नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में पानी के लिए मचे हाहाकार के बीच संस्था सेवा सुरभि ने रविवार को साउथ तुकोगंज स्थित एक होटल में जल संकट पर विचार मंथन आयोजित किया, जिसमें नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित शहर के कई विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजन ने भाग लिया। प्रत्येक वक्ता ने जल संकट के कारणों और उसके समाधान पर चर्चा की।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि शहर में पेयजल की कमी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी समस्या उसकी वितरण व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि शहर में प्रतिदिन लगभग 400 एमएलडी पानी उपलब्ध है, लेकिन छह लाख से अधिक घरों में से केवल 2.99 लाख घरों में ही वैध जल कनेक्शन हैं।
कई क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के बावजूद जल आपूर्ति की व्यवस्था उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। उन्होंने बताया कि नर्मदा से पानी लाने पर होने वाले खर्च की तुलना में निगम को बहुत कम राजस्व प्राप्त हो रहा है और तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी बड़ी चुनौती है।
जल संकट बढ़ना चिंताजनक
भूगर्भ जल विशेषज्ञ डॉ. सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष अच्छी वर्षा होने के बावजूद इस बार जल संकट बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि भूजल स्तर में सुधार के बावजूद कई बोरवेल सूख गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं। उन्होंने जल पुनर्भरण (वाटर रिचार्जिंग) की निगरानी और पानी की खपत कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विचारक राकेश दीवान ने कहा कि समाज में उपभोग की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। लोग जरूरत से ज्यादा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाहन धोने, सड़कों की सफाई और अन्य कार्यों में बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद किया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा।
40 प्रतिशत पानी व्यर्थ हो जाता है
पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि सरकारी भवनों, निजी मकानों और बगीचों में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) अनिवार्य किया जाए। साथ ही जल वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण कर लीकेज रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाए। वक्ताओं ने बताया कि शहर का लगभग 40 प्रतिशत पानी विभिन्न कारणों से व्यर्थ हो जाता है।
लीकेज से बहता रहता है पानी
कार्यक्रम में सामने आया कि नर्मदा पाइपलाइन में कई स्थानों पर लीकेज हैं, जिनके कारण बड़ी मात्रा में पानी बह जाता है। विशेषज्ञों ने पुराने पाइप जाइंट बदलने, नियमित आडिट कराने और नए जल स्रोत विकसित करने की आवश्यकता बताई। वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी ने कहा कि नर्मदा का पानी आने के बाद शहर ने अपने पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं, बावड़ियां और तालाबों की उपेक्षा कर दी।
उन्होंने कहा कि राजस्थान के कम वर्षा वाले शहर भी जल प्रबंधन के कारण बेहतर स्थिति में हैं जबकि इंदौर में पर्याप्त बारिश के बाद भी संकट खड़ा हो जाता है। समस्या पानी की उपलब्धता से अधिक हमारी सोच और प्रबंधन में है।
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