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सावधान! 80s एआई फोटो ट्रेंड पड़ न जाए भारी, ओपन सोर्स में पहुंच सकती है निजी जानकारी

सावधान! 80s एआई फोटो ट्रेंड पड़ न जाए भारी, ओपन सोर्स में पहुंच सकती है निजी जानकारी

इंटरनेट मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक के अंदाज में तस्वीरें बनाने का ट्रेंड तेजी से चल रहा है। लोग अपनी सामान्य फोटो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल में डाल…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 06:05:00 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 06:17:48 PM (IST)

भारी पड़ सकता है एआई फोटो ट्रेंड। (एआई इमेज)

HighLights

  1. मौजूदा तस्वीरों को पुराने अंदाज में किया जा रहा तैयार
  2. साइबर सुरक्षा से जुड़ें पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी
  3. साइबर सुरक्षा की दृष्टि से यह ट्रेंड भारी भी पड़ सकता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक के अंदाज में तस्वीरें बनाने का ट्रेंड तेजी से चल रहा है। लोग अपनी सामान्य फोटो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल में डालकर उसमें पुराने जमाने के कपड़े, हेयरस्टाइल, रंग और कैमरा इफेक्ट जोड़ रहे हैं। कुछ सेकंड में तैयार होने वाली इन तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया किया जा रहा है। हालांकि, साइबर सुरक्षा की दृष्टि से यह ट्रेंड भारी भी पड़ सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी एआई टूल में फोटो डालने का मतलब केवल फोटो का रूप बदलना नहीं होता। फोटो एक डिजिटल जानकारी है और उसे किसी ओपन सर्वर पर भेजा जाता है। इसलिए फोटो अपलोड करने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह ओपन सोर्स फोटो के साथ क्या करती है, उसे कितने समय तक रखती है और क्या उसका उपयोग दूसरे कार्यों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

एक फोटो में आपकी कितनी जानकारी छिपी होती है

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट शुभम सोलंकी के अनुसार, अच्छी क्वालिटी की एक फोटो में केवल चेहरा ही नहीं होता। तस्वीर का बैकग्राउंड भी कई जानकारियां दे सकता है। घर के बाहर की फोटो है तो मकान नंबर या आसपास की जगह का पता चल सकता है। ऑफिस की फोटो में कंपनी का नाम, आईडी कार्ड या स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी नजर आ सकती है। गाड़ी की फोटो में नंबर प्लेट दिखाई दे सकती है। अलग-अलग जगह से मिली छोटी-छोटी जानकारियां जब एक साथ जुड़ती हैं तो किसी व्यक्ति की पहचान के बारे में काफी कुछ पता लगाया जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट दर्शना जैन के अनुसार, किसी भी एआई टूल का उपयोग करने से पहले उसकी प्राइवेसी पालिसी देखना सबसे जरूरी होता है। आम यूजर को खास तौर पर तीन बातें देखनी चाहिए। पहला अपलोड की गई फोटो डाटा में कितने समय तक स्टोर होता है।

दूसरा क्या कंपनी फोटो का उपयोग एआई को बेहतर बनाने के लिए करती है और तीसरा फोटो हटाने का विकल्प मिलता है या नहीं। हर एआई टूल की पॉलिसी अलग हो सकती है। ऐसे में सिर्फ यह देखकर किसी टूल पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि वह सोशल मीडिया पर वायरल है या दूसरे लोग उसका उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही यदि टूल जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगे तो उससे सावधान रहना बेहतर है।

हो सकते हैं ये नुकसान

  • निजी फोटो किसी ओपन सोर्स तक पहुंचने के बाद यूजर का उस पर पूरा नियंत्रण नहीं रह सकता। अगर फोटो के साथ दूसरी व्यक्तिगत जानकारी भी जुड़ी है तो खतरा और बढ़ सकता है।
  • इंटरनेट पर उपलब्ध तस्वीरों और दूसरी सार्वजनिक जानकारियों को जोड़कर किसी व्यक्ति के नाम से नकली प्रोफाइल बनाई जा सकती है। एआई के बढ़ते उपयोग के साथ तस्वीरों और वीडियो में बदलाव करना भी आसान हुआ है।
  • यूजर ने किसी तस्वीर को केवल 80s लुक देने के लिए अपलोड किया हो, लेकिन उसे यह जरूर समझना चाहिए कि ऑनलाइन सेवा की शर्तों के अनुसार उस सामग्री को किस तरह संभाला जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • एआई टूल में फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी जरूर देखें
  • यह देखें कि कंपनी आपकी फोटो को एआई मॉडल की ट्रेनिंग के लिए उपयोग करती है या नहीं
  • ऐसी फोटो अपलोड न करें जिसमें घर का पता या कोई निजी दस्तावेज दिखाई दे रहा हो
  • फोटो के बैकग्राउंड को देखकर अनावश्यक जानकारी को क्राप या ब्लर कर दें
  • किसी भी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन न दें।
  • केवल वायरल होने के कारण किसी अनजान एआई एप को फोन में इंस्टाल न करें

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