकुल, क्योंकि दोनों ही अलग-अलग होते हैं। इस पर एडवोकेट राजभर ने कहा कि वे इंदौर आकर व्यक्तिगत रूप से अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखना चाहते हैं। कोर्ट ने उन्हें इसकी अनुमति देते हुए कहा कि वे गुरुवार को उपस्थित हो सकते हैं। जैन समाज चाहता है कि उसे भोजशाला में पूजा का अधिकार मिले, भोजशाला को लेकर एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। इसमें जैन समाज को प्रतिनिधित्व मिले, लंदन संग्रहालय से अंबिका और सरस्वती देवी की मूर्तियों को वापस लाया जाए और भोजशाला परिसर में जैन गुरुकुल बनाया जाए।
महाधिवक्ता ने रखा शासन का पक्ष: मंदिर तोड़कर मस्जिद निर्माण का दावा
एडवोकेट राजभर के बाद महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने शासन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार को आती है धार में विवाद की स्थिति बन जाती है। हर बार बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों, अधिकारियों को व्यवस्था संभालने के लिए मैदान में उतरना पड़ता है। उन्होंने एएसआइ के सर्वे में मिले साक्ष्यों से अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि सर्वे में यह बात सिद्ध हुई है कि भोजशाला मंदिर ही है। महाधिवक्ता ने बताया कि सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि मस्जिद को पहले से बनी संरचना पर बनाया गया है। मेहराब नए बनाए गए थे जो बताते हैं कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद का निर्माण किया गया। महाधिवक्ता के तर्क अधूरे रहे जिन्हें कोर्ट गुरुवार को सुनेगी।
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