नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जीएसटी ट्रिब्यूनल में असल में सुनवाई शुरू हो उससे पहले उसका व्यावहारिक अनुभव लेने के लिए कर सलाहकारों ने तैयारी शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश टैक्स कंसलटेंट एसोसिएशन ने ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया एवं उसकी तैयारी को लेकर गुरुवार को सेमिनार व मूट कोर्ट आयोजित की।
मूट कोर्ट के दौरान अपील प्रस्तुत करने से लेकर दस्तावेज व तथ्य पेश करने और फिर जिरह करने का भी अनुभव कर सलाहकारों ने लिया। मध्य प्रदेश में इस प्रकार का पहला प्रयोग था। इसमें वास्तविक ट्रिब्यूनल के वातावरण में लंबित जीएसटी मामलों पर बहस कराई गई। लगभग 10 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं कर सलाहकारों ने छह प्रमुख विवादित मुद्दों पर अपनी कानूनी क्षमता, शोध और मौखिक प्रस्तुति का प्रदर्शन किया।
इस दौरान एक मामले में एक प्रस्तुतिकर्ता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग करते हुए ड्राफ्ट जवाब तैयार किया गया, जिसमें एआई ने एक गलत केस लॉ रिपोर्ट करते हुए उसे आधार बनाते हुए पूरा जवाब ही गलत बना दिया। इस पर मूट कोर्ट के जजों ने समझाइश दी कि कभी भी किसी भी केस को अपने जवाब में रिपोर्ट करने के पूर्व उसका अध्ययन अवश्य करें।
आठ साल बाद ट्रिब्यूनल की स्थापना हुई
संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट सीए सुमित नीमा ने कहा कि जीएसटी कानून लागू होने के लगभग आठ वर्ष बाद ट्रिब्यूनल की स्थापना हुई है। ऐसे में अब ट्रिब्यूनल के शुरू होते ही उस पर करीब चार लाख से अधिक अपीलों का भारी बोझ पड़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में कई कर प्रकरणों में अपील दाखिल नहीं हो सकी थी, जिससे देशभर में विवादित मामलों की संख्या काफी बढ़ गई है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इतने बड़े बोझ को एक साथ ट्रिब्यूनल पर डालने के बजाय पुरानी अपीलों के समाधान के लिए डिस्प्यूट रिजोल्यूशन स्कीम लागू की जाए, जिसमें 20 से 30 प्रतिशत राशि जमा कर मामलों का निपटारा किया जा सके।
तीन महीने के अंदर अपील करना अनिवार्य
सेमिनार में सीए एसएन गोयल ने अपील की समय-सीमा पर जानकारी देते हुए बताया कि जिन मामलों में प्रथम अपील का आदेश एक अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हो चुका है, उनकी अपील 30 जून 2026 तक दाखिल करनी होगी। वहीं, एक अप्रैल 2026 के बाद प्राप्त आदेशों के खिलाफ अपील तीन माह के भीतर करनी अनिवार्य है। यदि अपील में देरी होती है, तो अधिकतम तीन माह तक की अतिरिक्त अवधि दी जा सकती है, जिसके लिए विलंब के उचित कारण बताते हुए आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
महंगा न्याय, कागज भी तय
सीए कीर्ति जोशी ने जीएसटी अपील प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अपील तय फार्म में इलेक्ट्रानिक रूप से जीएसटीएटी पोर्टल पर दाखिल की जाती है। अपील के लिए विवादित कर राशि का 20 प्रतिशत पूर्व जमा करना अनिवार्य है। इसके साथ ही आदेश की प्रमाणित प्रति सात दिनों के भीतर दस्तावेजी प्रारूप में जमा करना होती है, अन्यथा अपील की तारीख मान्य नहीं होगी।
अपील फाइल करने के लिए न्यूनतम पांच हजार रुपये फीस देनी होगी तथा प्रत्येक एक लाख रुपये की कर, ब्याज या दंड राशि पर एक हजार रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क अन्य कर ट्रिब्यूनलों की तुलना में अधिक है, जिससे जीएसटी में न्याय प्राप्त करना अपेक्षाकृत महंगा हो गया है।
अपील केवल अंग्रेजी भाषा में स्वीकार की जाएगी
अपील की तकनीकी आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि दस्तावेज केवल ए-4 साइज पेपर पर, निर्धारित मार्जिन और डबल स्पेसिंग के साथ तैयार किए जाने चाहिए। अपील केवल अंग्रेजी भाषा में स्वीकार की जाएगी और अन्य भाषा के दस्तावेजों का प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद संलग्न करना आवश्यक होगा।
करदाता पक्ष की ओर से सीए उमेश गोयल, सीए नवीन खंडेलवाल, सीए अंकित करणपुरिया, सीए प्रखर गोयल एवं अंकुर अग्रवाल ने पैरवी की, जबकि विभाग की ओर से सीए शैलेन्द्र पोरवाल, सीए दिलीप राठौर एवं सीए अरविंद चावला ने अपना पक्ष रखा। सीए पीडी नागर एवं सीए आशीष गोयल ने न्यायाधीश की भूमिका निभाते हुए निर्णय सुनाए तथा प्रतिभागियों को ट्रिब्यूनल में पेश होने के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी।
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