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स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला
	
		
			
	
	
	Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

	निजी आवास 'कोठा' नहीं

	जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

	व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

	कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

	 

	अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

	मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

	इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

	 

	कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

	 

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	 

	भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

	Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला

स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला
	
		
			
	
	
	Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

	निजी आवास 'कोठा' नहीं

	जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

	व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

	कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

	 

	अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

	मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

	इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

	 

	कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

	 

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

	यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

	 

	भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

	Edited by: Vrijendra Singh Jhala 


Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

निजी आवास 'कोठा' नहीं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

 

अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

 

कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

 

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

 

भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

निजी आवास 'कोठा' नहीं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।

व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य

कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।

 

अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश

इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।

 

कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।

 

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?

यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।

 

भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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देशभर के लाखों लोगों का सपना होता है कि वे एक दिन टेलीविज़न पर नज़र आएं। अब यह सपना सच होने के एक कदम और करीब आ सकता है, क्योंकि अभिनेता Anil Kapoor द्वारा होस्ट किए जाने वाले आगामी रियलिटी शो 'इंडिया के टॉप 1%' के लिए रजिस्ट्रेशन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुके हैं।

यह शो उन लोगों की तलाश में है जो मानते हैं कि उनके पास ऐसी बुद्धिमत्ता, समझदारी और तेज़ सोच है, जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकती है। अन्य टैलेंट-आधारित प्रतियोगिताओं से अलग, 'इंडिया के टॉप 1%' में प्रतिभागियों की परख ऐसे सवालों और चुनौतियों के माध्यम से की जाएगी, जो तर्कशक्ति, अवलोकन क्षमता, सामान्य ज्ञान, समझदारी और तुरंत निर्णय लेने की योग्यता को परखेंगी।

जीवन के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए खुला यह शो आम भारतीयों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और सोच का प्रदर्शन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। चाहे आप छात्र हों, नौकरीपेशा पेशेवर, गृहिणी, उद्यमी या फिर कोई ऐसे व्यक्ति जो समस्याओं को हल करने और दिमागी चुनौतियों का आनंद लेते हों, यह आपके लिए देश के सबसे तेज़ और होशियार दिमागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक प्रतिभागी निम्नलिखित तरीकों से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

* आधिकारिक रजिस्ट्रेशन क्रिएटिव में दिए गए QR कोड को स्कैन करें।
* रजिस्ट्रेशन पेज पर जाएँ: https://starplus.jiostar.com/indiaketoponepercent/
* आवश्यक जानकारी भरकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
* अपना आवेदन जमा करें।

रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं, ऐसे में इच्छुक प्रतिभागी इस शो का हिस्सा बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो बुद्धिमत्ता, तेज़ सोच और रोज़मर्रा की समझदारी का जश्न मनाता है।

अगर आपने कभी सोचा है कि क्या आप भारत के सबसे तेज़ और होशियार लोगों में शामिल हो सकते हैं, तो खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका आपके लिए हो सकता है। 'इंडिया के टॉप 1%' जल्द ही स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।

dream,TV could, Register,Anil Kapoor, Hindi news">टीवी पर आने का सपना हो सकता है सच: Anil Kapoor के नए रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ के लिए अभी करें रजिस्ट्रेशन   देशभर के लाखों लोगों का सपना होता है कि वे एक दिन टेलीविज़न पर नज़र आएं। अब यह सपना सच होने के एक कदम और करीब आ सकता है, क्योंकि अभिनेता Anil Kapoor द्वारा होस्ट किए जाने वाले आगामी रियलिटी शो 'इंडिया के टॉप 1%' के लिए रजिस्ट्रेशन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुके हैं।

यह शो उन लोगों की तलाश में है जो मानते हैं कि उनके पास ऐसी बुद्धिमत्ता, समझदारी और तेज़ सोच है, जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकती है। अन्य टैलेंट-आधारित प्रतियोगिताओं से अलग, 'इंडिया के टॉप 1%' में प्रतिभागियों की परख ऐसे सवालों और चुनौतियों के माध्यम से की जाएगी, जो तर्कशक्ति, अवलोकन क्षमता, सामान्य ज्ञान, समझदारी और तुरंत निर्णय लेने की योग्यता को परखेंगी।

जीवन के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए खुला यह शो आम भारतीयों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और सोच का प्रदर्शन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। चाहे आप छात्र हों, नौकरीपेशा पेशेवर, गृहिणी, उद्यमी या फिर कोई ऐसे व्यक्ति जो समस्याओं को हल करने और दिमागी चुनौतियों का आनंद लेते हों, यह आपके लिए देश के सबसे तेज़ और होशियार दिमागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक प्रतिभागी निम्नलिखित तरीकों से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

* आधिकारिक रजिस्ट्रेशन क्रिएटिव में दिए गए QR कोड को स्कैन करें।
* रजिस्ट्रेशन पेज पर जाएँ: https://starplus.jiostar.com/indiaketoponepercent/
* आवश्यक जानकारी भरकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
* अपना आवेदन जमा करें।

रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं, ऐसे में इच्छुक प्रतिभागी इस शो का हिस्सा बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो बुद्धिमत्ता, तेज़ सोच और रोज़मर्रा की समझदारी का जश्न मनाता है।

अगर आपने कभी सोचा है कि क्या आप भारत के सबसे तेज़ और होशियार लोगों में शामिल हो सकते हैं, तो खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका आपके लिए हो सकता है। 'इंडिया के टॉप 1%' जल्द ही स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।

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dream,TV could, Register,Anil Kapoor, Hindi news">टीवी पर आने का सपना हो सकता है सच: Anil Kapoor के नए रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ के लिए अभी करें रजिस्ट्रेशन

टीवी पर आने का सपना हो सकता है सच: Anil Kapoor के नए रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ के लिए अभी करें रजिस्ट्रेशन   देशभर के लाखों लोगों का सपना होता है कि वे एक दिन टेलीविज़न पर नज़र आएं। अब यह सपना सच होने के एक कदम और करीब आ सकता है, क्योंकि अभिनेता Anil Kapoor द्वारा होस्ट किए जाने वाले आगामी रियलिटी शो 'इंडिया के टॉप 1%' के लिए रजिस्ट्रेशन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुके हैं।

यह शो उन लोगों की तलाश में है जो मानते हैं कि उनके पास ऐसी बुद्धिमत्ता, समझदारी और तेज़ सोच है, जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकती है। अन्य टैलेंट-आधारित प्रतियोगिताओं से अलग, 'इंडिया के टॉप 1%' में प्रतिभागियों की परख ऐसे सवालों और चुनौतियों के माध्यम से की जाएगी, जो तर्कशक्ति, अवलोकन क्षमता, सामान्य ज्ञान, समझदारी और तुरंत निर्णय लेने की योग्यता को परखेंगी।

जीवन के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए खुला यह शो आम भारतीयों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और सोच का प्रदर्शन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। चाहे आप छात्र हों, नौकरीपेशा पेशेवर, गृहिणी, उद्यमी या फिर कोई ऐसे व्यक्ति जो समस्याओं को हल करने और दिमागी चुनौतियों का आनंद लेते हों, यह आपके लिए देश के सबसे तेज़ और होशियार दिमागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक प्रतिभागी निम्नलिखित तरीकों से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

* आधिकारिक रजिस्ट्रेशन क्रिएटिव में दिए गए QR कोड को स्कैन करें।
* रजिस्ट्रेशन पेज पर जाएँ: https://starplus.jiostar.com/indiaketoponepercent/
* आवश्यक जानकारी भरकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
* अपना आवेदन जमा करें।

रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं, ऐसे में इच्छुक प्रतिभागी इस शो का हिस्सा बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो बुद्धिमत्ता, तेज़ सोच और रोज़मर्रा की समझदारी का जश्न मनाता है।

अगर आपने कभी सोचा है कि क्या आप भारत के सबसे तेज़ और होशियार लोगों में शामिल हो सकते हैं, तो खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका आपके लिए हो सकता है। 'इंडिया के टॉप 1%' जल्द ही स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।

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देशभर के लाखों लोगों का सपना होता है कि वे एक दिन टेलीविज़न पर नज़र आएं। अब यह सपना सच होने के एक कदम और करीब आ सकता है, क्योंकि अभिनेता Anil Kapoor द्वारा होस्ट किए जाने वाले आगामी रियलिटी शो 'इंडिया के टॉप 1%' के लिए रजिस्ट्रेशन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुके हैं।

यह शो उन लोगों की तलाश में है जो मानते हैं कि उनके पास ऐसी बुद्धिमत्ता, समझदारी और तेज़ सोच है, जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकती है। अन्य टैलेंट-आधारित प्रतियोगिताओं से अलग, 'इंडिया के टॉप 1%' में प्रतिभागियों की परख ऐसे सवालों और चुनौतियों के माध्यम से की जाएगी, जो तर्कशक्ति, अवलोकन क्षमता, सामान्य ज्ञान, समझदारी और तुरंत निर्णय लेने की योग्यता को परखेंगी।

जीवन के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए खुला यह शो आम भारतीयों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और सोच का प्रदर्शन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। चाहे आप छात्र हों, नौकरीपेशा पेशेवर, गृहिणी, उद्यमी या फिर कोई ऐसे व्यक्ति जो समस्याओं को हल करने और दिमागी चुनौतियों का आनंद लेते हों, यह आपके लिए देश के सबसे तेज़ और होशियार दिमागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक प्रतिभागी निम्नलिखित तरीकों से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

* आधिकारिक रजिस्ट्रेशन क्रिएटिव में दिए गए QR कोड को स्कैन करें।
* रजिस्ट्रेशन पेज पर जाएँ: https://starplus.jiostar.com/indiaketoponepercent/
* आवश्यक जानकारी भरकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
* अपना आवेदन जमा करें।

रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं, ऐसे में इच्छुक प्रतिभागी इस शो का हिस्सा बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो बुद्धिमत्ता, तेज़ सोच और रोज़मर्रा की समझदारी का जश्न मनाता है।

अगर आपने कभी सोचा है कि क्या आप भारत के सबसे तेज़ और होशियार लोगों में शामिल हो सकते हैं, तो खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका आपके लिए हो सकता है। 'इंडिया के टॉप 1%' जल्द ही स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।

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योग दिवस : परिषदीय विद्यालयों में गूंजा 'स्वस्थ जीवन' का मंत्र, 1.42 करोड़ बच्चों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
	
		
			
	
	– एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार बोले- योग बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलित व्यक्तित्व का सशक्त माध्यम

	– 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

	– लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक योगाभ्यास में की सहभागिता

	International Yoga Day : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनभागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए योग को जनआंदोलन बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक उत्तर प्रदेश का संदेश दिया।
	
	गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर नजर आए, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, अधिकारियों और अभिभावकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन, जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।
	
		ALSO READ: पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं : योगी आदित्यनाथ
	इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

	 

	राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

	
		
			
	


	इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

	योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

	
		ALSO READ: पहचान का संकट खड़ा करने वालों को अब दुत्कारती है जनता : योगी आदित्यनाथ


	प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

	
		ALSO READ: योगी सरकार का ‘ऑपरेशन क्लीन मेडिसिन’: आगरा में 3.63 करोड़ की नकली और एक्सपायर्ड दवाएं जब्त, 8 अवैध गोदाम सील


	गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी समान रूप से आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालयों में योग, खेलकूद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुई अभूतपूर्व सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में योग अब केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का जनअभियान बन चुका है।
	Edited By : Chetan Gour 

– एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार बोले- योग बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलित व्यक्तित्व का सशक्त माध्यम

– 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

– लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक योगाभ्यास में की सहभागिता

International Yoga Day : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनभागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए योग को जनआंदोलन बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक उत्तर प्रदेश का संदेश दिया।

गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर नजर आए, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, अधिकारियों और अभिभावकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन, जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।

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इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

Uttar Pradesh set a new record for public participation on International Yoga Day

इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

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प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी समान रूप से आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालयों में योग, खेलकूद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुई अभूतपूर्व सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में योग अब केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का जनअभियान बन चुका है।
Edited By : Chetan Gour 

">योग दिवस : परिषदीय विद्यालयों में गूंजा 'स्वस्थ जीवन' का मंत्र, 1.42 करोड़ बच्चों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
	
		
			
	
	– एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार बोले- योग बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलित व्यक्तित्व का सशक्त माध्यम

	– 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

	– लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक योगाभ्यास में की सहभागिता

	International Yoga Day : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनभागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए योग को जनआंदोलन बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक उत्तर प्रदेश का संदेश दिया।
	
	गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर नजर आए, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, अधिकारियों और अभिभावकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन, जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।
	
		ALSO READ: पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं : योगी आदित्यनाथ
	इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

	 

	राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

	
		
			
	


	इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

	योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

	
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	प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

	
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	गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी समान रूप से आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालयों में योग, खेलकूद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुई अभूतपूर्व सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में योग अब केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का जनअभियान बन चुका है।
	Edited By : Chetan Gour 

पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं : योगी आदित्यनाथ

इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

Uttar Pradesh set a new record for public participation on International Yoga Day

इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

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प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी समान रूप से आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालयों में योग, खेलकूद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुई अभूतपूर्व सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में योग अब केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का जनअभियान बन चुका है।
Edited By : Chetan Gour 

">योग दिवस : परिषदीय विद्यालयों में गूंजा 'स्वस्थ जीवन' का मंत्र, 1.42 करोड़ बच्चों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

योग दिवस : परिषदीय विद्यालयों में गूंजा 'स्वस्थ जीवन' का मंत्र, 1.42 करोड़ बच्चों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
	
		
			
	
	– एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार बोले- योग बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलित व्यक्तित्व का सशक्त माध्यम

	– 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

	– लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक योगाभ्यास में की सहभागिता

	International Yoga Day : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनभागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए योग को जनआंदोलन बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक उत्तर प्रदेश का संदेश दिया।
	
	गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर नजर आए, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, अधिकारियों और अभिभावकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन, जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।
	
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	इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

	 

	राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

	
		
			
	


	इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

	योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

	
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	प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

	
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	गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी समान रूप से आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालयों में योग, खेलकूद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुई अभूतपूर्व सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में योग अब केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का जनअभियान बन चुका है।
	Edited By : Chetan Gour 

– एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार बोले- योग बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलित व्यक्तित्व का सशक्त माध्यम

– 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

– लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक योगाभ्यास में की सहभागिता

International Yoga Day : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनभागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए योग को जनआंदोलन बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक उत्तर प्रदेश का संदेश दिया।

गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर नजर आए, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, अधिकारियों और अभिभावकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन, जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।

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इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन न रहकर व्यापक जनसहभागिता का अभियान बन चुका है। इस वर्ष भी प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों, जिला मुख्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में योग दिवस उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया।

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तर प्रदेश के नवीन परिसर में निदेशक गणेश कुमार के नेतृत्व में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास करते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

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इस अवसर पर एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि

योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का सशक्त साधन भी है। विद्यालय स्तर पर योग को बढ़ावा देकर हम बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

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प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, बस्ती, मेरठ, कुशीनगर, अलीगढ़ और आजमगढ़ सहित अनेक जनपदों में विद्यालयों, बीआरसी और जिला मुख्यालयों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को योग की उपयोगिता बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

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Edited By : Chetan Gour 

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