प्री-मानसून के सक्रिय होने से पूरा मध्य प्रदेश भीग रहा है। कहीं तेज आंधी चल रही है तो कहीं ओले-बारिश का दौर है। शनिवार को भोपाल समेत कई जिलों में आंधी की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा या इससे अधिक रही। इधर, मानसून 3 से 4 दिन लेट चल रहा है। ऐसे में यह
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मौसम केंद्र (IMD) भोपाल की माने तो मानसून के आने तक पूरे प्रदेश में प्री-मानसूनी एक्टिविटी जारी रहेगी। रविवार को शिवपुरी और अशोकनगर में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सागर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बारिश होगी।
शनिवार को पचमढ़ी में करीब आधे घंटे तक बारिश हुई थी।
प्रदेश में अगले 4 दिन तक ऐसा ही मौसम मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक ट्रफ की एक्टिविटी है। इसलिए अगले 4 दिन का वेदर फोरकास्ट जारी किया गया है। इसके अनुसार, आंधी-बारिश के साथ रविवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में तेज गर्मी का असर भी रहेगा।
भोपाल में आंधी-बारिश, इटारसी में एंबुलेंस पर गिरा पेड़ इससे पहले शनिवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। भोपाल समेत नरसिंहपुर, सीहोर, नर्मदापुरम, पचमढ़ी और पिपरिया में आंधी के साथ जमकर बारिश हुई। बारिश का सबसे ज्यादा असर नर्मदापुरम जिले के इटारसी और आसपास के इलाकों में देखने को मिला।
यहां तेज आंधी और बारिश ने जमकर तबाही मचाई। कहीं पेड़ एंबुलेंस पर गिर गया तो कहीं बिजली विभाग का कर्मचारी बाल-बाल बच गया। सड़कों पर पेड़ धराशायी हो गए, बिजली लाइनें टूट गईं, मेले का मेन गेट उखड़ गया।

शनिवार को सागर, डिंडौरी में बारिश हुई। गुना में तेज आंधी चली।
भोपाल में 39.1, इंदौर में 38.1 डिग्री तापमान इधर, तापमान में गिरावट देखने को मिली। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में सबसे कम 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा। उज्जैन में 39 डिग्री, भोपाल में 39.1 डिग्री, इंदौर में 38.1 डिग्री और जबलपुर में 36.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
जबकि प्रदेश में सबसे कम तापमान शिवपुरी में 33 डिग्री दर्ज किया गया। सिवनी में 34.2 डिग्री, पचमढ़ी में 35.6 डिग्री, श्योपुर में 36.4 डिग्री, मलाजखंड में 37 डिग्री, छिंदवाड़ा में 37.2 डिग्री, सागर में 37.4 डिग्री और बैतूल में 37.8 डिग्री रहा। राजगढ़ में सबसे ज्यादा 41 डिग्री सेल्सियस रहा।


अब जानिए 10 साल में कब-कब आया मानसून…

भोपाल में हर साल नौतपा में बारिश भोपाल में 14 साल में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज हुई, जबकि 2 बार बूंदाबांदी हुई। इस बार शुरुआत में ही बूंदाबांदी हो गई। 2018 और 2019 में सबसे ज्यादा तपिश रही, जब औसत तापमान 43 से ऊपर पहुंचा था। यहां भी लगातार 9 दिन तक मौसम बदला रहा। हालांकि, इसके बाद भी बारिश और आंधी का दौर जारी है।
मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम




जून में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड
भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 3 साल तो तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी।
वहीं, पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था।

इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 7 साल यानी- 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.6 डिग्री के बीच रहा है। पिछले साल तापमान 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल साढ़े 5 इंच पानी गिरा था।
बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 में इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।

ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्परेचर ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री और 2025 में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है।
मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 को पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1952 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2025 में यहां पूरे महीने 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।

जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यहीं से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2016 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटे की 30% तक बारिश जून में ही हुई।
पिछले साल साढ़े 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर संभाग के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, जबलपुर में 1998 में एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 16 जून 1882 को 24 घंटे में साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी।

उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2016 से 2025 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। उज्जैन में बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1970 में पूरे महीने साढ़े 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी।
वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था। इस दिन करीब साढ़े 6 इंच बारिश हुई थी। साल 2025 में पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।

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