सिनेजीवन: रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ विवाद पर प्रोड्यूसर्स गिल्ड सख्त और पियानो पर हाथ आजमा रहे हैं कुणाल खेमूफिल्म निर्माताओं के संगठन ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने एक्टर रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन-3’ और उससे जुड़े विवाद को देखते हुए बुधवार को नया बयान जारी किया है।
शिबाशीष सरकार के नेतृत्व वाले इस संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने कलाकारों के ऐसे गैर जिम्मेदाराना बर्ताव की आलोचना की। इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ता है।
उन्होंने लिखा, “हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कलाकार, निर्देशक और तकनीशियन अपनी तय प्रतिबद्धताओं से आखिरी समय पर पीछे हट रहे हैं। प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को अपने सदस्य एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड से भी इस संबंध में औपचारिक शिकायतें मिली हैं। ये समस्याएं फिल्मों की मुख्य शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले सामने आईं।”
उन्होंने आगे लिखा, “फिल्म इंडस्ट्री के किसी भी सदस्य को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होता है और इंडस्ट्री के अन्य क्षेत्रों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस तरह के कदम भरोसे, पेशेवर व्यवहार और आपसी सम्मान की उस भावना को कमजोर करते हैं, जिस पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री आधारित है।”
Ranveer singh,Hindi Cinema,Bollywood Actor
फिल्म निर्माताओं के संगठन ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने एक्टर रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन-3’ और उससे जुड़े विवाद को देखते हुए बुधवार को नया बयान जारी किया है।
शिबाशीष सरकार के नेतृत्व वाले इस संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने कलाकारों के ऐसे गैर जिम्मेदाराना बर्ताव की आलोचना की। इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ता है।
उन्होंने लिखा, “हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कलाकार, निर्देशक और तकनीशियन अपनी तय प्रतिबद्धताओं से आखिरी समय पर पीछे हट रहे हैं। प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को अपने सदस्य एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड से भी इस संबंध में औपचारिक शिकायतें मिली हैं। ये समस्याएं फिल्मों की मुख्य शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले सामने आईं।”
उन्होंने आगे लिखा, “फिल्म इंडस्ट्री के किसी भी सदस्य को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होता है और इंडस्ट्री के अन्य क्षेत्रों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस तरह के कदम भरोसे, पेशेवर व्यवहार और आपसी सम्मान की उस भावना को कमजोर करते हैं, जिस पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री आधारित है।”


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