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स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला
	
		
			
	
	
	Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

	निजी आवास 'कोठा' नहीं

	जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

	व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

	कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

	 

	अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

	मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

	इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

	 

	कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

	 

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	 

	भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

	Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला

स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला
	
		
			
	
	
	Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

	निजी आवास 'कोठा' नहीं

	जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

	व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

	कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

	 

	अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

	मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

	इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

	 

	कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

	 

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	 

	भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

	Edited by: Vrijendra Singh Jhala 


Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

निजी आवास 'कोठा' नहीं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

 

अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

 

कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

 

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

 

भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

निजी आवास 'कोठा' नहीं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

 

अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

 

कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

 

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

 

भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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Argentina vs England, Argentina FIFA World Cup Final, Lionel Messi News, Argentina vs Spain Final, FIFA World Cup 2026, Lautaro Martinez Goal, Enzo Fernandez Goal, England vs Argentina, FIFA Final News, Spain vs Argentina, मेसी का जादू, फीफा वर्ल्ड कप 2026, अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में">मेसी का जादू फिर चला! अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, लगातार दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा
								

		
		
		
		
				


					
							
																								
											
								
								
																			
																	
																	
																लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। इंग्लैंड ने दूसरे हाफ में गॉर्डन के गोल की मदद से बढ़त ली थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 7 मिनट में 2 गोल कर मैच अपने नाम कर लिया। फाइनल में अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन से होगा। ALSO READ: फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम																								
																														
																																			
	 
	खेल के 55वें मिनट में इंग्लैंड के मोर्गन रोजर्स ने एक जादुई पास निकाला, इस पर एंथनी गॉर्डन ने शानदार फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड फाइनल में जगह बना लेगी। 									
	 
	85वें मिनट में मेसी ने डिफेंडर्स को छकाते हुए एंजो फर्नांडेज को पास दिया। फर्नांडेज ने बॉक्स के बाहर से जबरदस्त शॉट मारकर स्कोर 1-1 कर दिया। इंजरी टाइम में मेसी ने पास पर लाउतारो मार्टिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल में तब्दील कर दिया। इस तरह मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना एक बार फिर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा। ALSO READ: स्पेन ने 2 गोल दागकर फ्रांस को तीसरी बार विश्वकप फाइनल में जाने से रोका																									
																
																
																														
																														
																																			
	 
	अब रविवार को न्यू जर्सी में अर्जेंटीना की खिताबी भिड़ंत स्पेन से होगी। अर्जेंटीना ने अब तक 3 बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता है। उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत 1978, 1986 और 2022 में हासिल की थी। वहीं स्पेन ने अब तक एक बार (2010 में) फीफा वर्ल्ड कप जीता है।																								
																														
																																																		
																																																																		
																																	
																																														
																															
																																																														

								
															
						
	
							
				
						Argentina vs England, Argentina FIFA World Cup Final, Lionel Messi News, Argentina vs Spain Final, FIFA World Cup 2026, Lautaro Martinez Goal, Enzo Fernandez Goal, England vs Argentina, FIFA Final News, Spain vs Argentina, मेसी का जादू, फीफा वर्ल्ड कप 2026, अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में

फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम

 

खेल के 55वें मिनट में इंग्लैंड के मोर्गन रोजर्स ने एक जादुई पास निकाला, इस पर एंथनी गॉर्डन ने शानदार फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड फाइनल में जगह बना लेगी। 

 

85वें मिनट में मेसी ने डिफेंडर्स को छकाते हुए एंजो फर्नांडेज को पास दिया। फर्नांडेज ने बॉक्स के बाहर से जबरदस्त शॉट मारकर स्कोर 1-1 कर दिया। इंजरी टाइम में मेसी ने पास पर लाउतारो मार्टिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल में तब्दील कर दिया। इस तरह मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना एक बार फिर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा। ALSO READ: स्पेन ने 2 गोल दागकर फ्रांस को तीसरी बार विश्वकप फाइनल में जाने से रोका

 

अब रविवार को न्यू जर्सी में अर्जेंटीना की खिताबी भिड़ंत स्पेन से होगी। अर्जेंटीना ने अब तक 3 बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता है। उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत 1978, 1986 और 2022 में हासिल की थी। वहीं स्पेन ने अब तक एक बार (2010 में) फीफा वर्ल्ड कप जीता है।

Argentina vs England, Argentina FIFA World Cup Final, Lionel Messi News, Argentina vs Spain Final, FIFA World Cup 2026, Lautaro Martinez Goal, Enzo Fernandez Goal, England vs Argentina, FIFA Final News, Spain vs Argentina, मेसी का जादू, फीफा वर्ल्ड कप 2026, अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में">मेसी का जादू फिर चला! अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, लगातार दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा
मेसी का जादू फिर चला! अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया, लगातार दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा
								

		
		
		
		
				


					
							
																								
											
								
								
																			
																	
																	
																लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। इंग्लैंड ने दूसरे हाफ में गॉर्डन के गोल की मदद से बढ़त ली थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 7 मिनट में 2 गोल कर मैच अपने नाम कर लिया। फाइनल में अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन से होगा। ALSO READ: फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम																								
																														
																																			
	 
	खेल के 55वें मिनट में इंग्लैंड के मोर्गन रोजर्स ने एक जादुई पास निकाला, इस पर एंथनी गॉर्डन ने शानदार फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड फाइनल में जगह बना लेगी। 									
	 
	85वें मिनट में मेसी ने डिफेंडर्स को छकाते हुए एंजो फर्नांडेज को पास दिया। फर्नांडेज ने बॉक्स के बाहर से जबरदस्त शॉट मारकर स्कोर 1-1 कर दिया। इंजरी टाइम में मेसी ने पास पर लाउतारो मार्टिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल में तब्दील कर दिया। इस तरह मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना एक बार फिर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा। ALSO READ: स्पेन ने 2 गोल दागकर फ्रांस को तीसरी बार विश्वकप फाइनल में जाने से रोका																									
																
																
																														
																														
																																			
	 
	अब रविवार को न्यू जर्सी में अर्जेंटीना की खिताबी भिड़ंत स्पेन से होगी। अर्जेंटीना ने अब तक 3 बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता है। उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत 1978, 1986 और 2022 में हासिल की थी। वहीं स्पेन ने अब तक एक बार (2010 में) फीफा वर्ल्ड कप जीता है।																								
																														
																																																		
																																																																		
																																	
																																														
																															
																																																														

								
															
						
	
							
				
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लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। इंग्लैंड ने दूसरे हाफ में गॉर्डन के गोल की मदद से बढ़त ली थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 7 मिनट में 2 गोल कर मैच अपने नाम कर लिया। फाइनल में अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन से होगा। ALSO READ: फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम

 

खेल के 55वें मिनट में इंग्लैंड के मोर्गन रोजर्स ने एक जादुई पास निकाला, इस पर एंथनी गॉर्डन ने शानदार फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड फाइनल में जगह बना लेगी। 

 

85वें मिनट में मेसी ने डिफेंडर्स को छकाते हुए एंजो फर्नांडेज को पास दिया। फर्नांडेज ने बॉक्स के बाहर से जबरदस्त शॉट मारकर स्कोर 1-1 कर दिया। इंजरी टाइम में मेसी ने पास पर लाउतारो मार्टिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल में तब्दील कर दिया। इस तरह मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना एक बार फिर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा। ALSO READ: स्पेन ने 2 गोल दागकर फ्रांस को तीसरी बार विश्वकप फाइनल में जाने से रोका

 

अब रविवार को न्यू जर्सी में अर्जेंटीना की खिताबी भिड़ंत स्पेन से होगी। अर्जेंटीना ने अब तक 3 बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता है। उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत 1978, 1986 और 2022 में हासिल की थी। वहीं स्पेन ने अब तक एक बार (2010 में) फीफा वर्ल्ड कप जीता है।

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