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Vaibhav Sooryavanshi: एक शॉट के लिए हजार गेंद खेल जाते थे वैभव सूर्यवंशी, कैसे पुल-एरियल शॉट पर पाई महारत?

Vaibhav Sooryavanshi: एक शॉट के लिए हजार गेंद खेल जाते थे वैभव सूर्यवंशी, कैसे पुल-एरियल शॉट पर पाई महारत?

वैभव सूर्यवंशी के लिए समस्तीपुर से पटना का सफर सही मायनों में वरदान बन गया। कोविड के दिनों में पिता संजीव बेटे को सप्ताह में चार दिन समस्तीपुर से पटना कोच मनीष ओझा के पास लेकर आते थे। संजीव के साथ वैभव के अलावा समस्तीपुर से लाए गए पांच गेंदबाज भी होते थे। ये गेंदबाज खुद भी अभ्यास करते थे, लेकिन संजीव का पिता निर्देश होता था कि वे वैभव को बल्लेबाजी कराएंगे। 

संजीव मैदान के एक कोने में बैठकर वैभव का अभ्यास देखा करते थे। कोच ने देखा वैभव को पुल और हुक के अलावा एरियल शॉट लगाने में मजा आता है। इसके बाद उन्होंने अपनी अकादमी के गेंदबाजों और पिता के साथ लाए गेंदबाजों को एक शॉट पर छह सौ से हजार गेंदें वैभव को फिंकवाने का लक्ष्य रखा। यह सिलसिला लंबे समय तक चला। मनीष बताते हैं कि यही कारण है कि पुल, हुक और एरियल शॉट वैभव के हाथों की मांसपेशियों में समां (मसल्स मैमोरी) गए हैं। तभी तो वैभव कोई भी गेंदबाज हो, सफाई से ये शॉट लगाने में बिल्कुल नहीं हिचकते हैं।




Young batter Vaibhav Sooryavanshi profile and story coach Manish Ojha reaction know details

वैभव सूर्यवंशी
– फोटो : अमर उजाला


पिता ने कर्ज में डूबकर वैभव को कराई तैयारी

पूर्व रणजी क्रिकेटर मनीष ने अमर उजाला को बताते हैं कि वैभव की सफलता में उनके पिता का बहुत बड़ा त्याग छुपा है। वह जब वैभव और साथी गेंदबाजों को कोविड के दौरान पटना लाते थे तो कर्ज में डूबे थे। उन्होंने अपने दोस्तों और कई लोगों से कर्ज ले रखा था, लेकिन उन्होंने कभी वैभव को इसका जिक्र नहीं किया। वह उन्हें इस बारे में बताते थे। मनीष बताते हैं कि यह कर्ज 25 से 50 लाख रुपये तक हो गया था। जब वैभव आईपीएल में राजस्थान के लिए चयनित हुए तो इस राशि से उन्होंने सारा कर्ज चुकाया।


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वैभव सूर्यवंशी का शानदार प्रदर्शन
– फोटो : अमर उजाला


तब कोच ने बोला देश के लिए खेलेगा वैभव

मनीष बताते हैं कि कोविड के ही दिन थे। उनकी तबियत ठीक नहीं थी। वैभव पिता के साथ मैदान पर आ चुके थे। उन्होंने वैभव को अभ्यास नहीं कराया और सीधे मैच में उतार दिया। विरोधी टीम में एक रणजी क्रिकेटर और कई अंडर-23, 19 क्रिकेटर खेल रहे थे। इस मैच में 10 साल के वैभव ने 93 गेंद में 118 रन बनाए और आठ छक्के लगाए। सभी छक्के 75 मीटर से ऊपर के थे। तभी उन्होंने पास में बैठे वैभव के पिता को बोला था कि आपका बेटा एक दिन देश के लिए खेलेगा, लेकिन यह नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी ही उसे खेलने का मौका मिलेगा।


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वैभव सूर्यवंशी
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


पिता से काफी डरते हैं वैभव

मनीष के मुताबिक वैभव ने पटना में एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ा। वह मैदान पर आते थे तो सिर्फ नेट पर अभ्यास करते रहते थे। वह उन्हें हर दिन अलग-अलग शॉट का अभ्यास कराते थे। मनीष बताते हैं कि वैभव अपने पिता से काफी डरते हैं। अब वह उनके सामने कुछ बोल भी लेते हैं। एक समय ऐसा था कि वह वैभव पिता के सामने जुबान भी नहीं खोलते थे और पिता भी अभ्यास के दौरान मैदान से हिलते नहीं थे। मनीष कहते हैं कि यही कारण था कि वह प्रमुख मैचों में वैभव के पिता को साथ रहने के लिए कहते थे। मनीष मानते हैं कि आयरलैंड-इंग्लैंड में वैभव के पिता का साथ जाना उसके लिए बहुत अच्छा होगा।


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