नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इन दिनों आम की चर्चा आम से लेकर खास तक में बनी हुई है। फलों के राजा आम की जब बात होती है तो रत्नागिरि और देवगढ़ के हापुस आम का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यहां के आम अगर अपने स्वाद, सुगंध और रंगत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं तो मध्य प्रदेश भी कहां पीछे रहने वाला है।
प्रदेश में पैदा होने वाला ‘नूरजहां’ आम अपने आकार, वजन और कीमत में कहीं आगे है। दिलचस्प बात तो यह है कि जहां इस आम की पैदावार होती है वह स्थान पर्यटन के नजरिए से भी बेहतर है। यह वह स्थान है जहां प्रकृति कुछ ज्यादा ही मेहबान है। यहां के आम ही नहीं बल्कि नजारे भी खास हैं और इस स्थान का नाम है कट्ठीवाड़ा।
सर्द मौसम में हिल स्टेशन
मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा पर बसा यह स्थान अपनी विविधता के कारण खासा प्रसिद्ध है। यह एक ऐसा स्थान है जहां हर मौसम में जाया जा सकता है। गर्मी के मौसम में यदि नूरजहां आम का आकर्षण बढ़ जाता है तो वहीं, बरसात में यहां के झरने सुहावने लगते हैं। सर्द मौसम में तो यह हिल स्टेशन से कम नजर नहीं आता।
शीतल हवा और हरे भरे वन, झरने और बादलों से ढंके पहाड़ों में पर्यटकों का कट्ठीवाड़ा की हरीभरी मनोरम घाटी में जमघट-सा लग जाता है। यहां गुजरात और मालवांचल के पर्यटक बड़ी संख्या में घूमने के लिए आते हैं।
झरना और वन भी है यहां
कट्ठीवाड़ा से मात्र दो किमी की दूरी पर यहां का सबसे प्रसिद्ध झरना है जो अगस्त से नवंबर माह तक पूर्ण सुंदरता के साथ बहता है। यहां जल का बहाव धीरे-धीरे कम होने लगता है लेकिन दिसंबर माह में भी इसकी सुंदरता पर्यटकों का मन मोह लेती है।
कट्ठीवाड़ा से लगभग पांच किमी की दूरी पर आमखुट क्षेत्र में चाटलिया पानी वन क्षेत्र स्थित है। यहां के सुरम्य वनों के बीच एक छोटा-सा झरना भी है। जिसका जल वहां स्थित मंदिर में शिवजी का अभिषेक करता रहता है। यहां घना वन क्षेत्र है।
अभयारण्य का भी आनंद
कट्ठीवाड़ा से लगभग पांच किमी दूर गोलंबा ग्राम में रतन माल वन क्षेत्र स्थित है। गोलंबा से रतनमाल की चढ़ाई पैदल की जा सकती है। यहां ट्रैकिंग का मजा लिया जा सकता है। पहाड़ी पर राजपरिवार द्वारा बनवाया शिव मंदिर भी है। रतन माल का आधा हिस्सा गुजरात क्षेत्र में भी है। यहां गुजरात सरकार ने रीछ अभ्यारण्य बनाया है।
साथ ही यहां नाइट स्टे के लिए कुटिया भी बनाई हुई है। वहां जीप, कार से जाना होता है जो लगभग यहां से 25 किमी दूरी पर स्थित है। सीएस आजाद नगर से कट्ठीवाड़ा आते समय करीब 12 किमी की दूरी पर आधा शीशी पहाड़ी है। यह अपने नाम के अनुरूप ही शीशी के आकार का है। यहां, पर्वतों पर चढ़ने के शौकीन जा सकते हैं। यहां का शहद बहुत प्रसिद्ध है। इसीलिए पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आस्था का केंद्र
डूंगरीमाता क्षेत्र का सुप्रसिद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक पर्यटन स्थल डूंगरीमाता माता के नाम से विख्यात है। यह छोटा उदयपुर मार्ग पर कट्ठीवाड़ा से लगती हुई पहाड़ी पर स्थित है। यहां वर्षभर दूर-दूर से श्रद्धालु मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते रहते हैं। हरे भरे वृक्षों के बीच पहाड़ी पर बने हुए प्राकृतिक मंदिर में माताजी की पारंपरिक प्रतिमाएं विराजित हैं।
एक आम की कीमत 3500 रुपये
देश-विदेशों में अपने आकार और स्वाद के लिए प्रसिद्ध ‘नूरजहां’ आम की मांग बढ़ी है। इस सीजन में तीन किलोग्राम वजन का ‘नूरजहां’ रिकॉर्ड 3500 रुपये में बिका है। क्किसान शिवराज जादव और भारतसिंह जादव ने बताया कि इस बार बगीचों में नूरजहां का सीमित उत्पादन हुआ है। प्रदेश के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के शौकीनों ने एडवांस बुकिंग कराई थी।
‘नूरजहां’ आम फसल की सुरक्षा भी जरूरी है इसलिए यहां 10 लट्ठधारी सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। किसान बताते हैं कि मूल रूप से अफगानी नस्ल के इस आम की कलम को वर्ष 1965 में गुजरात से लाकर कट्ठीवाड़ा की विशेष आबोहवा और मिट्टी में कड़े परिश्रम से तैयार किया गया है। इस साल डेढ़ किलो से लेकर तीन किलोग्राम तक के फल आए हैं।
छोटे फलों की कीमत 1000 से 1500 रुपये है। किसान भारतसिंह जादव के अनुसार यह पौधा पूरे आलीराजपुर जिले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है। आम के आकार और स्वाद को लेकर इसे 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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