नए जमाने के डिश वॉश बनाने में एसिड स्लरी जैसे सेहत के लिए हानिकारक रसायनों का उपयोग हो रहा है। जबकि उपभोक्ता पूरी तरह अनजान है कि उनके डिश वॉश को बनान …और पढ़ें
HighLights
- डिश वॉश बनाने में एसिड स्लरी जैसे सेहत के लिए हानिकारक रसायनों का उपयोग हो रहा है
- उपभोक्ता पूरी तरह अनजान है कि उनके डिश वॉश को बनाने के लिए किस तरह के घटकों का उपयोग हो रहा है
- डिश वॉश बनाने के लिए इको और प्लांट बेस्ड रसायनों के इस्तेमाल को अनिवार्य करने की मांग की है
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर। आसान से और बेहतर साफ होते दिख रहे बर्तन लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। नए जमाने के डिश वॉश बनाने में एसिड स्लरी जैसे सेहत के लिए हानिकारक रसायनों का उपयोग हो रहा है। जबकि उपभोक्ता पूरी तरह अनजान है कि उनके डिश वॉश को बनाने के लिए किस तरह के घटकों का उपयोग हो रहा है।
डिटर्जेंट और स्वच्छता उत्पाद बनाने वाले उद्योगों ने ही शरीर में जाते इन रसायनों के प्रति आगाह किया है। पैकिंग पर घटकों की जानकारी देने से लेकर डिश वॉश बनाने के लिए इको और प्लांट बेस्ड रसायनों के इस्तेमाल को अनिवार्य करने की मांग की है।
इंदौर और आसपास के डिटर्जेंट निर्माता उद्योगों की प्रतिनिधि संस्था अहिल्या सरफेक्टेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ने डिश वॉश और डिटर्जेंट के लिए नए मानक तय करने की मांग रखी है। एसोसिएशन के मुताबिक सामान्य डिटर्जेंट पावडर या बार में एसिड स्लरी प्रमुख घटक होता है। जिसे रसायनिक रूप से लिनर अल्कलाइन बैंजीन कहते हैं।
ये रसायन लोगों के पेट में भी जा रहे हैं
पेट्रोलियम-केरोसिन से बनने वाले इस रसायन से ही झाग पैदा होता है। एसोसिएशन के पदाधिकारी और डिटर्जेंट निर्माता उद्योगपतियों के अनुसार सामान्य चलन में तमाम डिश वॉश में भी इसी का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में साफ दिख रहे बर्तनों के साथ सूक्ष्म मात्रा में जाने-अनजाने खाने-पानी के साथ ये रसायन लोगों के पेट में भी जा रहे हैं।
प्लांट बेस्ड कैमिकल हो इस्तेमाल
अभी बाजारों में मिल रहे किसी भी डिश वॉश बार या लिक्विड के पैकेट पर इसके अवयवों की जानकारी नहीं लिखी जाती। अहिल्या सरफेक्टेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और टेक्निकल एडवायजर राजेंद्र सेठ कहते हैं कि इंदौर के उद्योगों के लिए एसोसिएशन ने निर्देश जारी किया है कि वे डिश वाश में लिनियन एल्कलाइन बेंजीन व इस श्रेणी के रसायनों का उपयोग ना करें।
मिथाइल ईस्टर सल्फोमेट और सुगर सरफेक्टेंट्स जैसे कई रसायन है जो या हानिकारक नहीं होते। ये ग्लूकोज और पाम तेल जैसे पौधों से प्राप्त रसायनों से बनते हैं। विकसित देशों में डिटर्जेंट व डिश वाश में इसी का इस्तेमाल हो रहा है। हमारे यहां भी इनका इस्तेमाल अनिवार्य होना चाहिए। इससे उत्पादों की गुणवत्ता व कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ता।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आशुतोष सिंह कहते हैं कि इंदौर के उद्योग इस तरह के डिश वाश बनाने लगे हैं। लेकिन जब लोग सिर्फ झाग या तेज सफाई के पीछे छुपे रसायनों के प्रति जागरुक नहीं होंगे उनके बर्तनों के साथ रसायन पेट में जाते रहेंगे।
पेट के लिए हानिकारक
लिनियर एल्कलाइन बेंजोइट या स्लरी जैसे रसायन कैरोसीन और सल्फर आदि से संश्लेषण से प्राप्त होते हैं। पेट में जाने पर ये गंभीर पेट की समस्याओं के साथ दीर्घ अवधि में स्वास्थ्य पर प्रतिकुल प्रभाव डालते हैं। सीधे तौर पर कहें तो ये खतरनाक रसायन है। बर्तनों के जरिए पेट में जाने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इनकी पूरी जानकारी पैक पर लिखी होना चाहिए। साथ ही नियम बनने चाहिए कि इनका उपयोग बर्तन साफ करने में ना हो सके। -प्रो. एसएल गर्ग, रसायनविद व पूर्व प्राचार्य
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