नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर स्वच्छता की एक और कसौटी पर खुद को परखने की तैयारी में जुटा है। देशभर के शहरों के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण आरंभ हो चुका है। लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका इंदौर नौंवी बार इस कसौटी पर खुद को साबित करने के लिए तैयार है। बीते एक साल में हमने कई नवाचार किए हैं। इस बार इंदौर के लिए चुनौती कुछ अलग इसलिए भी है क्योंकि हमें खुद को सिरमौर साबित करने के साथ-साथ देपालपुर को भी स्वच्छ बनाना है।
नईदुनिया के साप्ताहिक आयोजन विमर्श में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने स्वच्छता को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इंदौर इस बार भी स्वच्छता सर्वेक्षण में नवाचार करने जा रहा है। इसके अंतर्गत नारियल के खोल काे प्रोसेस किया जाएगा। इसके लिए टेंडर भी जारी किए हैं। कचरे के निष्पादन के दौरान नारियल के खोल आसानी से प्रोसेस नहीं हो पा रहे थे। पहले इसके लिए प्रयास भी किए गए, लेकिन कठोरता के कारण बार-बार इसमें दिक्कत आ रही थी।
इंदौर में रोजाना 1200 टन से ज्यादा कचरा निकलता है, उसमें 50 से 60 टन नारियल के खोल होते हैं। ऐसे में इन खोल को प्रोसे करने के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किए हैं। इसके अंतर्गत पीपीपी मोड पर ट्रेचिंग ग्राउंड में एजेंसी को जगह दी जाएगी, जहां इसे प्रोसेस किया जाएगा। सिंघल ने कहा कि नगर निगम पीपीपी मोड पर 25 पब्लिक टायलेट का भी निर्माण करने जा रहा है। जनता पे एंड यूज मोड में इसका उपयोग कर सकेगी। साथ ही जो भी एजेंसी इसे संभालेगी उसे विज्ञापन के अधिकार होंगे। साथ ही वह छोटा कियोस्क भी खोल सकेगी।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि स्वच्छता लीग में आने वाले शहरों को एक-एक निकाय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इंदौर नगर निगम को देपालपुर की जिम्मेदारी मिली है।हमारे सामने एक यह भी चुनौती कि हमें इंदौर की रेंकिंग को तो बनाए रखना है साथ ही देपालपुर को भी स्वच्छ बनाए रखना है, क्योंकि इस बार ओवरआल रैंकिंग इस पर निर्भर करेगी कि देपालपुर की रैंकिंग कितनी अच्छी होती है। ऐसे में शहर के साथ देपालपुर में भी हमारी टीम काम कर रही है। जहां वहां की जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद किया जाता है। वहां 1250 मीट्रिक टन का ट्रेचिंग ग्राउंड था, उसे प्रोसेस किया है और इस कार्य को केंद्रीय टीम की भी सराहना मिली है।
होस्टल संचालाकों को दी गई समझाइश
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, स्वच्छता सर्वेक्षण में किसी निकाय का प्रदर्शन वहां की जनता पर निर्भर करता है। इंदौर की यह विशेषता है कि यहां जन भागीदारी की भावना है। हालांकि, इंदौर में बड़ी संख्या में अन्य शहरों से लोग पढ़ाई और अन्य कार्यों के लिए आते हैं, तो उन्हें भी हम जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए होस्टल संचालकों के साथ संवाद किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने बैठक भी है। साथ ही हमारी टीम लगातार क्षेत्र में जा रही है। समझाईश देने के साथ हम लापरवाही बरतने पर चालानी कार्रवाई भी करेंगे। इसके साथ ऐसे क्षेत्र जहां बाहर से आकर रहने वालों की संख्या अधिक है, वहां भी समझाईश दी जा रही है।
इस बार स्कूलों पर भी फोकस
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि सर्वेक्षण में जिसके हिसाब से अंक निर्धारित होते हैं।उसमें कुछ चीजों का वेटेज बढ़ाया गया है। इसमें विजिबल क्लिनलीनेस एक बिंदु है। इसके अंतर्गत स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहर है। इसमें छात्राओं के लिए पृथक शौचालय, इनकी साफ-सफाई और डस्टबिन की व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। चूंकि इस माह टीम कभी भी आ सकती है, लिहाजा नगर निगम तैयारियां कर रहा है।
एक चुनौती यह भी
निमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, इन दिनों शहर में मास्टर प्लान की सड़कों, फ्लाईओवर का निर्माण और सीवरेज सहित कई अन्य कार्य चल रहे हैं। ऐसे में सर्वेक्षण के दौरान यह भी एक चुनौती है। पीएनजी कनेक्शन की मांग पहले से पांच गुना अधिक हो चुकी है। इसके लिए जगह-जगह खुदाई की गई है। ऐसे में हमारा प्रयास यह है कि इन क्षेत्रों में समय पर सुधार कार्य कर सके, ताकि लोगों को कम से कम दिक्कत हो। उन्होंने बताया कि सिटीजन फीडबैक के लिए हमारी टीमें और एनजीओ लगे हैं। इस क्षेत्र में इंदौर की स्थिति प्रदेशके अन्य राज्यों से काफी बेहतर हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम सड़कों के लिए लगभग 1300 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से काम करवा रहा है। कुछ शहरों ने खुद मशीनें खरीदी है, जिनकी कीमत करीब 2.5 से 3.5 करोड़ रुपये होती है और फिर उनका संचालन अलग से करवाते हैं। नई मशीनों पर खर्च बढ़ने से दरें दो से तीन हजार रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकती है। जबिक, ऐसे में निगम ने संतुलित और किफायती व्यवस्था चुनी है। इंदौर में मशीनें एजेंसी की होती हैं और निगम केवल प्रति किलोमीटर भुगतान करता है। इसके साथ ही निगम ने यह शर्त रखी है कि कोई भी मशीन 8 साल से पुरानी नहीं होनी चाहिए।
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