इंदौर नगर निगम को बड़ा झटका लगा है। शिवाजी मार्केट की 126 दुकानों को खाली कराने के एसडीएम के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। …और पढ़ें
HighLights
- एसडीएम ने 22 मार्च को तीन दिन में दुकान खाली करने का आदेश दिया था
- कोर्ट ने दुकानदारों से कहा- 7 दिन में संभागायुक्त के सामने अपील और स्टे आवेदन दें
- दुकानदार बोले- नया मार्केट व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं, निगम हटाने की जिद कर रहा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर नगर निगम मुख्यालय के समीप स्थित शिवाजी मार्केट के 126 दुकानदारों को रविवार को अवकाश के बावजूद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। एसडीएम ने इन दुकानदारों को लोक परिसर बेदखली अधिनियम के तहत दुकानें खाली करने का आदेश जारी किया था। दुकानदारों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
रविवार को न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की विशेष पीठ में याचिका की सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता का तर्क सुनने के बाद एसडीएम के आदेश पर स्टे दे दिया। कोर्ट ने दुकानदारों से कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर एसडीएम के आदेश के खिलाफ संभागायुक्त के समक्ष अपील और स्टे आवेदन प्रस्तुत करें।
नगर निगम मुख्यालय में प्रदर्शन भी किया
जब तक संभागायुक्त स्टे आवेदन का निराकरण नहीं कर देते, तब तक नगर निगम शिवाजी मार्केट के दुकानदारों के खिलाफ किसी तरह की बेदखली की कार्रवाई नहीं कर सकेगा। रविवार सुबह कोर्ट की सुनवाई से पहले दुकानदारों ने निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया।
नगर निगम द्वारा शिवाजी मार्केट के 126 दुकानदारों को नंदलालपुरा स्थित नए मार्केट में शिफ्टिंग का प्रयास लंबे समय से चल रहा है। दुकानदार इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे चार दशक से अधिक समय से शिवाजी मार्केट में व्यापार कर रहे हैं। नंदलालपुरा के जिस मार्केट में उन्हें शिफ्ट करने का प्रयास हो रहा है, वह व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं है।
हाल ही में नगर निगम ने एसडीएम के समक्ष लोक परिसर बेदखली अधिनियम के तहत आवेदन दिया था। इसका निराकरण करते हुए गत 22 मार्च को एसडीएम ने दुकानदारों को तीन दिन में दुकान खाली करने का आदेश दे दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए दुकानदारों ने एडवोकेट मनीष यादव और मेहुल वर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर दी।
शीघ्र सुनवाई का आवेदन दिया
एडवोकेट यादव ने बताया कि एसडीएम के आदेश की सूचना दुकानदारों को 24 अप्रैल को दी गई। 25 अप्रैल को दुकानदार संभागायुक्त कार्यालय गए थे, लेकिन अवकाश होने से सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में आशंका थी कि निगम शिवाजी मार्केट में दुकानों को जमींदोज कर सकता है। इसे देखते हुए हमने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर चीफ जस्टिस को शीघ्र सुनवाई का आवेदन दिया।
रविवार को न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने मामले में सुनवाई की। उन्होंने एसडीएम के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए दुकानदारों से कहा है कि वे सात दिन में अपील और स्टे आवेदन संभागायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करें। जब तक स्टे आवेदन का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक निगम किसी तरह की रिमूवल की कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
दुकानदारों ने किया प्रदर्शन
रविवार सुबह शिवाजी मार्केट के दुकानदार और उनके स्वजन ने निगम मुख्यालय के गेट पर प्रदर्शन भी किया। उनका कहना है कि निगम शिवाजी मार्केट को हटाने की जिद कर रहा है। शिवाजी मार्केट में दुकान चलाते हुए दुकानदारों को चार दशक से अधिक समय हो गया है।
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