संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की है। सुरक्षा परिषद में समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि इस रास्ते से जहाजों के आने-जाने की आजादी का पूरा सम्मान होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नियमों को बिना किसी देरी के लागू करना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्या कहा?
इसको लेकर गुटेरेस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं जलडमरूमध्य खोलें। जहाजों को गुजरने दें। कोई टोल न लगाएं। कोई भेदभाव न करें। व्यापार फिर से शुरू होने दें। वैश्विक अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने दें। सुरक्षित, निर्बाध आवागमन आर्थिक और मानवीय रूप से अत्यंत आवश्यक है।’
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा, दुनिया की पांचवां हिस्सा प्राकृतिक गैस (LNG) और लगभग एक-तिहाई खाद का व्यापार भी यहीं से होता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि इस रास्ते को सुरक्षित और खुला रखना आर्थिक और मानवीय नजरिए से बहुत आवश्यक है।
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इस समुद्री रास्ते में आई रुकावट के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। साथ ही ऊर्जा और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सामान लाने-ले जाने का खर्च और बीमा की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। कोरोना महामारी और यूक्रेन संकट के बाद अब यह सप्लाई चेन की सबसे बड़ी समस्या बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दी चेतावनी
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि इस दबाव की वजह से ईंधन की टंकियां और दुकानों की अलमारियां खाली हो रही हैं। लोगों को खाने के लाले पड़ रहे हैं। यह समय फसलों की बुवाई का है। अगर यह रुकावट जारी रही, तो दुनिया में भोजन का बड़ा संकट पैदा हो सकता है। इससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया के करोड़ों लोग भूख और गरीबी की चपेट में आ सकते हैं।
इसका सबसे ज्यादा बोझ उन गरीब और छोटे द्वीपीय देशों पर पड़ रहा है जो समुद्री आयात पर निर्भर हैं। इन देशों की इस संकट में कोई गलती नहीं है, फिर भी वे सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं। गुटेरेस ने सभी देशों से संयम बरतने और आपसी बातचीत बढ़ाने को कहा। उन्होंने इस समस्या को सुलझाने के लिए अपनी मदद की पेशकश भी की। उन्होंने कहा कि समुद्र को शांति और सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए, न कि टकराव का। यह समय सही फैसला लेने और कदम उठाने का है।
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