महिला ने पति से अलगाव के बीच गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला वर्तमान में गर्भवती है और पति पर प्रकरण दर्ज होने से वह अलग …और पढ़ें
HighLights
- पति पर आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद वह अलग रहने लगी
- पत्नी अब गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती
- मामले में पति के होने वाले बच्चे का भी प्रश्न जुड़ा हुआ है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पति से अलग रहते हुए गर्भ समापन की अनुमति मांगने वाली महिला के मामले में हाईकोर्ट ने अब पति-पत्नी के बीच सुलह और परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पत्नी के द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने 5 जून को पत्नी और पति दोनों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है ताकि दोनों को समझाइश दी जा सके और उनके बीच के तनाव को खत्म करने के साथ ही गर्भ को लेकर निर्णय दोनों की सहमति से लिया जा सके।
पूरा मामला एक महिला की याचिका से जुड़ा है, जिसने अपने पति से अलगाव के बीच गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने कोर्ट को बताया था कि उसकी शादी धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र के एक युवक से हुई थी और वह वर्तमान में गर्भवती है।
5 मई को उसके पति के खिलाफ धार के धरमपुरी थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ, जिसके बाद वह पति से अलग रहने लगी और तलाक लेने का निर्णय किया। महिला ने कोर्ट से कहा कि वह अब गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती।
हाईकोर्ट ने पुलिस को केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए थे
मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस को केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन धरमपुरी थाना पुलिस ने भोजशाला मामले के बाद धार जिले में कानून व्यवस्था संभालने में व्यस्तता का हवाला देते हुए डायरी पेश नहीं की। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन जैसे मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान पति की ओर से पेश अधिवक्ता ने निवेदन किया कि मामले में पति के होने वाले बच्चे का भी प्रश्न जुड़ा हुआ है, इसलिए दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की जाना चाहिए। कोर्ट ने भी इस आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले में 5 जून को सुनवाई के लिए तय कर दिया और उसी दिन मेडिकल रिपोर्ट को भी सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए।
गर्भ समापन के मामले में केवल पत्नी का निर्णय ही अंतिम नहीं माना जा सकता
पति की ओर से यह दलील भी दी गई थी कि गर्भ समापन के मामले में केवल पत्नी का निर्णय ही अंतिम नहीं माना जा सकता, पति को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने मामले में समझाइश को महत्व देते हुए हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को महिला के लिए परामर्शदाता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
साथ ही कोर्ट ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन को मेडिकल बोर्ड गठित कर यह रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे कि गर्भावस्था का समापन सुरक्षित है या नहीं, गर्भ की अवधि क्या है और संभावित चिकित्सकीय जटिलताएं क्या हो सकती हैं। हाईकोर्ट के इसी निर्देश के तहत की गई मेडिकल जांच की रिपोर्ट 5 जून को कोर्ट में रखी जाएगी।
Indore के पीसी सेठी अस्पताल की बदहाली, गर्भवती महिलाओं के अस्पताल में ही लिफ्ट रहती है बंद, सीढ़ियों पर चलने को मजबूर
Source link
#महल #न #करट #स #मग #गरभ #समपन #क #अनमत #पत #कर #रह #वरध #सलह #करवन #क #कशश #म #जट #इदर #हई #करट



Post Comment