याचिकाओं में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री, सांसद को भी पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस …और पढ़ें
HighLights
- चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिला था कोई प्रस्तावक
- अब एडवोकेट ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
- 3 अगस्त तक प्रतिवादियों को देना होगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष नौ अनूठी याचिकाएं प्रस्तुत हुई हैं। इन सभी में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री सहित अन्य सभी पदों पर एक व्यक्ति को एक से अधिक बार बैठाए जाने पर रोक लगाई जाए।
याचिकाओं में कहा है कि पूरे देश में एक व्यक्ति एक पद नियम लागू किया जाए। एक ही व्यक्ति के बार-बार पद पर नियुक्त होने से आमजन के अधिकार का हनन हो रहा है। याचिकाओं में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री, सांसद को भी पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अलीराजपुर के 70 वर्षीय एडवोकेट ने दायर की याचिका
हाई कोर्ट में ये जनहित याचिकाएं अलीराजपुर निवासी 70 वर्षीय एडवोकेट डा. शंकरलाल वागवान ने प्रस्तुत की हैं। वे ही याचिकाओं में पैरवी भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे उच्च शिक्षित हैं। उन्होंने विधानसभा का चुनाव लडने का प्रयास भी किया था, लेकिन किसी राजनीतिक दल ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे निर्दलीय चुनाव लड़ सकते थे, लेकिन उन्हें कोई प्रस्तावक और समर्थक नहीं मिला।
‘प्रत्येक नागरिक को एक बार प्रधानमंत्री-गृहमंत्री बनाना अनिवार्य हो’
याचिकाओं में अनूठी मांग करते हुए कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेदों के तहत भारत में एक राष्ट्र एक पद का उल्लंघन हो रहा है क्योंकि इन संविधान के अनुच्छेदों के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक को एक बार प्रधानमंत्री और एक बार गृहमंत्री बनाया जाना भारतीय संविधान के अंतर्गत अनिवार्य किया जाए। भारत में किसी को भी एक बार से अधिक एक पद पर नहीं बैठाया जाए क्योंकि इससे भारत के संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन होता है।
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