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सलमान खुर्शीद की दलील… 1400 साल में कई बार लूटा गया धार, हिंदू राजाओं ने ही मंदिर तोड़े

सलमान खुर्शीद की दलील… 1400 साल में कई बार लूटा गया धार, हिंदू राजाओं ने ही मंदिर तोड़े

मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि मंदिरों को पहुंचाई गई क्षति केवल …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 06:37:04 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 06:37:04 PM (IST)

HighLights

  1. वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने धार के 1400 साल के इतिहास का दिया हवाला
  2. तर्क दिया कि ऐतिहासिक आक्रमणों में मंदिरों को जीत के प्रतीक रूप में तोड़ा गया
  3. मुगल काल के निर्माण में पुराने अवशेषों के उपयोग की बात कोर्ट में रखी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार की भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई गुरुवार को भी जारी रही। इस दौरान मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि मंदिरों को पहुँचाई गई क्षति केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन थी।

इतिहास का हवाला: हिंदू राजाओं के आक्रमणों का जिक्र

सलमान खुर्शीद ने अपनी दलीलों में कहा कि पिछले 1400 वर्षों में धार पर कई बार आक्रमण हुए। उन्होंने तर्क दिया कि राजा भोज के निधन के बाद दक्षिण भारत और गुजरात के हिंदू शासकों ने भी धार पर हमले किए थे। उस दौर के युद्धों में विजेता राजा द्वारा पराजित शासक के आराध्य देव के मंदिर को नष्ट करना या उस पर अधिकार जमाना एक परंपरा थी, जिसे जीत का प्रतीक माना जाता था। खुर्शीद के अनुसार, इन घटनाओं को केवल धर्म के चश्मे से देखना उचित नहीं है।

मुगल काल और खंडहरों का उपयोग

दलीलों को आगे बढ़ाते हुए खुर्शीद ने कहा कि मुगल काल की शुरुआत तक धार एक खंडहर के समान हो चुका था। उन्होंने तर्क रखा कि उस समय जो भी निर्माण कार्य हुए, उनमें वहां पहले से मौजूद अवशेषों और पुरानी निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया था। अपनी बातों के समर्थन में उन्होंने कई ऐतिहासिक पुस्तकों और शोध पत्रों का संदर्भ भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया।

अब सोमवार को एएसआइ (ASI) रखेगा अपना पक्ष

गुरुवार को सलमान खुर्शीद की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की है। सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील कोर्ट के सामने अपनी महत्वपूर्ण दलीलें पेश करेंगे। एएसआई की दलीलें इस मामले में बेहद निर्णायक मानी जा रही हैं, क्योंकि कोर्ट उन्हीं के वैज्ञानिक सर्वे और तकनीकी तथ्यों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष की ओर बढ़ेगा।

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