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10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना

बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था।

मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म

विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है।

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed]

राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर

विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।

"> बीच परफॉर्मेंस बैकस्टेज जाकर दिया बच्चे को जन्म, पत्थर के नाल काटकर फिर स्टेज पर आकर किया डांस श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठा’ को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की मशहूर लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई भाऊ मंग नारायणगांवकर का किरदार निभाया है। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ जिसके बाद में फंस की एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई कि आखिरकार विठाबाई कौन है। जिन्होंने अपनी जिंदगी संघर्ष और कला को समर्पित कर दी।   कौन है विठाबाई? आज हम विठाबाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1935 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पर तमाशा सिर्फ एक कला नहीं थी बल्कि जीवन का एक हिस्सा हुआ करता था।            विठाबाई के दादा नारायण खुडे ने तमाशा मंडली की स्थापना की थी। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और इसीलिए बचपन से ही विठाबाई भी मंच और लोक कला के माहौल में ही बड़ी हुई थी।       10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था।   मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है।   [embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed]  राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।
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10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना

बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था।

मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म

विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है।

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राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर

विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।

">बीच परफॉर्मेंस बैकस्टेज जाकर दिया बच्चे को जन्म, पत्थर के नाल काटकर फिर स्टेज पर आकर किया डांस

श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठा’ को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की मशहूर लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई भाऊ मंग नारायणगांवकर का किरदार निभाया है। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ जिसके बाद में फंस की एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई कि आखिरकार विठाबाई कौन है। जिन्होंने अपनी जिंदगी संघर्ष और कला को समर्पित कर दी।

कौन है विठाबाई?

आज हम विठाबाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1935 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पर तमाशा सिर्फ एक कला नहीं थी बल्कि जीवन का एक हिस्सा हुआ करता था।

बीच परफॉर्मेंस बैकस्टेज जाकर दिया बच्चे को जन्म, पत्थर के नाल काटकर फिर स्टेज पर आकर किया डांस श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठा’ को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की मशहूर लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई भाऊ मंग नारायणगांवकर का किरदार निभाया है। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ जिसके बाद में फंस की एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई कि आखिरकार विठाबाई कौन है। जिन्होंने अपनी जिंदगी संघर्ष और कला को समर्पित कर दी।   कौन है विठाबाई? आज हम विठाबाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1935 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पर तमाशा सिर्फ एक कला नहीं थी बल्कि जीवन का एक हिस्सा हुआ करता था।            विठाबाई के दादा नारायण खुडे ने तमाशा मंडली की स्थापना की थी। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और इसीलिए बचपन से ही विठाबाई भी मंच और लोक कला के माहौल में ही बड़ी हुई थी।       10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था।   मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है।   [embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed]  राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।

विठाबाई के दादा नारायण खुडे ने तमाशा मंडली की स्थापना की थी। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और इसीलिए बचपन से ही विठाबाई भी मंच और लोक कला के माहौल में ही बड़ी हुई थी।

10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना

बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था।

मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म

विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है।

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed]

राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर

विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।

श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली…

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