पिता ने कर्ज में डूबकर वैभव को कराई तैयारी
पूर्व रणजी क्रिकेटर मनीष ने अमर उजाला को बताते हैं कि वैभव की सफलता में उनके पिता का बहुत बड़ा त्याग छुपा है। वह जब वैभव और साथी गेंदबाजों को कोविड के दौरान पटना लाते थे तो कर्ज में डूबे थे। उन्होंने अपने दोस्तों और कई लोगों से कर्ज ले रखा था, लेकिन उन्होंने कभी वैभव को इसका जिक्र नहीं किया। वह उन्हें इस बारे में बताते थे। मनीष बताते हैं कि यह कर्ज 25 से 50 लाख रुपये तक हो गया था। जब वैभव आईपीएल में राजस्थान के लिए चयनित हुए तो इस राशि से उन्होंने सारा कर्ज चुकाया।
तब कोच ने बोला देश के लिए खेलेगा वैभव
मनीष बताते हैं कि कोविड के ही दिन थे। उनकी तबियत ठीक नहीं थी। वैभव पिता के साथ मैदान पर आ चुके थे। उन्होंने वैभव को अभ्यास नहीं कराया और सीधे मैच में उतार दिया। विरोधी टीम में एक रणजी क्रिकेटर और कई अंडर-23, 19 क्रिकेटर खेल रहे थे। इस मैच में 10 साल के वैभव ने 93 गेंद में 118 रन बनाए और आठ छक्के लगाए। सभी छक्के 75 मीटर से ऊपर के थे। तभी उन्होंने पास में बैठे वैभव के पिता को बोला था कि आपका बेटा एक दिन देश के लिए खेलेगा, लेकिन यह नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी ही उसे खेलने का मौका मिलेगा।
पिता से काफी डरते हैं वैभव
मनीष के मुताबिक वैभव ने पटना में एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ा। वह मैदान पर आते थे तो सिर्फ नेट पर अभ्यास करते रहते थे। वह उन्हें हर दिन अलग-अलग शॉट का अभ्यास कराते थे। मनीष बताते हैं कि वैभव अपने पिता से काफी डरते हैं। अब वह उनके सामने कुछ बोल भी लेते हैं। एक समय ऐसा था कि वह वैभव पिता के सामने जुबान भी नहीं खोलते थे और पिता भी अभ्यास के दौरान मैदान से हिलते नहीं थे। मनीष कहते हैं कि यही कारण था कि वह प्रमुख मैचों में वैभव के पिता को साथ रहने के लिए कहते थे। मनीष मानते हैं कि आयरलैंड-इंग्लैंड में वैभव के पिता का साथ जाना उसके लिए बहुत अच्छा होगा।
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