नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रबी विपणन वर्ष 2026 में इंदौर संभाग में बंपर गेहूं का उत्पादन हुआ और इसका सीधी असर समर्थन मूल्य खरीदी पर दिखाई दिया। बीते वर्ष की तुलना में इस बार संभाग में 44 प्रतिशत अधिक गेहूं खरीदा गया।
वर्ष 2025 में संभाग के आठ जिलों में 4.73 लाख टन गेहूं खरीदा गया था, जो इस वर्ष बढ़कर 8.65 लाख टन से अधिक हो गया। यानी एक साल में 3.92 लाख टन अधिक गेहूं केंद्रों तक पहुंचा। पूरे संभाग का 40 प्रतिशत गेंहू अकेले इंदाैर के किसानों ने बेचा है। 3.49 लाख टन गेहूं के साथ इंदौर पूरे संभाग में अव्वल रहा।
इंदौर के साथ ही पूरे संभाग में अनुकूल मौसम, बेहतर सिंचाई के कारण गेहूं का उत्पादन बढ़ा है। हाल ही में खत्म हुई समर्थन मूल्य पर खरीदी के आंकडे बताते है कि पूरे संभाग में गेहूं का उत्पादन बढ़ा है। इंदौर जिले में बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 28.48 प्रतिशत अधिक गेहूं खरीदा गया।
बीते वर्ष इंदौर जिले में 22611 किसानों ने 2 लाख 65 हजार 871 टन गेहूं बेचा था, लेकिन इस वर्ष 32520 किसानों ने 3 लाख 49 हजार 491 टन गेहूं बेचा है। जिला आपूर्ति नियंत्रक एल मारू का कहना है कि खरीदी का कार्य पूरा हो चुका है और अधिकांश माल का परिवाहन भी किया जा चुका है। गौरतलब है पहले किसान निजी व्यापारियों को बिक्री करते थे, लेकिन इस बार समर्थन मूल्य अपेक्षाकृत आकर्षक रहने और उपार्जन व्यवस्था मजबूत होने से सरकारी केंद्रों की ओर झुकाव है।
धार और खंडवा में भी तेज उछाल
धार जिला 2 लाख 33 हजार 936 टन खरीदी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। बीते वर्ष यहां 1 लाख 35 हजार 945 टन गेहूं खरीदा गया था। यानी करीब 72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। वहीं खंडवा में सबसे तेज बदलावों में एक देखने को मिला, जहां खरीदी 43 हजार 652 टन से बढ़कर 1 लाख 57 हजार 187 टन पहुंच गई। यह लगभग 260 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो बेहतर उत्पादन और किसानों के गेहूं की फसल के रूझान को दर्शाती है।
खरगोन व बड़वानी ने चौंकाया
सबसे बड़ा बदलाव खरगोन जिले में दिखाई दिया। पिछले वर्ष यहां केवल 3,150 टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार 85 हजार 86 टन खरीदी हुई। यानी करीब 27 गुना वृद्धि दर्ज की गई। बड़वानी और बुरहानपुर जैसे जिलों में पिछले वर्ष किसानों ने पंजीयन नहीं कराया था, इसलिए खरीदी शून्य रही थी। लेकिन इस वर्ष बड़वानी में 7,365 टन और बुरहानपुर में 433 टन गेहूं खरीदा गया।
उत्पादन बढ़ने के कारण
उप संचालक कृषि सीए केवड़ा का कहना है कि इस वर्ष समय पर बुवाई, पर्याप्त सिंचाई, मौसम की अनुकूलता और उच्च उत्पादक किस्मों के उपयोग से उत्पादन बेहतर रहा। कई जिलों में ओलावृष्टि और बारिश का असर सीमित रहा, जिससे फसल नुकसान कम हुआ। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था और ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया ने भी किसानों का भरोसा बढ़ाया।
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