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मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी का सड़क हादसे में निधन   इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी (बड़वाई) का आज सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। खबरों के अनुसार, आज सुबह दरोली के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

इस सड़क हादसे को लेकर पुलिस ने बताया कि मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी गुरुवार रात हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में प्रस्तुति देने के बाद अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ कार से वापस अपने गांव बड़वाई लौट रहे थे। रास्ते में उनके बेटे और साथी किसी काम के चलते बीच में ही उतर गए थे।

बाद में दरोली के समीप सड़क हादसा हुआ। सुबह करीब 5 बजे घर लौटते वक्त् कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। इसमें धनराज जोशी का निधन हो गया। इस हादसे में कार चालक राजेंद्र सोनेरी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

PC:bhaskar
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मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी का सड़क हादसे में निधन

मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी का सड़क हादसे में निधन   इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी (बड़वाई) का आज सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। खबरों के अनुसार, आज सुबह दरोली के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

इस सड़क हादसे को लेकर पुलिस ने बताया कि मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी गुरुवार रात हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में प्रस्तुति देने के बाद अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ कार से वापस अपने गांव बड़वाई लौट रहे थे। रास्ते में उनके बेटे और साथी किसी काम के चलते बीच में ही उतर गए थे।

बाद में दरोली के समीप सड़क हादसा हुआ। सुबह करीब 5 बजे घर लौटते वक्त् कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। इसमें धनराज जोशी का निधन हो गया। इस हादसे में कार चालक राजेंद्र सोनेरी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

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इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी (बड़वाई) का आज सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। खबरों के अनुसार, आज सुबह दरोली के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

इस सड़क हादसे को लेकर पुलिस ने बताया कि मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी गुरुवार रात हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में प्रस्तुति देने के बाद अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ कार से वापस अपने गांव बड़वाई लौट रहे थे। रास्ते में उनके बेटे और साथी किसी काम के चलते बीच में ही उतर गए थे।

बाद में दरोली के समीप सड़क हादसा हुआ। सुबह करीब 5 बजे घर लौटते वक्त् कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। इसमें धनराज जोशी का निधन हो गया। इस हादसे में कार चालक राजेंद्र सोनेरी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

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इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी (बड़वाई) का आज सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। खबरों के अनुसार, आज सुबह दरोली के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

इस सड़क हादसे को लेकर पुलिस ने बताया कि मेवाड़ क्षेत्र के भजन गायक धनराज जोशी गुरुवार रात हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में प्रस्तुति देने के बाद अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ कार से वापस अपने गांव बड़वाई लौट रहे थे। रास्ते में उनके बेटे और साथी किसी काम के चलते बीच में ही उतर गए थे।

बाद में दरोली के समीप सड़क हादसा हुआ। सुबह करीब 5 बजे घर लौटते वक्त् कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। इसमें धनराज जोशी का निधन हो गया। इस हादसे में कार चालक राजेंद्र सोनेरी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

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सीहोर से सभी ट्रेनों के ठहराव की मांग: एनएसजी-1 दर्जा और धार्मिक और चारों महानगरों तक कनेक्टिविटी की मांग – Sehore News

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IPL 2026: MS Dhoni will be back soon, CSK batting coach Hussey <div id="content-body-70928600" itemprop="articleBody"><p>On the eve of Chennai Super Kings’ IPL 2026 clash against Mumbai Indians at the M. A. Chidambaram Stadium on May 2, batting coach Michael Hussey once again offered a measured update on M.S. Dhoni’s recovery from a calf injury.</p><p>Dhoni, who has been sidelined for three weeks, has travelled with the squad to Hyderabad and Mumbai after clearing a fitness test, though he is yet to feature in a match.</p><p>“M.S. is going really well. Hopefully, he’ll be back as soon as possible. I’m not sure if that will be tomorrow or the match after, but he’s progressing well,” Hussey said.</p><p><b>READ</b> | <b><a href="https://sportstar.thehindu.com/cricket/ipl/dhoni-injury-news-update-return-date-csk-vs-gt-fleming-press-conference/article70909385.ece" target="_blank">Dhoni’s return delayed after calf injury worsened, reveals Fleming</a></b></p><p>The primary concern, Hussey explained, has been Dhoni’s ability to sustain running intensity. “He’s been working on his running speeds, which was probably the main concern. From a skill perspective, we’re very confident in his batting and wicketkeeping. It was more about ensuring he can maintain good running power, especially towards the back end of an innings where quick singles and twos are crucial.”</p><p>Hussey added that the final call rests with Dhoni. “Once he feels confident in his calf, I’m sure he’ll give the signal that he’s ready to go. At the moment, we’re guided by him. We’re waiting. I think all of Chennai is waiting.”</p><p>Interestingly, Dhoni has stayed away from the venues during CSK’s match days. “He felt that if he attended, it might become a distraction… he didn’t want that to take attention away from the team,” Hussey said, while noting that the former captain remains actively involved in training and team discussions.</p><p class="publish-time" id="end-of-article">Published on May 01, 2026</p></div> #IPL #Dhoni #CSK #batting #coach #Hussey

NEET जैसी परीक्षा कराना कैसे बन गई सरकार के लिए चुनौती?
	
		
	समीरात्मज मिश्र

	NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

	 

	एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

	 

	एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

	 

	मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

	 

	राज्यों का विरोध

	नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

	 

	इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

	 

	कब बनी एनटीए?

	साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

	 

	लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

	 

	लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

	 

	कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

	जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

	 

	डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

	 

	जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

	 

	ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

	हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

	 

	शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

	 

	अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

	 

	भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

	 

	धांधली की आशंका ज्यादा

	शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

	 

	यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

	 

	ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

समीरात्मज मिश्र

NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

 

एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

 

एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

 

मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

 

राज्यों का विरोध

नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

 

इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

 

कब बनी एनटीए?

साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

 

लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

 

लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

 

कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

 

जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

 

ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

 

शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

 

अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

 

भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

 

धांधली की आशंका ज्यादा

शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

 

यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

 

ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

">NEET जैसी परीक्षा कराना कैसे बन गई सरकार के लिए चुनौती?
	
		
	समीरात्मज मिश्र

	NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

	 

	एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

	 

	एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

	 

	मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

	 

	राज्यों का विरोध

	नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

	 

	इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

	 

	कब बनी एनटीए?

	साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

	 

	लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

	 

	लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

	 

	कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

	जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

	 

	डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

	 

	जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

	 

	ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

	हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

	 

	शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

	 

	अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

	 

	भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

	 

	धांधली की आशंका ज्यादा

	शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

	 

	यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

	 

	ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

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