‘दांत टूटा, चेहरा सूज गया’ स्प्लिट्सविला 16 की प्रतियोगी प्रीत के साथ हुआ हादसा; बयान किया दर्द भरा किस्सा
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Sarijuddin
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:28 AM IST
Preet Singh: स्प्लिट्सविला 16 की प्रतियोगी प्रीत ने बताया है कि उनके साथ बड़ा हादसा हो गया है। उन्होंने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करके अपनी हालत दिखाई है।
प्रीत सिंह
– फोटो : इंस्टाग्राम@preetsingh.fit
विस्तार
एमटीवी स्प्लिट्सविला सीजन 16 की प्रतियोगी प्रीत सिंह ने हाल ही में अपने साथ हुए एक हादसे के बारे में बताया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई के एक क्लब में उनके साथ मारपीट हुई। इसके बाद उनका एक दांत टूट गया और आंखें सूज गईं।
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Sarijuddin
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:28 AM IST
Preet Singh: स्प्लिट्सविला 16 की प्रतियोगी प्रीत ने बताया है कि उनके साथ बड़ा हादसा हो गया है। उन्होंने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करके अपनी हालत दिखाई है।
प्रीत सिंह – फोटो : इंस्टाग्राम@preetsingh.fit
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एमटीवी स्प्लिट्सविला सीजन 16 की प्रतियोगी प्रीत सिंह ने हाल ही में अपने साथ हुए एक हादसे के बारे में बताया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई के एक क्लब में उनके साथ मारपीट हुई। इसके बाद उनका एक दांत टूट गया और आंखें सूज गईं।
इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड अभिनेता विनोद खन्ना की आज पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि पर आज हम आपको विनोद खन्ना से जुड़ी कुछ ऐसी बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो। 06 अक्तूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्में विनोद खन्ना ने शानदार अभिनय के दम पर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई थी। बतौर खलनायक अपने कॅरियर का आगाज कर नायक के रूप में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के बीच विशिष्ट पहचान बनाई। विनोद खन्ना ने स्नातक की शिक्षा मुंबई से की। इसी दौरान उन्हें एक पार्टी के दौरान निर्माता-निर्देशक सुनील दत्त से मिलने का विनोद खन्ना को मौका मिला।
खबरों के अनुसार, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त उन दिनों अपनी फिल्म 'मन का मीत' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने इस फिल्म में विनोद खन्ना से बतौर सहनायक काम करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव को विनोद खन्ना ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
पिता ने इस शर्त पर दी फिल्म में काम करने की अनुमति
इसके बाद विनोद खन्ना ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में पूछा तो उनके पिता ने उन पर बंदूक तान दी और कहा यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा। उन्हें पिता से काफी डॉट खानी पड़ी। इसके लिए विनोद खन्ना ने अपनी मां को समझाया।
मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद खन्ना को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की अनुमति दी। वहीं शर्त भी रखी की यदि फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं होते हो तो घर के व्यवसाय में हाथ बंटाना होगा। फिर उन्होंने अभिनय शुरू किया। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म मन का मीत टिकट खिड़की पर हिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी।
PC:aajtak
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Death Anniversary Special, Father,Gun, Vinod Khanna">
इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड अभिनेता विनोद खन्ना की आज पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि पर आज हम आपको विनोद खन्ना से जुड़ी कुछ ऐसी बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो। 06 अक्तूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्में विनोद खन्ना ने शानदार अभिनय के दम पर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई थी। बतौर खलनायक अपने कॅरियर का आगाज कर नायक के रूप में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के बीच विशिष्ट पहचान बनाई। विनोद खन्ना ने स्नातक की शिक्षा मुंबई से की। इसी दौरान उन्हें एक पार्टी के दौरान निर्माता-निर्देशक सुनील दत्त से मिलने का विनोद खन्ना को मौका मिला।
खबरों के अनुसार, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त उन दिनों अपनी फिल्म 'मन का मीत' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने इस फिल्म में विनोद खन्ना से बतौर सहनायक काम करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव को विनोद खन्ना ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
पिता ने इस शर्त पर दी फिल्म में काम करने की अनुमति
इसके बाद विनोद खन्ना ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में पूछा तो उनके पिता ने उन पर बंदूक तान दी और कहा यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा। उन्हें पिता से काफी डॉट खानी पड़ी। इसके लिए विनोद खन्ना ने अपनी मां को समझाया।
मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद खन्ना को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की अनुमति दी। वहीं शर्त भी रखी की यदि फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं होते हो तो घर के व्यवसाय में हाथ बंटाना होगा। फिर उन्होंने अभिनय शुरू किया। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म मन का मीत टिकट खिड़की पर हिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी।
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Death Anniversary Special, Father,Gun, Vinod Khanna">…जब पिता ने ही विनोद खन्ना पर तान दी बंदूक, इस शर्त पर मिली फिल्मों में काम करने की अनुमति
इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड अभिनेता विनोद खन्ना की आज पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि पर आज हम आपको विनोद खन्ना से जुड़ी कुछ ऐसी बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो। 06 अक्तूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्में विनोद खन्ना ने शानदार अभिनय के दम पर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई थी। बतौर खलनायक अपने कॅरियर का आगाज कर नायक के रूप में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के बीच विशिष्ट पहचान बनाई। विनोद खन्ना ने स्नातक की शिक्षा मुंबई से की। इसी दौरान उन्हें एक पार्टी के दौरान निर्माता-निर्देशक सुनील दत्त से मिलने का विनोद खन्ना को मौका मिला।
खबरों के अनुसार, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त उन दिनों अपनी फिल्म 'मन का मीत' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने इस फिल्म में विनोद खन्ना से बतौर सहनायक काम करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव को विनोद खन्ना ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
पिता ने इस शर्त पर दी फिल्म में काम करने की अनुमति
इसके बाद विनोद खन्ना ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में पूछा तो उनके पिता ने उन पर बंदूक तान दी और कहा यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा। उन्हें पिता से काफी डॉट खानी पड़ी। इसके लिए विनोद खन्ना ने अपनी मां को समझाया।
मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद खन्ना को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की अनुमति दी। वहीं शर्त भी रखी की यदि फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं होते हो तो घर के व्यवसाय में हाथ बंटाना होगा। फिर उन्होंने अभिनय शुरू किया। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म मन का मीत टिकट खिड़की पर हिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी।
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Death Anniversary Special, Father,Gun, Vinod Khanna
पायधुनी इलाके में रहने वाले अब्दुल्ला डोकडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35) और उनकी दो बेटियां आयशा (16) और जैनब (13) अपने घर में मृत पाए गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि परिवार ने 25 अप्रैल की रात करीब 9 बजे बिरयानी खाई थी। इसके बाद देर रात करीब 1 बजे परिवार के सदस्यों ने तरबूज का सेवन किया। अगली सुबह यानी 26 अप्रैल को सुबह 5-6 बजे के बीच सभी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिवार के सभी सदस्यों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत पास के डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्हें इंजेक्शन दिया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और सभी की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उसी रात परिवार के साथ पांच अन्य रिश्तेदारों ने भी बिरयानी खाई थी, हालांकि उनकी हालत के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौत का कारण खाने का कोई रिएक्शन था, फूड पॉइजनिंग या कुछ और। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारण का खुलासा हो सकेगा। Edited by : Sudhir Sharma
पायधुनी इलाके में रहने वाले अब्दुल्ला डोकडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35) और उनकी दो बेटियां आयशा (16) और जैनब (13) अपने घर में मृत पाए गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि परिवार ने 25 अप्रैल की रात करीब 9 बजे बिरयानी खाई थी। इसके बाद देर रात करीब 1 बजे परिवार के सदस्यों ने तरबूज का सेवन किया। अगली सुबह यानी 26 अप्रैल को सुबह 5-6 बजे के बीच सभी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिवार के सभी सदस्यों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत पास के डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्हें इंजेक्शन दिया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और सभी की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उसी रात परिवार के साथ पांच अन्य रिश्तेदारों ने भी बिरयानी खाई थी, हालांकि उनकी हालत के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौत का कारण खाने का कोई रिएक्शन था, फूड पॉइजनिंग या कुछ और। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारण का खुलासा हो सकेगा। Edited by : Sudhir Sharma
">9 बजे खाई बिरयानी, 1 बजे खाया तरबूज, एक रात में पूरा परिवार खत्म, Maharashtra की घटना ने चौंकाया
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार लोगों की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। यह मामला मुंबई के पायधुनी इलाके का है, जिसने लोगों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या खाने-पीने के संयोजन से ऐसी घटना हो सकती है।
पायधुनी इलाके में रहने वाले अब्दुल्ला डोकडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35) और उनकी दो बेटियां आयशा (16) और जैनब (13) अपने घर में मृत पाए गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि परिवार ने 25 अप्रैल की रात करीब 9 बजे बिरयानी खाई थी। इसके बाद देर रात करीब 1 बजे परिवार के सदस्यों ने तरबूज का सेवन किया। अगली सुबह यानी 26 अप्रैल को सुबह 5-6 बजे के बीच सभी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिवार के सभी सदस्यों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत पास के डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्हें इंजेक्शन दिया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और सभी की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उसी रात परिवार के साथ पांच अन्य रिश्तेदारों ने भी बिरयानी खाई थी, हालांकि उनकी हालत के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौत का कारण खाने का कोई रिएक्शन था, फूड पॉइजनिंग या कुछ और। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारण का खुलासा हो सकेगा। Edited by : Sudhir Sharma
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
विपक्षी दलों ने यह आरोप लगाते हुए संयुक्त समिति से दूरी बना ली है कि प्रस्तावित कानून गैर-भाजपा और विपक्ष शासित सरकारों को अस्थिर करने के उद्देश्य से लाया गया है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनी एक विशेष, अस्थाई समिति है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है।
इसमें लोकसभा से दोगुनी संख्या में सदस्य होते हैं और यह जांच के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को बुला सकती है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद छोड़ने के प्रावधान वाले विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक संविधान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।
क्या होती है JPC?
जेपीसी का मतलब ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (संयुक्त संसदीय समिति) होता है। जिन बड़े मामलों पर गहराई से चर्चा और विचार करने की जरूरत होती है, उन्हें जेपीसी में भेज दिया जाता है।JPC दो तरह की होती हैं, जिनमें एक अस्थाई कमेटी होती है और दूसरी स्टैंडिंग कमेटी।स्पीकर जेपीसी के गठन के वक्त ही कार्यकाल का निर्धारण भी कर देते हैं। जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
जेपीसी मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था से पूछताछ कर सकती है और पेश होने के लिए बुला सकती है। जेपीसी स्पीकर को अपनी रिपोर्ट पेश करती है और अंतिम फैसला स्पीकर ही लेते हैं। सरकार को अगर लगता है कि जेपीसी की रिपोर्ट देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है तो वो उसे रोक सकती है।
Edited By : Chetan Gour
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भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
विपक्षी दलों ने यह आरोप लगाते हुए संयुक्त समिति से दूरी बना ली है कि प्रस्तावित कानून गैर-भाजपा और विपक्ष शासित सरकारों को अस्थिर करने के उद्देश्य से लाया गया है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनी एक विशेष, अस्थाई समिति है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है।
इसमें लोकसभा से दोगुनी संख्या में सदस्य होते हैं और यह जांच के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को बुला सकती है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद छोड़ने के प्रावधान वाले विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक संविधान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।
क्या होती है JPC?
जेपीसी का मतलब ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (संयुक्त संसदीय समिति) होता है। जिन बड़े मामलों पर गहराई से चर्चा और विचार करने की जरूरत होती है, उन्हें जेपीसी में भेज दिया जाता है।JPC दो तरह की होती हैं, जिनमें एक अस्थाई कमेटी होती है और दूसरी स्टैंडिंग कमेटी।स्पीकर जेपीसी के गठन के वक्त ही कार्यकाल का निर्धारण भी कर देते हैं। जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
जेपीसी मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था से पूछताछ कर सकती है और पेश होने के लिए बुला सकती है। जेपीसी स्पीकर को अपनी रिपोर्ट पेश करती है और अंतिम फैसला स्पीकर ही लेते हैं। सरकार को अगर लगता है कि जेपीसी की रिपोर्ट देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है तो वो उसे रोक सकती है।
Edited By : Chetan Gour
">PM,CM और मंत्रियों को पद से हटाने वाले संशोधन विधेयक पर JPC आज करेगी चर्चा
Joint Parliamentary Committee News : प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों के मामलों में उनको पद से हटाने से संबंधित विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति आज महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संयुक्त समिति के सदस्य महाराष्ट्र और ओडिशा के दौरे पर हैं। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों के मामलों में उनको पद से हटाने से संबंधित विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति आज महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संयुक्त समिति के सदस्य महाराष्ट्र और ओडिशा के दौरे पर हैं।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
विपक्षी दलों ने यह आरोप लगाते हुए संयुक्त समिति से दूरी बना ली है कि प्रस्तावित कानून गैर-भाजपा और विपक्ष शासित सरकारों को अस्थिर करने के उद्देश्य से लाया गया है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनी एक विशेष, अस्थाई समिति है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है।
इसमें लोकसभा से दोगुनी संख्या में सदस्य होते हैं और यह जांच के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को बुला सकती है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद छोड़ने के प्रावधान वाले विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक संविधान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।
क्या होती है JPC?
जेपीसी का मतलब ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (संयुक्त संसदीय समिति) होता है। जिन बड़े मामलों पर गहराई से चर्चा और विचार करने की जरूरत होती है, उन्हें जेपीसी में भेज दिया जाता है।JPC दो तरह की होती हैं, जिनमें एक अस्थाई कमेटी होती है और दूसरी स्टैंडिंग कमेटी।स्पीकर जेपीसी के गठन के वक्त ही कार्यकाल का निर्धारण भी कर देते हैं। जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
जेपीसी मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था से पूछताछ कर सकती है और पेश होने के लिए बुला सकती है। जेपीसी स्पीकर को अपनी रिपोर्ट पेश करती है और अंतिम फैसला स्पीकर ही लेते हैं। सरकार को अगर लगता है कि जेपीसी की रिपोर्ट देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है तो वो उसे रोक सकती है।
Edited By : Chetan Gour
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