नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश में ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। अब प्रदेश के प्रत्येक गांव में कम से कम एक “लखपति गोपालक दीदी” तैयार की जाएगी। इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों को बड़े पैमाने पर पशुपालन और डेयरी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को हर गांव में कम से कम एक ‘लखपति गोपालक दीदी’ तैयार करने के निर्देश दिए। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन और केज कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
यह निर्देश कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने इंदौर में आयोजित पशुपालन, डेयरी एवं मछुआ कल्याण विभाग की संयुक्त संभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और कलेक्टर शिवम वर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के आला अधिकारी मौजूद थे।
महिला समूहों को पशुपालन से जोड़ने पर जोर
कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि पशुपालन को केवल सहायक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने वाले प्रमुख आर्थिक साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। महिला स्व-सहायता समूहों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार और स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
मां की तुलना में ढाई गुना ज्यादा दूध देगी
जारी आदेश के मुताबिक इसमें ग्रामीणों का एक रुपया भी खर्च नहीं होगा। बिना निवेश किए होने वाली कमाई सीधे महिलाओं के खाते में जाएगी। योजना की खासियत इसका ‘अनुवांशिक सुधार मॉडल’ है। विभाग ग्रामीण महिलाओं की उन साधारण गायों व भैंसों का उच्च नस्ल से मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान कराएगा, जो अभी नाममात्र का दूध देती हैं। कोख तो उसी देसी गाय की होगी, लेकिन उससे पैदा होने वाली नई पीढ़ी (एफ-1 बछिया/पड़िया) जब बड़ी होगी तो मां की तुलना में ढाई गुना ज्यादा दूध देगी।
3-4 बछिया हुईं तो 10 लाख का मुनाफा
दूध उत्पादन बढ़ने से हर दिन 4 से 5 लीटर अतिरिक्त दूध मिलेगा। 50 रुपये प्रति लीटर के भाव से यह हर दिन का 200 से 250 रुपये का लाभ होगा। यह उन्नत बछिया अपने जीवनकाल में परिवार को लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक का लाभ देगी। किसी महिला के पास ऐसी 3-4 बछिया तैयार हो जाती हैं, तो उनके जीवनकाल का कुल लाभ 10 लाख रुपये पार कर जाएगा।
क्षीरधारा ग्राम योजना से बढ़ेगा दुग्ध व्यवसाय
बैठक में क्षीरधारा ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गांवों में दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय को संगठित स्वरूप दिया जाए तथा पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर विपणन सुविधाओं से जोड़ा जाए।
प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने कहा कि वर्तमान में उच्च गुणवत्ता वाली नस्ल के पशुओं के लिए किसानों को दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसे खत्म करने के लिए ‘हिरण्यगर्भ नस्ल सुधार अभियान’ को परिणाममूलक ढंग से चलाया जाएगा।
कृषि आयुक्त बर्णवाल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ समय पर पहुंचना चाहिए। साथ ही गोशालाओं को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि वर्मी कम्पोस्ट, गोबर गैस, जैविक खेती और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
मत्स्य पालन में केज कल्चर को बढ़ावा
बैठक में मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने जलाशयों और तालाबों में केज कल्चर (केज पद्धति) को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वैज्ञानिक तकनीक से कम क्षेत्र में अधिक मछली उत्पादन संभव है, जिससे मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
बैठक के अंत में कृषि आयुक्त ने कहा कि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों, पशुपालकों तथा महिला समूहों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
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