सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी को कड़ी फटकार लगाई। …और पढ़ें
HighLights
- मीडिया रिपोर्ट सही तो हलफनामा झूठा, एएसजी एसवी राजू से मांगा जवाब
- मुख्य सचिव हर दो माह में करेंगे समीक्षा, एक साल में वन रक्षक भर्ती के निर्देश
- बिना नंबर प्लेट वाले डंपर-एक्सकेवेटर होंगे जब्त, मालिक पर दर्ज होगा केस
नईदुनिया प्रतिनिधि, नई दिल्ली/आगरा/ भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेत के अवैध परिवहन के लिए बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नंबर वाले वाहनों के इस्तेमाल से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया। पीठ ने मध्य प्रदेश की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू से इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
पीठ ने कहा, अगर यह सही है तो आपके अधिकारियों ने कोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल किया है। अगर यह तथ्य सही है तो यह हैरान करने वाला है और गंभीर कार्रवाई होनी चाहिए। राजू ने कहा कि कोर्ट इसके लिए मानीटरिंग कमेटी बनवाए। कोर्ट ने कहा कि तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों को हर दो माह में इसकी समीक्षा बैठक कर कोर्ट को रिपोर्ट देनी होगी। अगली सुनवाई से पूर्व शपथ पत्र दाखिल कर उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देनी होगी।
22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने वाद में जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को प्रतिवादी बनाने का भी आदेश किया। मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। न्यायालय ने इन राज्यों को छह माह में प्रभावित क्षेत्रों में सर्विलांस और मानिटरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना व इनका संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अवैध खनन गतिविधियों में शामिल वाहनों व मशीनरी को जब्त करने और इनसे जुड़े लोगों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने और एक वर्ष में वन रक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चंबल नदी किनारे स्थित 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला अभयारण्य लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल-मुकुट वाले कछुए और गंगा डाल्फिन के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। सुप्रीम कोर्ट पिछले तीन माह से चंबल में रेत खनन को लेकर सुनवाई में कड़े निर्देश जारी कर रहा है, इसके बावजूद खनन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा है। कोर्ट ने ऐसी खबरों पर ही संज्ञान लिया है।
कोर्ट ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की
- खनन में शामिल ट्रैक्टर, ट्राली, एक्सकेवेटर, ड्रेजर, डंपर, लोडर और दूसरी मशीनरी सहित सभी गाड़ियों को जब्त किया जाए।
- बिना पंजीकरण, नकली नंबर प्लेट या नंबर प्लेट से छेड़छाड़ कर चलाए जा रहे वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
- अवैध खनन में शामिल वाहनों के चालकों के साथ ही उनके मालिकों, फाइनेंसर, आपरेटर, कांट्रेक्टर और संलिप्त अन्य सभी व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
- राज्य यह सुनिश्चित करें कि अवैध खनन और परिवहन से जुड़े सभी मुकदमों और आपराधिक कार्रवाई की असरदार जांच हो, जिससे कि खनन करने वालों के नेटवर्क और उससे लाभ उठाने वालों की पहचान हो सके।
- अधिकारियों को कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड रखना होगा, जिससे कि अवैध खनन में संलिप्त लोगों की निगरानी कर प्रभावी मुकदमा चलाया जा सके।
#सपरम #करट #क #फटकर #चबल #म #अवध #रत #खनन #पर #मडय #रपरट #सह #त #हलफनम #झठ #गभर #कररवई #हन #चहए



Post Comment