नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दूध, मसाले, मिठाई, तेल और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट सामने आ रही है। लेकिन विभाग की जांच व्यवस्था शहर की जरूरतों के मुकाबले काफी कमजोर नजर आ रही है।
हालात यह हैं शहर में हजारों प्रतिष्ठान है, लेकिन वर्षभर में करीब 1400 संस्थानों की ही जांच विभाग कर पाता है। ऐसे में प्रतिष्ठानों में बिक रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी कैसे हो सकेगी। इंदौर में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानें, डेयरी, किराना और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 50 हजार से अधिक है।
खाद्य एवं औषधि विभाग हर माह औसतन 120 प्रतिष्ठानों की जांच करता है। पूरे वर्ष में यह आंकड़ा करीब 1400 तक पहुंचता है। यदि इसी गति से जांच होती रही तो शहर के सभी प्रतिष्ठानों की एक बार जांच करने में तीन दशक से भी अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल औपचारिक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बाजार में मिलावटखोरों के खिलाफ ऐसा डर पैदा करना होता है जिससे वे नियमों का पालन करने को मजबूर हों। लेकिन जब जांच का दायरा सीमित रह जाता है तो मिलावट करने वालों के हौसले बढ़ना स्वाभाविक है।
जिले में 11 अधिकारी, जरूरत 25 की
इंदौर में खाद्य विभाग में अधिकारी सहित अन्य स्टाफ की कमी बड़ी समस्या है। जिले के लिए केवल 11 पद स्वीकृत हैं और वर्तमान में लगभग यही स्टाफ उपलब्ध भी है। लेकिन शहर की आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और खाद्य प्रतिष्ठानों की संख्या को देखते हुए करीब 25 अधिकारियों और कर्मचारियों की जरूरत है। क्योंकि मौजूदा संसाधनों के सहारे पूरे जिले में प्रभावी निगरानी करना मुश्किल है। शहर में नियमित जांच और जागरूकता अभियान भी दिखाई नहीं देते हैं। कई बार कार्रवाई केवल त्योहारों या विशेष अभियानों तक सीमित रह जाती है, जबकि पूरे साल बाजारों में निगरानी आवश्यक है।
मिलावटी खाद्य पदार्थ के कारण बिगड़ रही सेहत
डाक्टरों के मुताबिक मिलावटी खाद्य पदार्थ का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। नकली रंग, रसायन और घटिया गुणवत्ता की सामग्री का लंबे समय तक सेवन करने से पेट, लीवर, किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है।
हाल ही में आइसक्रीम निर्माता पर की कार्रवाई
हाल ही में शहर में आइसक्रीम निर्माण में सेकरिन जैसी हानिकारक चीजों के उपयोग का मामला सामने आया था। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक मात्रा में इसका सेवन बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। मामले में कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य बंद करवाया। वहीं हल्दी में मिलावट के कारण शादी समारोह में दूल्हा-दुल्हन बीमार हुए थे। मिलावटी के कारण गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो गया था। कुछ माह पहले लाल मिर्च में भी मिलावट पकड़ी गई थी।
देशभर में सप्लाई होती है खाद्य सामग्री
शहर में हजारों छोटी-बड़ी खाद्य निर्माण इकाइयां संचालित हो रही हैं। यहां तैयार होने वाली खाद्य सामग्री केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि देशभर में सप्लाई की जाती है। ऐसे में मिलावटी सामग्री का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा मिलावट दूध से बने उत्पाद और मसालों में पाई जाती है।
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