×
मध्य प्रदेश के 34 गांवों में बाढ़ का अलर्ट, प्रशासन ने बनाई स्थानीय टीमें, अन्य विभागों को भी मुस्तैद रहने के निर्देश

मध्य प्रदेश के 34 गांवों में बाढ़ का अलर्ट, प्रशासन ने बनाई स्थानीय टीमें, अन्य विभागों को भी मुस्तैद रहने के निर्देश

नईदुनिया न्यूज, कसरावद। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय में खंड स्तरीय बैठक में बाढ़ आपदा प्रबंधन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

एसडीएम सत्येंद्र बैरवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नदी और तालाब किनारे बसे संवेदनशील गांवों के लिए स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन टीम गठित करने के निर्देश दिए गए।

34 गांव नर्मदा, वेदा, कुंदा और बोराड नदी से प्रभावित श्रेणी में

बैठक में बताया गया कि तहसील क्षेत्र के 34 गांव नर्मदा, वेदा, कुंदा और बोराड नदी से प्रभावित श्रेणी में आते हैं। इनमें निचले इलाकों और तालाबों के आसपास बसे गांवों को ज्यादा संवेदनशील माना गया है। प्रशासन ने जनपद पंचायत और नगर परिषद को नदी-नालों के आसपास सतत निगरानी रखने तथा लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।

यही टीम तत्काल राहत और बचाव कार्य संभालेगी

बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थानीय शिक्षक को टीम प्रभारी बनाया जाएगा। इनके साथ पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और चौकीदार को शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आपदा की स्थिति बनने पर यही टीम तत्काल राहत और बचाव कार्य संभालेगी।

अन्य विभागों को भी अलर्ट रहने के निर्देश

प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए स्कूल भवन चिन्हित किए गए हैं। संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। तहसीलदार, जनपद पंचायत, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। 24 घंटे चलेगा बाढ़ कंट्रोल रूम खुला रहेगा।

1 जून से 15 सितंबर तक 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था

एसडीएम कार्यालय स्थित बाढ़ कक्ष में 1 जून से 15 सितंबर तक 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था संचालित की जाएगी। इसके लिए खंड स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। साथ ही गोताखोर, नाविकों, ट्रैक्टर मालिकों और अन्य वाहनों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।

पीडब्ल्यूडी विभाग को संवेदनशील मार्गों और पुल-पुलियों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं यातायात रोकने के लिए बैरिकेड्स, फ्लेक्स और संकेतक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

यह भी पढ़ें- MP में खसरे का प्रकोप, प्रदेश के 25 जिले प्रभावित, चार माह में 800 मामले आए सामने; अलर्ट जारी

पांच बड़े तालाब प्रशासन की निगरानी में

जल संसाधन विभाग के अनुसार अवकानाला, साटका, सांगवी, उटावद और सांडली तालाब संवेदनशील श्रेणी में हैं। इन तालाबों में जलभराव बढ़ने की स्थिति में आसपास के रहवासी प्रभावित हो सकते हैं। इसके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार की गई है।

ये गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील नर्मदा नदी किनारे नावडाटौडी , कठोरा, मलगांव, मटयाण बुजुर्ग, तेल्याव, लेपा, चिचली और खल बुजुर्ग सहित कई गांव संवेदनशील घोषित किए गए हैं।

समस्याओं को लेकर ग्रामीणों से चर्चा की जाएगी

वहीं कुंदा नदी से अवरकच्छ और मूलगांव, वेदा नदी से काकरिया, डोंगरगांव, तथा बोराड नदी से मलतार और नरखेड़ प्रभावित क्षेत्र में शामिल हैं। उधर,जानकारी के अनुसार 18 जून को मानव अधिकार आयोग के सदस्य नर्मदा तट स्थित लेपा गांव पहुंचेंगे। यहां बाढ़ आपदा प्रबंधन सहित अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर ग्रामीणों से चर्चा की जाएगी।

2023 की बाढ़ में 1244 लोग हुए थे प्रभावित

प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2023 में आई बाढ़ से 1244 लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ के दौरान 11 राहत शिविर बनाए गए थे, जहां करीब 1916 लोगों को सुरक्षित ठहराया गया। प्रभावितों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, अस्थायी शौचालय और प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ में 2 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 27 मकानों को नुकसान पहुंचा था। फसल क्षति सहित कुल नुकसान 363.82 लाख रुपए आंका गया था। प्रभावित परिवारों को शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई थी।

Source link
#मधय #परदश #क #गव #म #बढ #क #अलरट #परशसन #न #बनई #सथनय #टम #अनय #वभग #क #भ #मसतद #रहन #क #नरदश

Post Comment