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मुस्लिम होने की वजह से इस सेक्टर को मुंबई में नहीं मिल रहा घर, बोले- पानी नहीं आता पर किराया… Aasim Khan On Struggling To Find Home: महादेव एंड संस में नजर आ चुके मशहूर अभिनेता आसिम खान 28 साल के हैं और पिछले कई सालों से मुंबई में ही रहकर काम कर रहे हैं। अभी के वक्त में उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है लेकिन एक वक्त था जब उन्होंने काफी स्ट्रगल किया था।           आसिम खान ने काफी संघर्ष किया और इसके बावजूद भी उन्हें अभी के वक्त में किराए पर घर लेने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि मुंबई की सोसाइटीज में मुस्लिम को जल्दी से घर नहीं दिया जाता और अगर वह बैचलर एक्टर हो तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है।    मुस्लिम होने के कारण इस एक्टर को नहीं मिल रहा घर हाल ही में टेली मसाला के साथ बातचीत के दौरान आसिम खान ने अपने दर्द को बयां किया और बताया कि “मैं जब से मुंबई आया हूं पांच अलग-अलग घर बदल चुका हूं। जिसमें से सिर्फ एक लोखंडवाला घर मेरे नाम पर था। अगर मेरे दोस्त की शादी ना हुई होती तो मैं उस घर को नहीं छोड़ता बस वही घर मेरे नाम हो पाया था।” अभिनेता ने आगे इस पर बात करते हुए बताया कि वह दोस्तों के नाम पर घरों के कॉन्ट्रैक्ट करवा कर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि “मेरे नाम पर कोई भी घर देने के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए मैं अपनी दोस्तों की मदद से उनके नाम पर कॉन्ट्रैक्ट करवा कर फिर घर में रहता हूं। यह ऐसा होता है जैसे किसी दोस्त के घर पर मैं कुछ दिन के लिए रह रहा हूं बल्कि अपने नहीं।”  घर देने के लिए साफ मना कर देते हैं लोग एक्टर ने इस पर आगे बात करते हुए बताया कि “लोग मुंह पर ही मना कर देते हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि अगर 100 घरों के ऑप्शन है तो सिर्फ 10 मेरे नाम पर होंगे। ऐसा कोई बदतमीजी नहीं करता है और यह भी नहीं कहता है कि तुम मुस्लिम हो तो हम तुम्हें घर नहीं देंगे। वह बहुत पॉलीटली कहते हैं और ब्रोकर भी कह देते हैं कि इस सोसाइटी में मुस्लिम अलाउड नहीं है। यह सुनकर बहुत बुरा लगता है लेकिन क्या कर सकते हैं।”   आसिम खान ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि क्यों नहीं दे सकते हैं यार। अभी भी इस तरीके की बातें क्यों होती है। लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि अभी भी ऐसा भी कहीं पर होगा जहां मुस्लिम सोसाइटी में हिंदुओं को घर नहीं दिया जाता होगा।”    क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर होता है भेदभाव? आसिम खान से जब सवाल किया गया कि क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर भेदभाव होता है तो इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “ऐसा मेरे साथ में कभी नहीं हुआ है। मैंने जिंदगी लोगों के साथ में काम किया है सब बहुत ही अच्छे हैं। किसी ने कभी भी पैसों की गड़बड़ी नहीं की और धर्म को लेकर तो बहुत दूर की बात है।”  अपना घर लेने की सोच रहे हैं एक्टर एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “यहां पर बिल्डिंग में पानी तक तो होता नहीं है लेकिन किराया बहुत ज्यादा होता है। यहां पर सिर्फ मुस्लिम की बात ही नहीं है बल्कि बैचलर से लेकर नॉनवेज खाते हो, एक्टर हो तो भी घर मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इंसान कितना ही झेलेगा। काम को लेकर तो कोई समस्या नहीं है लेकिन घर के लिए मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। मेरे घरवाली भी कहते हैं कि अपना घर लेने के बारे में सोचो तो मैं अब इसी की कोशिश कर रहा हूं।”

मुस्लिम होने की वजह से इस सेक्टर को मुंबई में नहीं मिल रहा घर, बोले- पानी नहीं आता पर किराया…

Aasim Khan On Struggling To Find Home: महादेव एंड संस में नजर आ चुके मशहूर अभिनेता आसिम खान 28 साल के हैं और पिछले कई सालों से मुंबई में ही रहकर काम कर रहे हैं। अभी के वक्त में उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है लेकिन एक वक्त था जब उन्होंने काफी स्ट्रगल किया था।

मुस्लिम होने की वजह से इस सेक्टर को मुंबई में नहीं मिल रहा घर, बोले- पानी नहीं आता पर किराया… Aasim Khan On Struggling To Find Home: महादेव एंड संस में नजर आ चुके मशहूर अभिनेता आसिम खान 28 साल के हैं और पिछले कई सालों से मुंबई में ही रहकर काम कर रहे हैं। अभी के वक्त में उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है लेकिन एक वक्त था जब उन्होंने काफी स्ट्रगल किया था।           आसिम खान ने काफी संघर्ष किया और इसके बावजूद भी उन्हें अभी के वक्त में किराए पर घर लेने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि मुंबई की सोसाइटीज में मुस्लिम को जल्दी से घर नहीं दिया जाता और अगर वह बैचलर एक्टर हो तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है।    मुस्लिम होने के कारण इस एक्टर को नहीं मिल रहा घर हाल ही में टेली मसाला के साथ बातचीत के दौरान आसिम खान ने अपने दर्द को बयां किया और बताया कि “मैं जब से मुंबई आया हूं पांच अलग-अलग घर बदल चुका हूं। जिसमें से सिर्फ एक लोखंडवाला घर मेरे नाम पर था। अगर मेरे दोस्त की शादी ना हुई होती तो मैं उस घर को नहीं छोड़ता बस वही घर मेरे नाम हो पाया था।” अभिनेता ने आगे इस पर बात करते हुए बताया कि वह दोस्तों के नाम पर घरों के कॉन्ट्रैक्ट करवा कर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि “मेरे नाम पर कोई भी घर देने के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए मैं अपनी दोस्तों की मदद से उनके नाम पर कॉन्ट्रैक्ट करवा कर फिर घर में रहता हूं। यह ऐसा होता है जैसे किसी दोस्त के घर पर मैं कुछ दिन के लिए रह रहा हूं बल्कि अपने नहीं।”  घर देने के लिए साफ मना कर देते हैं लोग एक्टर ने इस पर आगे बात करते हुए बताया कि “लोग मुंह पर ही मना कर देते हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि अगर 100 घरों के ऑप्शन है तो सिर्फ 10 मेरे नाम पर होंगे। ऐसा कोई बदतमीजी नहीं करता है और यह भी नहीं कहता है कि तुम मुस्लिम हो तो हम तुम्हें घर नहीं देंगे। वह बहुत पॉलीटली कहते हैं और ब्रोकर भी कह देते हैं कि इस सोसाइटी में मुस्लिम अलाउड नहीं है। यह सुनकर बहुत बुरा लगता है लेकिन क्या कर सकते हैं।”   आसिम खान ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि क्यों नहीं दे सकते हैं यार। अभी भी इस तरीके की बातें क्यों होती है। लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि अभी भी ऐसा भी कहीं पर होगा जहां मुस्लिम सोसाइटी में हिंदुओं को घर नहीं दिया जाता होगा।”    क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर होता है भेदभाव? आसिम खान से जब सवाल किया गया कि क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर भेदभाव होता है तो इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “ऐसा मेरे साथ में कभी नहीं हुआ है। मैंने जिंदगी लोगों के साथ में काम किया है सब बहुत ही अच्छे हैं। किसी ने कभी भी पैसों की गड़बड़ी नहीं की और धर्म को लेकर तो बहुत दूर की बात है।”  अपना घर लेने की सोच रहे हैं एक्टर एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “यहां पर बिल्डिंग में पानी तक तो होता नहीं है लेकिन किराया बहुत ज्यादा होता है। यहां पर सिर्फ मुस्लिम की बात ही नहीं है बल्कि बैचलर से लेकर नॉनवेज खाते हो, एक्टर हो तो भी घर मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इंसान कितना ही झेलेगा। काम को लेकर तो कोई समस्या नहीं है लेकिन घर के लिए मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। मेरे घरवाली भी कहते हैं कि अपना घर लेने के बारे में सोचो तो मैं अब इसी की कोशिश कर रहा हूं।”

आसिम खान ने काफी संघर्ष किया और इसके बावजूद भी उन्हें अभी के वक्त में किराए पर घर लेने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि मुंबई की सोसाइटीज में मुस्लिम को जल्दी से घर नहीं दिया जाता और अगर वह बैचलर एक्टर हो तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है।

मुस्लिम होने के कारण इस एक्टर को नहीं मिल रहा घर

हाल ही में टेली मसाला के साथ बातचीत के दौरान आसिम खान ने अपने दर्द को बयां किया और बताया कि “मैं जब से मुंबई आया हूं पांच अलग-अलग घर बदल चुका हूं। जिसमें से सिर्फ एक लोखंडवाला घर मेरे नाम पर था। अगर मेरे दोस्त की शादी ना हुई होती तो मैं उस घर को नहीं छोड़ता बस वही घर मेरे नाम हो पाया था।”

अभिनेता ने आगे इस पर बात करते हुए बताया कि वह दोस्तों के नाम पर घरों के कॉन्ट्रैक्ट करवा कर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि “मेरे नाम पर कोई भी घर देने के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए मैं अपनी दोस्तों की मदद से उनके नाम पर कॉन्ट्रैक्ट करवा कर फिर घर में रहता हूं। यह ऐसा होता है जैसे किसी दोस्त के घर पर मैं कुछ दिन के लिए रह रहा हूं बल्कि अपने नहीं।”

घर देने के लिए साफ मना कर देते हैं लोग

एक्टर ने इस पर आगे बात करते हुए बताया कि “लोग मुंह पर ही मना कर देते हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि अगर 100 घरों के ऑप्शन है तो सिर्फ 10 मेरे नाम पर होंगे। ऐसा कोई बदतमीजी नहीं करता है और यह भी नहीं कहता है कि तुम मुस्लिम हो तो हम तुम्हें घर नहीं देंगे। वह बहुत पॉलीटली कहते हैं और ब्रोकर भी कह देते हैं कि इस सोसाइटी में मुस्लिम अलाउड नहीं है। यह सुनकर बहुत बुरा लगता है लेकिन क्या कर सकते हैं।”

आसिम खान ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि क्यों नहीं दे सकते हैं यार। अभी भी इस तरीके की बातें क्यों होती है। लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि अभी भी ऐसा भी कहीं पर होगा जहां मुस्लिम सोसाइटी में हिंदुओं को घर नहीं दिया जाता होगा।”

क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर होता है भेदभाव?

आसिम खान से जब सवाल किया गया कि क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर भेदभाव होता है तो इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “ऐसा मेरे साथ में कभी नहीं हुआ है। मैंने जिंदगी लोगों के साथ में काम किया है सब बहुत ही अच्छे हैं। किसी ने कभी भी पैसों की गड़बड़ी नहीं की और धर्म को लेकर तो बहुत दूर की बात है।”

अपना घर लेने की सोच रहे हैं एक्टर

एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “यहां पर बिल्डिंग में पानी तक तो होता नहीं है लेकिन किराया बहुत ज्यादा होता है। यहां पर सिर्फ मुस्लिम की बात ही नहीं है बल्कि बैचलर से लेकर नॉनवेज खाते हो, एक्टर हो तो भी घर मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इंसान कितना ही झेलेगा। काम को लेकर तो कोई समस्या नहीं है लेकिन घर के लिए मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। मेरे घरवाली भी कहते हैं कि अपना घर लेने के बारे में सोचो तो मैं अब इसी की कोशिश कर रहा हूं।”

Aasim Khan On Struggling To Find Home: महादेव एंड संस में नजर आ चुके मशहूर अभिनेता आसिम खान 28 साल के हैं और पिछले कई सालों से मुंबई में ही रहकर काम कर रहे हैं। अभी के वक्त में उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है लेकिन एक वक्त था जब उन्होंने काफी स्ट्रगल किया था।

आसिम खान ने काफी संघर्ष किया और इसके बावजूद भी उन्हें अभी के वक्त में किराए पर घर लेने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि मुंबई की सोसाइटीज में मुस्लिम को जल्दी से घर नहीं दिया जाता और अगर वह बैचलर एक्टर हो तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है।

मुस्लिम होने के कारण इस एक्टर को नहीं मिल रहा घर

हाल ही में टेली मसाला के साथ बातचीत के दौरान आसिम खान ने अपने दर्द को बयां किया और बताया कि “मैं जब से मुंबई आया हूं पांच अलग-अलग घर बदल चुका हूं। जिसमें से सिर्फ एक लोखंडवाला घर मेरे नाम पर था। अगर मेरे दोस्त की शादी ना हुई होती तो मैं उस घर को नहीं छोड़ता बस वही घर मेरे नाम हो पाया था।”

अभिनेता ने आगे इस पर बात करते हुए बताया कि वह दोस्तों के नाम पर घरों के कॉन्ट्रैक्ट करवा कर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि “मेरे नाम पर कोई भी घर देने के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए मैं अपनी दोस्तों की मदद से उनके नाम पर कॉन्ट्रैक्ट करवा कर फिर घर में रहता हूं। यह ऐसा होता है जैसे किसी दोस्त के घर पर मैं कुछ दिन के लिए रह रहा हूं बल्कि अपने नहीं।”

घर देने के लिए साफ मना कर देते हैं लोग

एक्टर ने इस पर आगे बात करते हुए बताया कि “लोग मुंह पर ही मना कर देते हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि अगर 100 घरों के ऑप्शन है तो सिर्फ 10 मेरे नाम पर होंगे। ऐसा कोई बदतमीजी नहीं करता है और यह भी नहीं कहता है कि तुम मुस्लिम हो तो हम तुम्हें घर नहीं देंगे। वह बहुत पॉलीटली कहते हैं और ब्रोकर भी कह देते हैं कि इस सोसाइटी में मुस्लिम अलाउड नहीं है। यह सुनकर बहुत बुरा लगता है लेकिन क्या कर सकते हैं।”

आसिम खान ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि क्यों नहीं दे सकते हैं यार। अभी भी इस तरीके की बातें क्यों होती है। लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि अभी भी ऐसा भी कहीं पर होगा जहां मुस्लिम सोसाइटी में हिंदुओं को घर नहीं दिया जाता होगा।”

क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर होता है भेदभाव?

आसिम खान से जब सवाल किया गया कि क्या इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर भेदभाव होता है तो इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “ऐसा मेरे साथ में कभी नहीं हुआ है। मैंने जिंदगी लोगों के साथ में काम किया है सब बहुत ही अच्छे हैं। किसी ने कभी भी पैसों की गड़बड़ी नहीं की और धर्म को लेकर तो बहुत दूर की बात है।”

अपना घर लेने की सोच रहे हैं एक्टर

एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “यहां पर बिल्डिंग में पानी तक तो होता नहीं है लेकिन किराया बहुत ज्यादा होता है। यहां पर सिर्फ मुस्लिम की बात ही नहीं है बल्कि बैचलर से लेकर नॉनवेज खाते हो, एक्टर हो तो भी घर मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इंसान कितना ही झेलेगा। काम को लेकर तो कोई समस्या नहीं है लेकिन घर के लिए मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। मेरे घरवाली भी कहते हैं कि अपना घर लेने के बारे में सोचो तो मैं अब इसी की कोशिश कर रहा हूं।”

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आशुतोष राणा ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान युवाओं के मामले पर अपनी राय रखी। एक्टर की यह प्रतिक्रिया भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा नीट पेपर लीक मामले के विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने के बाद आई है। जानें क्या बोले आशुतोष…

भाषा बन सकती है अपमान का कारण
एक्टर आशुतोष राणा ने एएनआई से हुई बातचीत में कंगना के बयान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘हाथी की सवारी का सम्मान तो आपके शब्दों से ही मिलता है, और उन्हीं शब्दों से, उन्हीं बातों से जो आप कहते हैं, आप उसके पैरों तले कुचले जाने की सजा को न्योता भी देते हैं। हमारे शब्द हमारे सम्मान के प्रतीक हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे हमारे अपमान का कारण बन सकते हैं। इसलिए, हमें हर परिस्थिति में अपनी भाषा के प्रति सचेत रहना चाहिए।’

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                आशुतोष राणा ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान युवाओं के मामले पर अपनी राय रखी। एक्टर की यह प्रतिक्रिया भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा नीट पेपर लीक मामले के विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने के बाद आई है। जानें क्या बोले आशुतोष…
                                
                                 
                

                                
                
                
                                
                                
                                                                                                               
                                                    
                            
                                 
                                
                               
                                                
                                                                 
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                एक्टर आशुतोष राणा ने एएनआई से हुई बातचीत में कंगना के बयान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘हाथी की सवारी का सम्मान तो आपके शब्दों से ही मिलता है, और उन्हीं शब्दों से, उन्हीं बातों से जो आप कहते हैं, आप उसके पैरों तले कुचले जाने की सजा को न्योता भी देते हैं। हमारे शब्द हमारे सम्मान के प्रतीक हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे हमारे अपमान का कारण बन सकते हैं। इसलिए, हमें हर परिस्थिति में अपनी भाषा के प्रति सचेत रहना चाहिए।’
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इतिहास की दिशा बदल देने वाले हर निर्णायक क्षण के पीछे कई ऐसे फैसले होते हैं, जो अक्सर लोगों की नज़रों से ओझल रह जाते हैं। इन्हीं अनकहे पहलुओं को सामने लाने के लिए डिस्कवरी ने आज अपनी नई दो-भागों वाली डॉक्यूमेंट्री "डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर" की घोषणा की। यह डॉक्यूमेंट्री देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में से एक की दुर्लभ और पहली बार सामने लाई गई अंदरूनी झलक पेश करेगी। यह सीरीज़ 15 अगस्त, 2026 को खास तौर पर डिस्कवरी और डिस्कवरी+ पर दिखाई जाएगी; इसका पहला भाग रात 9 बजे और दूसरा भाग रात 10 बजे प्रसारित होगा।

यह अभूतपूर्व डॉक्यूमेंट्री भारत के सैन्य नेतृत्व, जमीनी स्तर पर अभियान में शामिल अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों को एक साथ लाती है, जो 88 घंटे तक चले संघर्ष के दौरान पर्दे के पीछे हुई घटनाओं और रणनीतिक फैसलों की विस्तृत जानकारी साझा करते हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद की परिस्थितियों से शुरू होकर यह श्रृंखला भारत की प्रतिक्रिया की पूरी कहानी प्रस्तुत करती है। इसमें शुरुआती रणनीतिक विचार-विमर्श, सैन्य तैयारियों से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की योजना, शुरुआत और और और उसे अंजाम देने तक की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से दिखाया गया है। है।

प्रत्यक्षदर्शियों और अभियान से जुड़े लोगों के अनुभवों के माध्यम से यह डॉक्यूमेंट्री भारत के वॉर रूम और फ्रंटलाइन पर तैनात अधिकारियों एवं सैनिकों की भूमिका को सामने लाती है। साथ ही, यह दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच हुए इस संघर्ष की अंदरूनी तस्वीर भी सामने लाती है। अब तक सामने आई जानकारी से आगे बढ़कर, यह डॉक्यूमेंट्री उन अहम घटनाओं और रणनीतिक फैसलों को सामने लाती है, जिनके बारे में अब तक सार्वजनिक तौर पर जानकारी नहीं दी गई थी।

साउथ एशिया, वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी — हेड ऑफ फैक्टुअल एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल & किड्स साई अभिषेक ने कहा, "वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में हमारा उद्देश्य दर्शकों तक ऐसी प्रभावशाली कहानियां पहुंचाना है, जो उन्हें अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करें। 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' हमारी नई 'डीक्लासिफाइड' फ्रेंचाइज़ की भी शुरुआत है, जिसके माध्यम से हम दर्शकों को इतिहास की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण क्षणों के और करीब लाना चाहते हैं। इस सीरीज़ की पहली डॉक्यूमेंट्री के लिए हमें भारत की तीनों सेनाओं के प्रतिनिधियों, प्रमुख रक्षा विशेषज्ञों और इस अभियान से सबसे निकटता से जुड़े लोगों के विचार और अनुभव दर्शकों तक पहुँचाने का अवसर मिला है। इस दुर्लभ जानकारी तक पहुँच मिलना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी, इसलिए हमने इस विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को गहन शोध, संवेदनशीलता और तथ्यों की सटीकता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।"

दुनिया ने आतंकवादियों के खिलाफ भारत की हवाई कार्रवाई, देश के कई शहरों में हुए ब्लैकआउट और पश्चिमी सीमा पर हुई भीषण सैन्य कार्रवाई देखी। लेकिन "डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर" उस कहानी को सामने लाती है, जो आम तौर पर पर्दे के पीछे रह जाती है। हमले की बारीकी से की गई तैयारी से लेकर ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले के तनावपूर्ण पलों और उसके बाद तेज़ी से बदले हालात तक, यह डॉक्यूमेंट्री उन घटनाओं को करीब से दिखाती है जो अब तक सामने नहीं आई थीं। यह न सिर्फ़ बताती है कि क्या हुआ, बल्कि भारत की उस जवाबी कार्रवाई के पीछे के मानवीय संकल्प को भी सामने लाती है, जिसने इतिहास की दिशा बदल दी। डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर का प्रीमियर 15 अगस्त, 2026 को रात 9 बजे से 11 बजे तक सिर्फ डिस्कवरी और डिस्कवरी+ पर होगा।

Discovery,Declassified, Operation Sindoor, Hindi news">डिस्कवरी ने ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ की घोषणा की   इतिहास की दिशा बदल देने वाले हर निर्णायक क्षण के पीछे कई ऐसे फैसले होते हैं, जो अक्सर लोगों की नज़रों से ओझल रह जाते हैं। इन्हीं अनकहे पहलुओं को सामने लाने के लिए डिस्कवरी ने आज अपनी नई दो-भागों वाली डॉक्यूमेंट्री "डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर" की घोषणा की। यह डॉक्यूमेंट्री देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में से एक की दुर्लभ और पहली बार सामने लाई गई अंदरूनी झलक पेश करेगी। यह सीरीज़ 15 अगस्त, 2026 को खास तौर पर डिस्कवरी और डिस्कवरी+ पर दिखाई जाएगी; इसका पहला भाग रात 9 बजे और दूसरा भाग रात 10 बजे प्रसारित होगा। 

यह अभूतपूर्व डॉक्यूमेंट्री भारत के सैन्य नेतृत्व, जमीनी स्तर पर अभियान में शामिल अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों को एक साथ लाती है, जो 88 घंटे तक चले संघर्ष के दौरान पर्दे के पीछे हुई घटनाओं और रणनीतिक फैसलों की विस्तृत जानकारी साझा करते हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद की परिस्थितियों से शुरू होकर यह श्रृंखला भारत की प्रतिक्रिया की पूरी कहानी प्रस्तुत करती है। इसमें शुरुआती रणनीतिक विचार-विमर्श, सैन्य तैयारियों से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की योजना, शुरुआत और और और उसे अंजाम देने तक की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से दिखाया गया है। है।

प्रत्यक्षदर्शियों और अभियान से जुड़े लोगों के अनुभवों के माध्यम से यह डॉक्यूमेंट्री भारत के वॉर रूम और फ्रंटलाइन पर तैनात अधिकारियों एवं सैनिकों की भूमिका को सामने लाती है। साथ ही, यह दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच हुए इस संघर्ष की अंदरूनी तस्वीर भी सामने लाती है। अब तक सामने आई जानकारी से आगे बढ़कर, यह डॉक्यूमेंट्री उन अहम घटनाओं और रणनीतिक फैसलों को सामने लाती है, जिनके बारे में अब तक सार्वजनिक तौर पर जानकारी नहीं दी गई थी।

साउथ एशिया, वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी — हेड ऑफ फैक्टुअल एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल & किड्स साई अभिषेक ने कहा, "वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में हमारा उद्देश्य दर्शकों तक ऐसी प्रभावशाली कहानियां पहुंचाना है, जो उन्हें अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करें। 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' हमारी नई 'डीक्लासिफाइड' फ्रेंचाइज़ की भी शुरुआत है, जिसके माध्यम से हम दर्शकों को इतिहास की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण क्षणों के और करीब लाना चाहते हैं। इस सीरीज़ की पहली डॉक्यूमेंट्री के लिए हमें भारत की तीनों सेनाओं के प्रतिनिधियों, प्रमुख रक्षा विशेषज्ञों और इस अभियान से सबसे निकटता से जुड़े लोगों के विचार और अनुभव दर्शकों तक पहुँचाने का अवसर मिला है। इस दुर्लभ जानकारी तक पहुँच मिलना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी, इसलिए हमने इस विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को गहन शोध, संवेदनशीलता और तथ्यों की सटीकता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।"

दुनिया ने आतंकवादियों के खिलाफ भारत की हवाई कार्रवाई, देश के कई शहरों में हुए ब्लैकआउट और पश्चिमी सीमा पर हुई भीषण सैन्य कार्रवाई देखी। लेकिन "डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर" उस कहानी को सामने लाती है, जो आम तौर पर पर्दे के पीछे रह जाती है। हमले की बारीकी से की गई तैयारी से लेकर ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले के तनावपूर्ण पलों और उसके बाद तेज़ी से बदले हालात तक, यह डॉक्यूमेंट्री उन घटनाओं को करीब से दिखाती है जो अब तक सामने नहीं आई थीं। यह न सिर्फ़ बताती है कि क्या हुआ, बल्कि भारत की उस जवाबी कार्रवाई के पीछे के मानवीय संकल्प को भी सामने लाती है, जिसने इतिहास की दिशा बदल दी। डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर का प्रीमियर 15 अगस्त, 2026 को रात 9 बजे से 11 बजे तक सिर्फ डिस्कवरी और डिस्कवरी+ पर होगा।Discovery,Declassified, Operation Sindoor, Hindi news

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