नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्कूली शिक्षा विभाग के इंदौर विकासखंड (ब्लाक) शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में हुए 2.86 करोड़ रुपये के गबन में बुधवार को भृत्य सिद्धार्थ जोशी को एमजी रोड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ने पत्नी और बच्चों के खाते में 1.75 करोड़ रुपये जमा किए थे।
मुख्य आरोपितों द्वारा आठ सह आरोपितों के कुल 33 बैंक खातों में शासकीय मद की दो करोड़ से अधिक राशि ट्रांसफर कर गबन किया गया है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले में आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे। बता दें कि भोपाल स्थित आईटी सेल द्वारा गबन के मामले को पकड़ा गया था। गबन में बड़े अधिकारियों की भूमिका होने की भी शंका है, जो गबन के दौरान इंदौर विकासखंड कार्यालय में पदस्थ रहे हैं।
यह है मुख्य आरोपित
सिद्धार्थ जोशी, भृत्य (शाउमावि खजराना) – मोहन दांगी, अतिथि शिक्षक (शासकउमावि कम्पेल) – पवन खामोद, भृत्य (शासकउमावि कम्पेल) – छोटेलाल गौड, सहायक ग्रेड- दो, (शासकउमावि संयोगितागंज) – केदारनारायण दीक्षित, अतिथि शिक्षक (शासकउमावि संयोगितागंज)
परिवार के सदस्यों के खाते में जमा की राशि
जांच में सामने आया कि आरोपित सिद्धार्थ जोशी ने पत्नी रेणु और बेटी मोहक जोशी निवासी एलपी भार्गव नगर (उज्जैन) के खाते में 1.75 करोड़ रुपये जमा किए थे। इन दोनों को भी पुलिस ने सह आरोपित बनाया है।
इसी प्रकार अन्य मुख्य आरोपितों ने हेमलता, रोशन पानेरी, मुकेश दांगी, अनीता दांगी, जगदीश और मुकेश राठौर के खातों में राशि जमा करवाई थी। इन सभी के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर लिया है।
तत्कालीन बीईओ सहित अधिकारियों की भी हो रही जांच इंदौर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आने वाली छात्रवृत्ति, जीपीएफ और अन्य मद की राशि का गबन लंबे समय से किया जा रहा था।
2018 से राशि को गलत तरीके से निकाली थी। भोपाल में ऑडिट के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई है। गबन अवधि के दौरान इंदौर कार्यालय में पदस्थ रहे तत्कालीन बीईओ सहित अन्य अधिकारियों की भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा वर्तमान में बड़े पदों पर अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है।
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