पहले दिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव आतीश चंद्र ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की।उन्होंने बदलती जलवायु, खाद्य सुरक्षा और …और पढ़ें
HighLights
- ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के बीच वैश्विक कृषि एजेंडा, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती पर हुई चर्चा
- कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी सहयोग और जलवायु के प्रति लचीली कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया
- जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स- कृषि कार्य समूह (एडब्ल्यूजी) की पांचवीं बैठक मंगलवार को इंदौर में शुरू हुई। बैठक में इस बात पर आम राय बनी बनी कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कृषि की चुनौतियों का समाधान साझेदारी, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान से ही संभव है।
10 सदस्य देशों के 21 प्रतिनिधियों सहित भारत के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए
चर्चा में सदस्य देशों ने कृषि प्रणालियों को अधिक सुदृढ़, समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वैश्विक कृषि सहयोग के इस महत्वपूर्ण मंच पर ब्रिक्स के 10 सदस्य देशों के 21 प्रतिनिधियों सहित भारत के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।
किसान केंद्रित एवं टिकाऊ कृषि विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता रेखांकित की
पहले दिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव आतीश चंद्र ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बदलती जलवायु, खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच किसान केंद्रित एवं टिकाऊ कृषि विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता रेखांकित की। साथ ही कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी सहयोग और जलवायु के प्रति लचीली कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
मंगलवार को तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, पुनर्योजी (रीजेनरेटिव) खेती तथा जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों को बुधवार को इंदौर की सांस्कृतिक विरासत और कृषि विविधता से रूबरू कराया गया। बता दें, ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, इरान, सउदी अरब और यूएई जैसे देश शामिल हुए हैं।
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