जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिए साथ ही जल संकट के निवारण के लिए पैसों की जरुरत भी बताई। महापौर और सांसद ने 50 करोड़ का फंड शासन से मांगा। …और पढ़ें
HighLights
- जनप्रतिनिधियों के साथ की बैठक, नए हाईड्रेंट बनेंगे और बोरवेल खोदेंगे
- जल संकट को लेकर शोर मचा और सत्ता के साथ वाले विधायक ही नाराज हुए तो भोपाल तक आवाज पहुंची
- सूखे बोरिंग और नर्मदा जल की आपूर्ति में प्रबंधन पर चर्चा हुई
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में अप्रैल से पहले गर्मी में जलप्रदाय और पानी की कमी से निपटने के लिए योजना बनती वो अब मई के आखिर में बन रही है। इंदौर में जल संकट को लेकर शोर मचा और सत्ता के साथ वाले विधायक ही नाराज हुए तो भोपाल तक भी आवाज पहुंच गई।
गुरुवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) अनुपम राजन जल संकट के एक सूत्रीय एजेंडे पर बात करने इंदौर पहुंचे। रेसीडेंसी कोठी में महापौर, सांसद विधायकों के साथ बैठक की। इस दौरान सूखे बोरिंग और नर्मदा जल की आपूर्ति में प्रबंधन पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिए साथ ही जल संकट के निवारण के लिए पैसों की जरुरत भी बताई। महापौर और सांसद ने 50 करोड़ का फंड शासन से मांगा। अन्य विधायकों ने इस पर हामी भरी।
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, विधायक महेंद्र हार्डिया, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, मधु वर्मा,गोलु शुक्ला, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय मौजूद रहे। कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्त आशीष पाठक भी बैठक में शामिल हुए। विधायकों ने कहा कि शहर में चार हजार से ज्यादा बोरिंग सूख गए हैं। तालाबों के सूखने के साथ भूजल का स्तर गिरना जल संकट का बड़ा कारण है।
शहर में जनसंख्या का दबाव बढ़ा है लेकिन नर्मदा जलापूर्ति 2013 के समान ही है। कई क्षेत्रों में नर्मदा जल की लाइन डालना या सुधार करना बाकी है। इस दौरान विधायकों ने शहर में पानी की आपूर्ति के लिए ओर ज्यादा बोरिंग करने की जरुरत बताई। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि नर्मदा जलापूर्ति के दौरान बिजली आपूर्ति बंद रखी जाए जिससे मोटर से लोग पानी न खींच सके। उन्होंने अप्रैल में जल संकट को लेकर प्लानिंग नहीं होने की बात भी कही। वर्मा ने तो यह भी कहा कि पुराने अधिकारी शहर को समझते थे। जल संकट से निपटने के लिए उनकी मदद ली जाना चाहिए।
बोरिंग करवाएंगे, नए हाइड्रेंट बनेंगे
विधायक गोलु शुक्ला ने कहा कि मैं विधायक निधि से 50 बोरिंग करवाउंगा ताकि पानी का वितरण हो सके। बैठक में तय किया गया कि शहर में पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए और बोरिंग और हाईट्रेंट बनाए जाएंगे। नर्मदा की टंकियों के पानी पर टैंकरों का बोझ ना डाला जाए। नर्मदा की टंकिया पैमानों के अनुसार भरती रहे। वितरण व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। सांसद लालवानी ने कह दिया कि मैं भी सांसद निधि से बोरिंग करवा सकता हूं बशर्ते उनका मेंटेनेंस हो।
चुंगी क्षति पूर्ति मांगी
महापौर और सांसद ने पानी की समस्या से निपटने के प्रबंधन के लिए करीब 50 करोड़ की राशि की जरुरत बताई। कहा कि शासन को पैकेज देना चाहिए। साथ ही इस दौरान शासन की ओर अटकी निगम की 400 करोड़ रुपये की चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि की बात भी उठी। नेताओं ने कहा कि वह पैसा जारी हो जाए तो ही शहर में काफी कुछ व्यवस्थाएं बेहतर की जा सकती है।
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